पंजवार तो झांकी है..अन्य गांव बाकी हैं

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सिवान: कोरोना का कहर ​धीरे—धीरे बिहार के गांवों में पांव पसारने लगा है। सरकार की तैयारियां नाकाफी साबित हो रही है। लोग दहशत के माहौल में जीने को अभिशप्त हैं। खेती किसानी का समय है। प्रवासियों का गांव आना जाना इस माह में हमेशा से होता रहा है। इस बीच बिहार के एतिहासिक गांव पंजवार की घटना सचमुच डराने वाली है और बिहार सरकार की तैयारियों की पोल खोलती नजर आती है। ग्रामीणों की विवशता इस बात से समझी जा सकती है कि पंजवार जैसा गांव जो कि कई मायनों में बिहार सहित देश के अन्य गांवो को राह दिखाता नजर आता है वह कोरोना के कहर के आगे विवश है। इस लिहाज से देखें तो जिले का पंजवार गांव कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया है। एक ही घर के 14 लोगों के संक्रमित होने से गांव में हडकंप मच गया है। इस गांव के निवासी व उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारी संजय सिंह का यह पोस्ट सोशल मीडिया पोस्ट से स्थिती की भयावहता और सरकार की लापरवाही का पोल खोलता नजर आता है।

संजय सिंह लिखते हैं कि सिवान जिले का पंजवार गांव । मेरा गांव । एक हफ्ते पहले तक सब ठीक था । सरसों की दंवरी हो रही थी ।गेहूं की बालीयाँ पोढ़ होने लगी थीं । हंसिया की धार में रेती लगाकर चोख किया जाने लगा था । अचानक सबकुछ बदल गया । 4 अप्रैल को गांव की सारी सीमाएं सील कर दी गयीं । आस पास की बस्तियां भी । 3 की देर रात इस गांव से पहला कोरोना पॉजिटीव डिक्लेयर हुआ था ।
21 मार्च को गल्फ से आया था वह। हाथ में सील लगी थी। अकेले रहने का निर्देश था । नहीं माना । घूमा फीरा । बर बाजार किया । क्रिकेट भी खेला ।
10 दिन के बाद सिवान जाकर सैम्पल दिया। लक्षण हावी नहीं थे। विजेता की तरह वापस लौटा । जिनसे अब तक नहीं मिल सका था उनसे मिला। जो उससे मिलने में संकोच कर रहे थे वह भी मिले । जिस दिन उसकी रिपोर्ट आयी , वह क्रिकेट खेल रहा था ।
आज गांव में चौदह लोग पॉजीटीव हैं। एक ही परिवार के। अभी और होंगें। कारण- जनसंख्या घनत्व और सामाजिक सहवास ।
एक और आया था गल्फ से। एक दो दिन आगे पीछे। अपने साथ पत्तल गिलास लाया था। उसी में खाता। अपने हाथों से जूठन डिस्पोज करता। दो हफ्ते घर के बाहर सोया । जांच करा चुका है। ठीक है। अभी भी एकांतवास कर रहा है । कह रहा है- दो साल परिवार से अलग रहा कुछ दिन और सही ।
समझ में नहीं आ रहा किसको जिम्मेदार माना जाये । यह सही है कि प्रशासन की अपनी सीमाएं हैं। प्रशासन ने चेताया। एकांत में रहने के लिए कहा। उसके और उसके परिवार की दुहाई दी। वह नहीं माना । 10 दिन के बाद उसका सैम्पल लिया गया । सैम्पल लेने के बाद वहीं पर क्वारन्टीन किया जा सकता था । लेकिन छोड़ दिया गया । क्रिकेट खेलने के लिए। घूमने फिरने के लिये। शादी- विवाह अटेंड करने के लिए ।
3 की रात में पहला पॉजिटीव मिला। उसके घर और संपर्क में आये बाकी लोगों को 8 की रात में क्वारन्टीन किया गया। ये 5 दिन बहुत खतरनाक थे । इन पांच दिनों का खामियाजा हमें भुगतना होगा। भुगत रहे हैं । हो सकता है इनको अलग-थलग करने का कोई मुहूर्त निकाला गया हो । लेकिन यह मुहूर्त बहुत भाड़ी पड़नेवाला है ।
जो नहीं हो सका उसपर सोचना बेकार है। जो होना चाहिए कम से कम वह तो हो । गांव के सारे मुहल्ले ठीक से सैनीटाइज किये जायें। छोटी मशीनों से कुछ नहीं होनेवाला। बड़ी मशीनें आएं। फायर लेंडर मशीनें। एक -एक गली , एक-एक घर सैनीटाइज किया जाये । एक दिन नहीं । रोज । टोलेवार रोस्टर बनाकर ।
50 मीटर के दायरे में रहनेवाले हरेक व्यक्ति का टेस्ट हो । पूरे गांव की स्क्रीनिंग हो ।
आवश्यक वस्तुओं (राशन,शब्जी,दवा, फल)की आपूर्ति के लिये विक्रेता अलॉट किये जायें । उनका नंबर सार्वजनिक हो। ऑन डिमांड घर-घर आपूर्ति सुनिश्चित हो ।
सिवान ज्वालामुखी का एपिसेंटर बन चुका है। आगे और भी हॉटस्पॉट मिल सकते हैं । उत्तरप्रदेश से सीखना चाहिये बिहार को। वहां हर जिले में टेस्ट सेंटर बनाये जा रहे हैं । बिहार में कम से कम एलार्मिंग जिलों में तो बने। स्थायी न सही अस्थायी ही ।
वुहान से पंजवार का रास्ता कोरोना ने सिर्फ 4 महीने में तय किया है। इसकी गति का आकलन किया जा सकता है। अपने घर को अभेद्य दुर्ग मानिये । प्रशासन का सहयोग कीजिये । खुद को रोकिये । अगर हम आप नहीं रुके तो कोरोना नहीं रुकनेवाला।
ये तो रही कोरोना का कहर का प्रत्यक्ष अनुभव करते ग्रामीण संजय सिंह की बात।


