केवीके पिलखी में फसल उत्पादन के साथ बीज प्रदर्शन पर जोर

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new-logo_nपंचायत खबर टोली
मऊ : देश मे कृषि विकास में कृषि विज्ञान केंद्र अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक तरफ फसलों की पैदावार बढ़े इस पर जोर है, वहीं दूसरी ओर यह कोशिश भी हो रही है बीज का उत्पादन बढ़ाया जाए। देश के प्रतिष्ठित कृषि विज्ञान केंद्र में शुमार केवीके पिलखी द्वारा रबी सीजन में गेहूं के बीज उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते दलहनी फसल पर व्यापक प्रदर्शन किए गए हैं। मटर, मसूर व अरहर की कई प्रजातियों का 20 एकड़ में प्रथम पंक्ति प्रदर्शन कराने सहित वैज्ञानिकों ने आठ गांव में 45 प्रक्षेत्र पर जीरोटील मशीन द्वारा गेहूं व मसूर की बोआई कराई है। इस सीजन में आदर्श गांव को तकनीकी रुप से संतृप्त करने के लिए कृषकों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। तकनीकी संसाधनों से लैस केंद्र पर सब्जी पौध उत्पादन के साथ कई माडल नर्सरी का निर्माण भी किया गया है। इस दौरान मृदा परिक्षण इकाई व ट्रैक्टर खराब होने से वैज्ञानिकों के सामने समस्या भी बनी हुई है।

pilkhi_20बीज उत्पादन बढ़ाने पर जोर
केंद्र द्वारा रबी सीजन में तीन गांव में 10 हेक्टेयर प्रक्षेत्र पर मसूर का प्रदर्शन कराया गया है। दो गांव में पांच हेक्टेयर पर मटर के साथ तीन गांव में पांच हेक्टेयर पर अरहर की कई प्रजातियों का प्रदर्शन कराया गया है। गोद लिए गए आदर्श गांव थलईपुर, परसुपुर दिघेड़ा, रामपुर सोहड़, खुखुंदवा व सरवां में पशुपालन-मत्स्य पालन के साथ दुग्ध उत्पादन के प्रति लोगाें को प्रशिक्षित किया गया है। केंद्र के आन फार्म पांच हेक्टयर क्षेत्रफल में गेहूं की डीबीडब्लू-17 अगेती प्रजाति का आधारीय बीज उत्पादन किया जा रहा है। इस सजीन में 20 हजार फूल व पत्तागोभी, बैंगन, टमाटर व मिर्च के पौधों की बिक्री की गई है। दिसंबर के आखिरी पखवारे में तकनीकी सप्ताह के दौरान प्रशिक्षित कृषकों को इसका वितरण भी किया गया है। इस समय लहसून व मटर के साथ नेपियर ग्रास की माडल नर्सरी केंद्र पर लगाई गई है। केंद्र पर ट्यूबवेल, जीरोटील मशीन, रेज बेड प्लांटर तथा वाहन संचालित स्थिति में हैं।

pilkhi 2eठप इकाई व संसाधन हैं खराब
केंद्र में मृदा परिक्षण इकाई ठप होने से किसानों के साथ वैज्ञानिकों को भी परेशानी हो रही है। मृदा सुधार कार्यक्रम के तहत रबी सीजन में एकत्र नमूना की जांच कृषि विभाग के सहयोग से किया गया है। मृदा परीक्षण के लिए हैवी पावर सप्लाई व जल का नियमित प्रबंधन होना आवश्यक है। केंद्र पर उपलब्ध काम चलाऊ बिजली से मशीनों का संचालन नहीं हो सकता। इस बीच ट्रैक्टर खराब होने से केंद्र के प्रक्षेत्र पर खेती कार्य में बाधा बनी हुई है। इसी प्रक्षेत्र पर गेहूं का बीज उत्पादन किया जा रहा है। बाहरी ट्रैक्टर के भरोसे कैंपस व प्रक्षेत्र पर खेती व माडल बनाने के लिए वैज्ञानिक प्रयासरत हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र, मऊ के प्रभारी डाॅ. डीपी सिंह कहते हैं,‘केंद्र पर वैज्ञानिकों की उपलब्धता के बीच समिति बजट में ही कार्य करना होता है। मृदा इकाई ठप होने की दशा में कृषि विभाग के सहयोग से सभी मिट्टी की जांच कराई गई है। आदर्श गांव में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के साथ मटर, मसूर व अरहर के 20 हेक्टेयर प्रक्षेत्र पर प्रदर्शन किया गया है। जीरोटील तकनीकी से आठ गांवों में 45 प्रक्षेत्र पर बोआई कराई गई है। खेती-किसानी की आधुनिक तकनीकी के प्रचार-प्रसार सहित कैंपस व आन फार्म पर माडल इकाई बनाने की दिशा में वैज्ञानिक लगे हुए हैं।’

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