
तिरुवनंतपुरम: केरल में पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न हुआ। यहां स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों में माकपा समर्थित एलडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस दौरान 941 ग्राम पंचायत में से 500 से ज्यादा पर जीत हासिल की है वहीं कॉरपोरेशन की 10 में से छह सीटें, जिला पंचायत की 14 में से 10 और 152 ब्लॉक पंचायत में 112 सीटों पर आगे है। उल्लेखनीय है कि यहां 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 86 नगर पालिका और छह नगर निगम के लिए चुनाव हुए हैं।

केरल निकाय चुनाव के नतीजे
पार्टी ग्राम पंचायत ब्लॉक पंचायत जिला पंचायत नगर पालिका नगर निगम
कुल 941 152 14 86 6
एलडीएफ 510 106 10 35 3
यूडीएफ 378 46 4 45 3
अन्य 28 0 0 4 0
एनडीए 24 0 0 2 0
कैसे थे पिछली बार के नतीजे
2015 के निकाय चुनाव में 941 ग्राम पंचायतों में से एलडीएफ ने 551 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि यूडीएफ ने 362 पंचायत पर कब्जा जमाया था। एनडीए ने 17 पर जीत हासिल की थी। 152 ब्लॉक पंचायतों में से एलडीएफ ने 88, यूडीएफ ने 62, एक एनडीए और एक अन्य के खाते में गई थी। 14 जिला पंचायतों में से एलडीएफ और यूडीएफ ने 7-7 पर जीत दर्ज की थी, जबकि एनडीए का खाता नहीं खुला था।

क्या कहते हैं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन
”एलडीएफ को स्थानीय निकाय चुनावों में व्यापक जीत मिली. यह राज्य के लोगों की जीत है। यह चुनाव परिणाम उन लोगों को जवाब दे रहे हैं, जो केरल को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करनेवालों के प्रयासों को पराजित किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि परिणामों से पता चलता है कि यूडीएफ और उसकी अवसरवादी राजनीति के लिए केरल में कोई जगह नहीं है। कांग्रेस भाजपा के साथ झूठे अभियान चला रही थी और एलडीएफ को बदनाम कर रही थी। यह सफल नहीं हुआ।
पिनराई विजयन ने ट्वीट किया,
थैंक्यू केरल. एलडीएफ में भरोसा जताने के लिए शुक्रिया। हम केरल के लोगों के भरोसे और आत्मविश्वास को विनम्रता से स्वीकार करते हैं। यह धर्मनिरपेक्षता और समावेशी विकास की जीत है। सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को मेरी हार्दिक बधाई।

क्या है संकेत
यदि चुनाव नतीजों को विस्तार से देखें तो केरल में सत्तारूढ़ एलडीएफ को गांव, ब्लॉक, जिला पंचायतों, नगरपालिका और निगम परिषदों में स्पष्ट बढ़त है। विपक्ष ने सीएमओ और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। लेकिन विजयन ने अलग रास्ता अख्तियार किया। उनका ध्यान सरकार की उपलब्धियों, विशेष रूप से कल्याणकारी योजनाओं पर रहा। खासकर कल्याणकारी योजनाओं पर जो उनके शासन के तहत शुरू की गईं। इसमें गरीबों के लिए घर जैसी योजनाएं शामिल हैं। नतीजों से पता चलता है कि सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का असर जनता पर उतना नहीं पड़ा। ये भी कहा जा रहा है कि जिस तरह के सरकार ने कोविड को मैनेज किया है उसका भी असर नतीजों में देखने को मिल रहा है।

कैसा रहा भाजपा का प्रदर्शन
केरल में चुनावी बिसात पर एलडीएफ और यूडीएफ की प्रतिष्ठा ही दाव पर लगी हुई थी। हालांकि 2014 के बाद से हर एक चुनाव में भाजपा का ग्राफ केरल में बढ़ा है। इसीलिए केरल में अपनी पैठ जमाने के लिए पार्टी ने 612 अल्पसंख्यक समुदाय के प्रत्याशियों पर दांव लगाया था। जिनमें 500 ईसाई समुदाय से और 112 मुस्लिम थे। भाजपा जानती है कि केरल में अगर उसे सत्ता तक पहुंचना है तो हिंदू मतदाताओं के साथ ईसाई समुदाय को भी साधकर रखना होगा। यही वजह है कि पार्टी ने केरल में बड़ी तादाद में इस बार अल्पसंख्यकों को टिकट दिया
2015 में ऐसा था भाजपा का प्रदर्शन
केरल में 2015 के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने चौंकाने वाले नतीजे पेश किए थे। यूडीएफ के गढ़ तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 100 सीटों में से बीजेपी ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की थी। एलडीएफ को 42 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को सिर्फ 20 सीटें ही मिल सकी थीं। वहीं 941 ग्राम पंचायतों में से एलडीएफ को 551 सीटों पर जीत मिली थी। यूडीएफ ने 362 पंचायत पर कब्जा जमाया था। वहीं एनडीए ने 17 पंचायत पर कब्जा जमाया था। 152 ब्लॉक पंचायतों में से एनडीए को 1 सीट ही मिली थी। यहां एलडीएफ ने 88, यूडीएफ ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी।