अमरनाथ झा, वरिष्ट पत्रकार
बिहार मे पंचायती राज संस्थानों के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण के ३०जून तक संपन्न हो जाने के बाद तीन स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का गठन हो चुका है.पर समस्या है कि गांव की सरकार बैठेगी कहां? ग्राम पंचायतों की संचिकाएं कहां रखी जाएगी? ग्राम कचहरी कहां लगेगी? कार्यालय भवन और सभाकक्ष का अभाव पंचायत समितियों और जिला परिषदों मे भी है, पर जिला व प्रखड मुख्यालयों मे भाडा के घर मिल जाने से आवश्यकता कामचलाऊ ढंग से पूरी हो जाती है,पर गांव में मुखिया का घर और पंचायत सचिव के झोले का सहारा ही रह जाता है.
बिहार केहर पंचायत मे पंचायत भवन बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दस वर्ष पहले पहली बार मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद की थी. पर अभी दस प्रतिशत पंचायतो के पास भी अपना पंचायत भवन नहीं है. राज्य सरकार ने सुशासन कार्यक्रम केअंतर्गत वर्ष २०१०-१५ मेंकरीब एक करोड़ की लागत से पंचायत भवनों के निर्माण का लक्ष्य तय किया था. वर्ष २०१२-१३ में पंचायत भवनों के निर्माण की कवायद शुरू हुई. पहले चरण में १४३५ भवनों का निर्माण होना था.जिनमें अब तक केवल ४१८ पंचायत का निर्माण ही हो सका है.
इन भवनों को पंचायत स्तर पर सरकार के कार्यक्रमों के योजनाकरण,कार्यान्वयन, अनुश्रवण व मूल्यांकन का केन्द्र बनाया जाना है.इनके माध्यम से नागरिकों को मिलनेवाली सुविधाओं को सुगमतापूर्वक देना है.इस भवन में मुखिया,उप मुखिया,पंचायत सचिव,पंचायत लेखापाल,राजस्व कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता समेत सभी समकक्ष ग्रामीण स्तर के कर्मचारियों के अलावा सरपंच, उपसरपंच,पंच,ग्राम कचहरी से संबंधित कर्मचारी जैसे सचिव आदि बैठेंगे.
इस भवन में एक कंप्यूटर कक्ष भी बनाया जाना है जिसे ग्राम सूचना केन्द्र के तौर पर विकसित किया जाएगा. भवन में विभिन्न बैठकों के लिए सभा कक्ष,महिलाओं के बैठने के लिए अलग कक्ष,आमलोगों की सुविधा के लिए स्वागत कक्ष,महत्वपूर्ण कर्मचारियों केलिए आवासीय सुविधाएं,इत्यादि संलग्न होंगे.
कार्यालय भवन नहीं रहने से पंचायतों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों का स्थान मुखियाजी या पंचायत सचिव की झोली में होता है. पंचायत स्तर पर कई दस्तावेजों को अनिवार्य रूप से रखना होता है. उन दस्तावेजों में प्राप्ति पंजी, निर्गत पत्रों की पंजी, अनुक्रम पंजी, लंबित पत्रों की पंजी, उपस्थिति पंजी, निरीक्षण पंजी, ग्राम सभा की पंजी, पंचायत कार्यकारिणी पंजी, जन शिकायत पंजी, सूचना अधिकार संबंधित पंजी,आवंटन पंजी,अंकेक्षण पंजी,भंडारण पंजी, परिसंपत्ति पंजी, मनरेगा अंतर्गत संधारित पंजी,सामाजिक सुरक्षा पंजी, इदिरा आवास लाभार्थी पंजी वृध्दावस्था पेंशन पंजी इत्यादि.इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर हर तीन माह पर ग्राम सभा की बैठक की जानी है. हर दो माह में कम से कम एक बार पंचायत कार्यकारिणी की बैठक की जानी है. पंचायत भवन नहीं होने से इन बैठको का स्थान निर्धारित नहीं होता. बैठकों की उपस्थिति पंजी मुखिया के झोले में रहता है. इस तरह मुखिया के विरोधी पक्ष केऔर आम लोगों को ग्राम पंचायतों के कामकाज से पूरी तरह अलग थलग हो जाना पड़ता है.

