मोतीहारी में स्थापित हुआ कृषि एवं डेयरी विकास केंद्र

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संतोष कुमार सिंह

पिपराकोठी मोतीहारी: बिहार के मोतीहारी स्थित पिपराकोठी में कृषि एवं डेयरी विकास केन्द्र की स्थापना कर केंद्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को डेयरी विकास के लिए नयी सौगात दी है। मोतीहारी के इस नये कृषि एवं डेयरी विकास केन्द्र के संचालन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल को सौंपी गयी है।

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कृषि एवं डेयरी विकास केन्द्र के उद्घाटन के मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि ये केन्द्र पशुओं की नस्ल सुधार, प्रजनन, पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और दूध से बनने वाले विभिन्न उत्पादों से संबंधित नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने के साथ – साथ बेरोजगार नौजवानों को प्रशिक्षण भी देगा। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में उच्च दुग्ध उत्पादन करनेवाली बेहतरीन गांयें जैसे साहिवाल, थारपारकर और गीर मौजूद हैं। भैंसों में मुर्रा नस्ल के पशु मौजूद हैं जिनका संतति परीक्षित वीर्य इस केन्द्र के माध्यम से लोगों को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि इस इलाके के किसान और अन्य लोग इस केन्द्र का पूरा – पूरा फायदा उठाएंगे।

कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि भारत दूध के उत्पादन के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है लेकिन अभी भी हमारे पशुओं की उत्पादकता कम है।इसकी प्रमुख वजह है अच्छे नस्ल के पशुओं की कमी, चारे की कमी, कुपोषण, दोषपूर्ण प्रबंधन एवं अनियमित प्रजनन आदि। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के निवारण के लिए इस केन्द्र के वैज्ञानिक लगातार इस क्षेत्र के लोगों को सलाह देते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि दूसरी हरित क्रांति के लिए एकीकृत खेती को बढ़ावा देना जरूरी क्योंकि इससे किसान की आय के दूसरे रास्ते खुलते हैं। उन्होंने कहा कि दूध का व्यवसाय है एक अकेला व्यवसाय है जिसमें किसान को लगातार आमदनी होती रहती है। मोतीहारी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ट वैज्ञानिकों के साथ क्षेत्र के किसान और गौ पालक मौजूद रहे।

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क्या कहते हैं आंकड़े

भारत 1998 के बाद से ही दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के कुल दूध उत्पादन में भारत का योगदान 17 प्रतिशत है। 2006-07 में 1,15,970 करोड़ रुपए मूल्य के दूग्ध उत्पादन के मुकाबले 2011-12 में देश में दूध का उत्पादन बढ़कर 3,05,484 करोड़ रुपए का हो गया। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान दुग्ध उत्पादन में 163 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। बीते दशक में दुनिया में दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष होने वाली 2.2% की औसत वृद्धि के मुकाबले भारत में 4.2% की औसत वृद्धि दर्ज की गई, जो कि स्वस्थ प्रवृत्ति का संकेत है। मार्च 2013 तक करीब 15.1 मिलियन किसानों को ग्राम स्तर की 1,55,634 लाख सहकारी डेयरी समितियों के अंतर्गत लाया जा चुका है।

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