अमरनाथ, वरिष्ट पत्रकार
पंचायती राज संस्थाओं के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ लेने की प्रक्रिया के साथ ही पंचायत समिति प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव की जोड़तोड़ शुरू हो गई है। एकल पदों के आरक्षण के दायरे में होने से इन पदों के प्रत्याशियों की संख्या जरूर सीमित हुई है, लेकिन जोडतोड अधिक धारदार हो गई है। पटना जिला परिषद अध्यक्ष का पद अतिपिछडी जाति की महिला के लिए आरक्षित है। इस वर्ग की केवल पांच महिलाएं चुनकर आई हैं। जाहिर है कि जिला परिषद अध्यक्ष बनने की दावे दारी इन्हीं पांच में हो सकती है। अध्यक्ष का चुनाव 30 जून को होना है।
अतिपिछड़ी जाति की अंकिता कुमारी ने संतोष यादव के साथ अंतर्जातीय विवाह किया है। लेकिन जिला परिषद सदस्य का चुनाव अतिपिछडा वर्ग के लिए आरक्षित खुशरूपुर सीट से जीती हैं। अध्यक्ष पद के अन्य दावेदारों के बीच उनका पलडा भारी दिखता है क्योंकि उन्हें पति संतोष की जाति के सदस्यों का समर्थन सहज ही मिलने की उम्मीद है। हालांकि उनके विरोधियों का कहना है कि हिन्दु पद्धति के अनुसार तो उनकी जाति विवाह के साथ ही बदल गई। इसप्रकार अतिपिछडी वर्ग के लिए आरक्षित सीट से उनका निर्वाचन ही सही नहीं है।
पटना जिला परिषद में अतिपिछडा वर्ग की महिलाओं के लिए चार सीटें आरक्षित हैं। लेकिन अति पिछडा पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित एक सीट से महिला के जीत जाने से अति पिछडी जाति की महिला पार्षदों की संख्या पांच हो गई है। बाढ पष्चिम सीट से जीती सिंहन्ता देवी अध्यक्ष पद की दौड में आगे चल रही हैं। यह अरविंद महतो उर्फ भगत की भाभी हैं और उसके सहयोग से अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने की जुगत में लगी हैं। बख्तियारपुर पशिचम से सुनीता कुमारी विजयी हुई हैं। उनके पति मंगल पाल अपनी पत्नी को जिला परिषद अध्यक्ष बनावाने के लिए अन्य सदस्यों के बीच लगातार संपर्क में हैं। सुनीता कुमारी को जिला परिषद अध्यक्ष बनाने में पूर्व विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव भी सक्रिय बताए जाते हैं। संपतचक से अंजू देवी विजयी हुई हैं। इनके पति कुमार रजनीश राजद के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। रजनीश के पिता महेश चंद्रवंशी अपनी पुतोहू को जिला परिषद अध्यक्ष बनावाने के अभियान में जुटे हैं। अंजू की सास पुष्पा देवी भी दो बार मुखिया रह चुकी हैं। इसप्रकार यह परिवार पंचायती राज संस्थानों की राजनीति से पूरी तरह वाकिफ है। पटना सदर पूर्वी से जीती अनीता देवी भी जिला परिषद अध्यक्ष की रेस से बाहर नहीं हैं।
बिहार में 38 जिला परिषद हैं। इनमें 14 के अध्यक्ष का पद विभिन्न जातीय वर्गो ( अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछडा वर्ग) के लिए आरक्षित है। इन आरक्षित पदों समेत सभी जिला परिषदों में 18 के अध्यक्ष के पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण के इन प्रावधानों की वजह से अध्यक्ष के चुनाव की जोडतोड बेहद रोचक होती है जो तकरीबन सभी जिलों में चल रहा है।

