संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: केंद्र सरकार एक तरफ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को जोर-शोर से जमीन पर उतारने में लगी हुई है वहीं दूसरी तरफ पशुधन बीमा योजना को शुरू करने की तैयारी में है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय इस दिशा में तेजी से प्रयास कर रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि फसल बीमा योजना और पशुधन बीमा योजना लागू हो जाने के बाद गांव-गंवई के अधिकांश किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव आयेगा।
क्या है तैयारी
पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ देने के लिए पुराने बीमा योजना में व्यापक सुधार की तैयारी है। हाल ही में कृषि मंत्रालय में हुई बैठक में यह तय किया गया है कि जिस तरह फसल बीमा में किसानों को बहुत मामूली प्रीमियम का भुगतान करना होता है और इसके प्रीमियम में भी किसानों की हिस्सेदारी सालाना 1-2 प्रतिशत के बीच होगी।
पशुपालन सचिव देवेन् चौधरी के मुताबिक मौजूदा समय में बीमा कवर दायरा काफी कमजोर है जिसका मुख्य कारण प्रीमियम दर का अधिक यानी मवेशी की कीमत का तीन से पांच प्रतिशत होना है और यह लगभग 647 रुपए प्रति मवेशी प्रतिवर्ष आता है। इसलिए हम इसे कम करके 200 रुपए के आसपास लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रीमियम की दर को मौजूदा मवेशी बीमा योजना के तहत एक प्रतिशत पर लाने से न केवल अधिक से अधिक किसान इसके लिए प्रोत्साहित होंगे बल्कि बीमा कंपनियों को भी अच्छा कारोबार मिलेगा।
दुधारू पशु पर होगा जोर
पशुधन के लिए नई बीमा योजना में पशुपालन करने वाले लोगों को सूखा, बाढ़, चक्रवात या महामारी सहित किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से पशुधन हानि होने पर सुरक्षा मिल सकेगी। सरकार अधिक से अधिक किसानों को उनकी दुधारू गाय और भैंसों का बीमा करवाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। सरकार इसके लिए मौजूदा पशुधन बीमा योजना के प्रीमियम को कम करके एक प्रतिशत पर लाने के वास्ते बीमा कंपनियों से बातचीत कर रही है।
केन्द्र और राज्यों द्वारा संबंधित योजनाओं के जरिए सहायता प्रदान करने के बावजूद मौजूदा समय में मवेशी बीमा कवच का दायरा कम यानी 10.7 लाख मवेशियों का है। जबकि किसान यदि पशु खरीदने के लिए ऋण लेते हैं तो बैंक भी बीमा कवच देते हैं।