क्या है पंजवार की वर्तमान स्थिती

इस मौके पर सिवान के पंजवार गांव के लिए तलत महमूद का वो गाना फिट बैठता है…
करते रहे ख़िजा से हम सौदा बहार का,
बदला दिया तो क्या ये दिया उनके प्यार का
सबकुछ लूटा के होश में आये तो क्या किया
दिन ने अगर चराग जलाये तो क्या किया।।
वर्तमान माहौल में पंजवार के ग्रामीण भी सतर्क हो गये हैं और प्रशासन भी। लेकिन अच्छा यही होता कि वुहान से पंजवार का रास्ता तय करने वाला वह ग्रामीण खुद ही सचेत रहता और गांव वाले के प्यार का बदला इस रूप में नहीं देता। प्रशासन भी सचेत हुआ है और जो काम पहले किया जाना चाहिए था वो अब किया जा रहा है। गांव में एनडीआरफ की टीम पहुंच चुकी है और सैनिटाईजेशन का काम चल रहा है। प्रधान सचिव संजय कुमार कह रहे हैं, आज 152 सैम्पल लिए गए हैं।
और भी गांव आ सकते हैं चपेट में
लेकिन बात सिर्फ पंजवार तक सीमित नहीं है। पंजवार के आसपास के ग्रामीण भी डरे हुए हैं। उसी में से एक ग्रामीण आरजे राणा अपने सोशल मीडिया प्रोफाईल पर लिखते हैं।


