कई महत्वपूर्ण कृषि योजनाओं के लिए बिहार सरकार नहीं दे रही जमीन: राधामोहन सिंह

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   बिहार के हाजीपुर में आयोजित किया गया दो दिवसीय अंतर्राज्यीय बागवानी मेला

                                संतोष कुमार सिंह

हाजीपुर: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह अपने गृह प्रदेश बिहार के दो दिवसीय दौरे पर है। केंद्रीय मंत्री ने आज हाजीपुर में दो दिवसीय अंतर्राज्यीय बागवानी मेला (संगम 2016) का उदघाटन ​करते हुए पूर्वोतर राज्यों में दूसरी हरित क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही कृषि में बागवानी के बढ़ते महत्व पर भी किसानों से रूबरू हुए।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह मेला राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के द्वारा लगाया जा रहा है जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों के अलावा केन्द्र एवं राज्य सरकार के बागवानी से जुड़े हुए अन्य संस्थान भाग ले रहे हैं। लगभग 12 राज्यों से आये किसान और बागवानी क्षेत्र से जुड़े उद्यमी अपने-अपने बागवानी उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे जोकि एक सराहनीय कदम है। इसमें बागवानी से जुड़े तकनीको की प्रदर्शनी भी लगायी गयी है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा बागवानी पर केंद्रित मेला एवं किसान गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा।

WhatsApp-Image-20160709 (3)उन्होंने  कहा की कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है और बागवानी उसका एक महत्वपूर्ण घटक है। भारत मे विविध कृषि -मौसमीय परिस्थितियां मौजूद है जो बागवानी फसलों की उत्पादन तथा उत्पादकता तेजी से बदलाव हो रहा है। देश में बागवानी पर ध्यान केंद्रित किए जाने और उच्च वरीयता दिए जाने से उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है और विकास के नये रास्ते खुले हैं।

वर्तमान परिस्थितियों में पूर्वी क्षेत्र चावल, सब्जी एवं मीठे जल की मछलियों के उत्पादन में अग्रणी है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चावल, सब्जी एवं मछली उत्पादन में क्रमशः 50 प्रतिशत, 45 प्रतिशत एवं 38 प्रतिशत की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। यदि इस क्षेत्र के समुचित विकास पर ध्यान दिया जाये तो यह क्षेत्र अनाज के साथ ही दलहन, तिलहन, फल-सब्जियों, दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है।

किसान कल्याण के लिए केंद्र सरकार संकल्पित

केंद्र सरकार देश के किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। ‘कृषि बीमा योजना‘, ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना‘, ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना‘, ‘जैविक खेती‘, ‘‘ई-नाम‘, ‘मोबाइल एप्स किसान सुविधा‘, ‘पूसा कृषि ‘‘ एवं देश के किसानों के हितों के लिए अलग से दूरदर्शन पर ‘डीडी किसान चैनल‘ की शुरूआत जैसी अनेक योजनाओं एवं अभियान के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से समर्थ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बागवानी फसलों की खेती से किसानों को अधिक मुनाफ़ा मिलता है और स्वरोजगार के अवसर विकसित होते हैं। मौसम के बदलते परिवेश में बागवानी फसलों की अहम भूमिका है। बागवानी के क्षेत्र में विकसित देश की उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने की आवष्यकता है।

