आलोक रंजन
लखनऊ: लोकतंत्र की सबसे निचली यानी ग्राम पंचायत चुनाव की सरगर्मियां सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने आगामी पंचायत चुनाव के मद्देनजर तैयारियां शुरू कर दी हैं। आयोग की तरफ से कहा गया है कि साल 2020 में जनवरी- फरवरी के महीने में चुनाव संपन्न कराएं जाएंगे। इसके तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी वर्ष 2020 का कार्यक्रम घोषित आधिरकारिक आदेश जारी कर दिया है। प्राथमिक तैयारी पूरी करने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग के तरफ से विस्तृत कार्यक्रम दिसंबर के महीने में जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले स्थानीय निकाय चुनाव भी कराये जाने है। मतदाता सूची का नवीनीकरण का काम भी पूरा किया जाना है।

इस बाबत चुनाव आयोग द्वारा कुछ दिशानिर्देश जारी किये गये हैं जिनका अनुपालन अनिवार्य है। इसके तहत गृह क्षेत्र में पदस्थापित अधिकारियों के तबादले किये जायेंगे। आदेशों के अनुसार जो भी अधिकारी अपने क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय से वहां पर हैं, वह 15 नवंबर 2019 के पहले किसी और स्थान पर तबादले के फलस्वरुप भेज दिया जाएगा।
इतना ही नहीं मतदाता सूचियों की तैयारी से जुड़े अधिकारियों, एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार आदि का तबादला पंचायत चुनाव में साल 2020 की मतदाता सूची पूर्ण होने से पहले तबादला नहीं किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में ग्रामपंचायत चुनाव में राजनीतिक दल बढ़ चढ़कर साझेदारी करते हैं। इस लिहाज से ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों पहले से ही मैदान में आ चुके हैं। अपने स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर अपनी दावदारी पेश करना शुरू कर दिया है। साथ ही राजनीतिक दल भी इन चुनावों की तैयारी के लिए गणित बिठाना शुरू कर दिया है। स्वाभाविक है निर्वाचन आयोग की आगामी पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद अब उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हलचल बढ़ने वाली है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव नवंबर—दिसंबर के महीने में हुआ था।