माननीय जिलाधिकारी महोदय
मैं रघुनाथपुर प्रखंड का निवासी हूँ। मेरे प्रखंड के पंजवार गाँव मे मिले कोरोना पॉजिटिव ने डर का माहौल बना दिया हैं। अब किसी भी चीज को छूने मे, दुकान से जरूरत के सामान को खरीदने मे भी डर लग रहा हैं। यहाँ तक की अपने ही घर वाले के हाथ का लाया हुआ सामान चुने मे डर लग रहा हैं। अभी गेहूँ दंवरी का समय हैं। लोग कमपाईन से गेहूँ कटवा रहे हैं। वहाँ मजबूरन काम करना पड़ रहा हैं डर के माहौल मे। आपसे निवेदन हैं की आप रघुनाथपुर प्रखंड के सभी गाँवो को सेनेटाइन करवावे। अगर आपके पास लोगो की कमी होगी तो हम लोग सहयोग करने को तैयार हैं। आपसे निवेदन हैं की आप जितना जल्द हो सके हमारें गाँवो को सेनेटाइज करावें।
निवेदक
रघुनाथपुर प्रखंड का एक आम नागरिक।
सरकार के लुंज—पुंज रवैये उपजे हैं ऐसे हालात
ऐसा भी नहीं है कि सरकार को इस महामारी के भयावहता का अंदेशा नहीं है। बिहार सरकार ने जब कोरोना-संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया था, तभी (17 मार्च) इसे महामारी घोषित कर दिया गया और डेढ़ सौ साल पुराने कानून महामारी अधिनियम-1897 को लागू करके प्रशासन को असीमित अधिकार दे दिए गए। लेकिन कोरोना जांच के लिए पूरा राज्य पटना स्थित केंद्रीय शोध संस्थान (आरएमआरआई) पर निर्भर रहा। उस दिन तक इस केन्द्र में 35 नमूनों की जांच हुई थी, सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। आईएमआरआई ने बिहार में छह जांच केन्द्र बनाने की अनुमति बहुत पहले दे दी थी। पर आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी के अभाव में एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर और जेएलएनएमसीएच, भागलपुर में जांच शुरू नहीं हो सकी है। अभी बिहार के किसी निजी अस्पताल में भी यह जांच नहीं हो रही है। हालांकि पटना के पारस अस्पताल और सेन डायग्नोस्टिक में जांच शुरु करने की बात चल रही है।
सिवान में अलग जांच केंद्र खोले जाने की है जरूरत
वर्तमान हालत में सिवान में अलग से जांच केन्द्र खोलना संभव नहीं दिखता। वहां के सैंपल को आईजीआईएमएस लाया जाना ही संभव लगता है। लेकिन मोबाइल जांच केन्द्र खोलने की गुंजाइश खोजने की जरूरत जरूर दिख रही है। जिला प्रशासन के अनुसार सिवान में 208 लोग हाल में विदेश यात्रा से वापस आए हैं। इनमें से 160 को होम आइसोलेशन में रखा गया है। बाकी पंचायत आइसोलेशन में हैं। लेकिन क्या इन सबों पर निगरानी रखने की कोई व्यवस्था की गई है तो उत्तर नकारात्मक है। सरकारी सूत्रों की मानें तो राज्य में 3356 लोग विदेश से आए हैं। इनमें केवल 2254 लोगों को ही खोजा और चिन्हित किया जा सका है। बाकी के बारे में सरकार के पास कोई सूचना नहीं है। विभिन्न सरकारी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों में केवल 33 लोग ही हैं।
अलग-अलग बने क्वारंटाइन सेंटरों में 998 लोग रह रहे हैं। पंचायतों के क्वारंटाइन सेंटरों में 31,996 लोगों के होने का दावा किया जा रहा है। पर दूसरे राज्यों से करीब दो लाख लोगों के आने की जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री की ओर से दी गई थी। तो प्रश्न है कि बाकी लोग कहां हैं, कैसे हैं, उनकी निगरानी कैसे की जा रही है। उल्लेखनीय है कि अब तक 5040 लोगों के सैंपल लिए गए हैं जिनमें 51 की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। अभी कोरोना के केवल 33 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। बाकी स्वस्थ्य होकर घर लौट गए हैं।

 

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