​कृषि में रोजगार की संभावना ज्यादा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह कृषि आज भी अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा रोजगार व ग्रामीण विकास के लिए अधिक प्रभावी है। जलवायु परिवर्तन कृषि हेतु चुनौतीपूर्ण है। मानसून में अस्थिरता, अल्प एवं असामयिक अतिवृष्टि, ग्लोबल वार्मिंग, समुद्री तूफान की सघनता से आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग से खाद्यान्न सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। प्रति 10 से. तापमान की वृद्धि से गेहूँ का उत्पादन 5-6 मिलियन टन कम होने की संभावना आँकी जा रही है। कीट एवं जीवाणु की जीवन प्रक्रिया तापमान के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं। बढ़ते तापमान से कई कीट अधिक सक्रिय हो सकते हैं जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होगा। ऐसे परिवेश में जलवायु स्मार्ट तकनीकों जैसे कम अवधि वाली प्रजातियों, संसाधन संरक्षण तकनीकी (शून्य कृषित गेहूँ, धान की सीधी बिजाई, उथली क्यारियों पर पौधा रोपण, पालीहाउस व नेटहाऊस में संरक्षित खेती, लेजर समतलक, हरी एवं भूरी खाद, जैविक खाद, प्रक्षेत्र पर जल संग्रहण) को अधिक बढ़ावा देने की आवष्यकता है। बदलते मौसम से उत्पन्न समस्याओं के समाधान हेतु बहुआयामी पहल की भी आवष्यकता होगी तथा इसके प्रभावी कार्यान्वयन हेतु विभिन्न इकाइयों व संस्थाओं का अभिसरण आवष्यक होगा।

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मृदा स्वास्थय कार्ड का होगा फायदा

मृदा स्वास्थ्य कार्ड हर किसान को उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे जमीन की जरुरत के अनुरूप किसान उर्वरक का उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य का संतुलित प्रबंधन कर सकेंगे। जैविक खेती के सिद्धांतों तथा विधाओं को बढ़ावा देकर टिकाऊ खेती की शैली सुदृढ़ की जा सकती है।

ग्रामीण बीज बैंक, सामुदायिक चारा बैंक, कस्टम हायर केन्द्र, कृषक समिति, फसल बीमा योजना आदि पहल से कृषकों को बदलते मौसम के प्रति अनुकूलन हेतु बल प्राप्त होगा। भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ’टिकाऊ खेती पर राष्ट्रीय मिशन’ बदलते मौसम में खाद्यान्न सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा एवं सामाजिक व आर्थिक स्थिरता के लिए कटिबद्ध है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

उन्होंने कहा की खेती के लिए पानी की जरुरत होती है। उचित जल प्रबंधन के बिना खेती कठिन होगी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हर खेत को पानी सुनिष्चित किये जाने की दिशा में काम हो रहा है। जल संसाधन की उचित देख-रेख, भूतल रिचार्ज, कमान्ड क्षेत्र का विकास, साझेदारी पद्धति द्वारा वाटरशेड का विकास एवं जल वितरण तथा उपयोग, सौर्य-ऊर्जा चालित सिंचाई के यंत्र व विधाओं का उपयोग, समतलीकरण, जल-निकास व्यवस्था, उचित फसल प्रणाली द्वारा प्रक्षेत्र विकास तथा सूक्ष्म-सिंचाई व पाईप व्यवस्था द्वारा जल का संवहन आदि पहलुओं पर ध्यान देना होगा।              कृषकों के समग्र विकास के लिए उचित निवेष, तकनीकी, नीति व संस्था की व्यवस्था उपलब्ध है, परन्तु इन व्यवस्थाओं का कृषकों तक पहुंच व इनके उचित उपयोग पर बल देना होगा। कृषकों को उन्नत तकनीकों, सरकार की योजनाओं, कृषि हेतु उपयोगी संस्थाओं के बारे में जानकारी बढ़ावा देने हेतु इस प्रकार के कार्यक्रम अधिक प्रभावी होंगे।

कृषि विकास के लिए केन्द्र सरकार के द्वारा की गई महत्वपूर्ण कदम

– कृषि विज्ञान केन्द्रों की आन लाईन समीक्षा कर उच्च स्तर पर निगरानी प्रबंधन एवं किसानों को सूचना एवं सलाह उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान पोर्टल शुरू किया गया। मौसम एवं बाजार की सूचनाए भी इस पोर्टल के द्वारा किसान प्राप्त कर सकते हैं।

– पूर्वी चम्पारण में राष्ट्रीय समेकित अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गई है। तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्रालय, बिहार द्वारा अनुमोदन उपरांत केन्द्र सरकार द्वारा इस केन्द्र का शिलान्यास किया गया, परंतु राज्य सरकार से जमीन का सीमांकन अभी तक अकारण लंबित है।

– राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय को केन्द्रीय दर्जा प्रदान किया गया और इसका नामकरण डा. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय रखा गया । इसके अंतर्गत मगध तथा सारण में कृषि महाविद्यालय, मोतिहारी में उद्यान एवं वानिकी महाविद्यायलय और मधुबनी में पशु चिकित्सा एवं मात्स्यिकी महाविद्यालय को स्वीकृति दी गई।

– भारत सरकार ने गोरौल में केला अनुसंधान केन्द्र खोलने का निर्णय लिया है, जो इस वर्ष ही शुरू हो जाएगा। प्रथम चरण में इस अनुसंधान केन्द्र के द्वारा टिशु कल्चर केले के पौध का उत्पादन तथा केला उत्पादक किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से केले के उत्पादन के उपरान्त उसमें होने वाले नुकसान के प्रबंधन का कार्य शुरू किया जाएगा।

– भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी द्वारा अपना एक बीज उत्पादन केन्द्र खोलने के लिए जमीन की मांग राज्य सरकार से की गई है। इससे बिहार के सब्जी उत्पादक किसानों को काफी लाभ मिलेगा, परंतु अब तक राज्य सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध नही कराई गई है।

– आई.सी.ए.आर. के अंतर्गत राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर द्वारा पौधा प्रसारण-सह-प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना हुई है। पूर्वी चम्पारण जिले के महेसी प्रखण्ड के महामदा बीज गुणन प्रक्षेत्र में जमीन की मांग भारत सरकार ने की है। इसके लिए 7 करोड़ 56 लाख रूपये की योजना अनुशसित एवं स्वीकृत है तथा एक करोड़ की राशि भी आवंटित कर दी गई है। परंतु राज्य सरकार द्वारा अभी तक जमीन का आवंटन नही किया गया है।

– पटना में केवीके का नया जोनल कार्यालय कृषि तकनीक अनुप्रयोग संस्थान (अटारी) स्थापित किया गया।

– कौशल विकास हेतु मोतिपुर में गुड़ प्रसंस्करण इकाई प्रारम्भ की गई है तथा मोतिहारी, बेतिया एवं गोपालगंज में तीन नई गुड़ प्रसंस्करण इकाई की मंजूरी दी गई है।

– एनडीआरआई द्वारा मोतिहारी में मानक डेयरी प्लांट के स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

– मखाना की नई किस्म स्वर्ण वैदेही प्रथम बार विकसित की गई।

– कृषि प्रौद्यौगिकियों के 12 हजार से अधिक आॅन फार्म परीक्षण तथा अग्रिम पंक्ति प्रदर्षन आयोजित किए गए।

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इन कार्यों के लिए बिहार सरकार ने नहीं दिया जमीन

  •  राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) द्वारा प्रजनक एवं आधार बीज उत्पादन केन्द्र स्थापित करने के लिए राज्य सरकार से जमीन की मांग की गई थी जिससे इन राज्यों में उच्च पैदावार की बीज मुहैया कराई जा सके। झारखण्ड एवं पष्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जमीन पर यह केन्द्र प्रारम्भ कराया जा चुका है, परंतु बिहार सरकार द्वारा अभी तक जमीन उपलब्ध नही कराई गई है।
  • भारत सरकार ने बिहार, गुजरात, माहराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश में एक-एक फार्म मषीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान खोलने की मंजूरी दी है। इस कार्य हेतु गुजरात, महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश ने जमीन चिन्हित कर प्रतिवेदित किया है जिस पर कार्य हो रहा है। परंतु बिहार सरकार द्वारा अभी तक भूमि उपलब्ध नही कराई गई है।

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