पंचायत खबर टोली
मऊ : केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी की मार से तो जीवन का हर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। चाहे बात नौकरी पेशा की हो, छोटे कारबारियों की हो या फिर छात्रों की। लेकिन इस नोट बंदी ने किसान को दोहरे सांसत में डाल दिया है और वह बेबश महसूस कर रहा है। उपर से रोज नयी—नयी घोषणाएं। जमीनि हकिकत से इत्तर दावे किसानों की बेहतरी के। लेकिन जमीन पर इनकी क्या स्थिति है इसको इस रूप में समझा जा सकता है। जी हां, नोटबंदी के बाद आर्थिक संकट के बीच अपनी उपज को लिए किसान रबी की बोआई के संकट बीच घिरा हुआ है। जिले में धान की खरीद प्रशासनिक पर निष्क्रियता और चुप्पी से आहत किसान औने-पौने दाम में अपना धान बेचकर गेहूं की बोआई में जुटा हुआ है। समितियों की निष्क्रियता इस दिशा में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं होने से किसान भाई बीज, खाद, मजदूरी के लिए मारा-मारा फिर रहा है। ऐसे में सामने दिख रही उपज को भाव-बेभाव बेचने काे विवश है। इस दौरान कोहरा की चादर से सरकार के साथ प्रकृति ने भी साथ छोड़ दिया है। बाहर रखी गई उपज को बेचकर इस आर्थिक परेशानी के काल में अपना काम चला रहा है। जनपद भर के 51 खरीद केंद्रों का हाल यह कि इस वर्ष शासन द्वारा निर्धारित 78 हजार मिट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 387 कुंतल धान की खरीद ही माह भर में हो पाई है। मात्र पांच राइस मिल अनुबंधित किए जाने से धान की उठान की समस्या भी प्रशासन के सामने खड़ी है।
धान खरीद केंद्रों का हाल-बेहाल
जिले की सभी कृषि समितियों को मिलाकर सभी ब्लाकों में कुल 51 धान खरीद केंद्रों की स्थापना की गई है। प्रशासन के अनुसार सभी खरीद केंद्र खुले हैं। एक नवंबर से खरीद होने की दशा में अब तक मात्र 387 कुंतल खरीद होना प्रशासनिक तत्परता काे बताने के लिए पर्याप्त है। प्राकृतिक कोप के कारण गत वर्ष 22 हजार मिट्रिक टन का लक्ष्य इस वर्ष अच्छी उपज देखते हुए 78 हजार कर दिया गया है। 14.70 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से भुगतान भी किया जा रहा है। इस दौरान सभी केंद्रों पर मिले धान को उठाने के लिए जिले भर की 32 राइस मिल को अनुबंधित किया गया था। मानक के अनुरुप कार्य न किए जाने से इनमें पांच को छोड़कर सबको डिबार घोषित कर दिया गया है। ऐसे में खरीद केंद्रों पर मिलने वाले धान की उठान काे लेकर भी जिला प्रशासन के पास कोई ठोस कार्ययोजना दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में रबी बुआई के पीक सीजन में बुआई के संकट बीच अपनी उपज को लेकर किसान मारा-मार फिर रहा है। सक्रिय बिचौलिए आैने-पौने दाम पर किसानों की विवशता का लाभ उठा रहे हैं।
परेशान किसान लापरवाह प्रशासन
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, वरिष्ठ भाजपा नेता राकेश सिंह, रोदल प्रदेश महासचिव देवप्रकाश राय, प्रगतिशील कृषक नंदकिशाेर सिंह, राजेश सिंह किंकर, पूर्व प्रधान हरेंद्र सिंह, पूर्व सैनिक रुप नरायन सिंह, वीरेंद्र शर्मा आदि बताते हैं कि दो वर्ष बाद धान की उपज अच्छी हुई है। इसके खरीद के लिए जिला प्रशासन के लापरवाह रवैये किसान अपनी उपज को लेकर परेशान है। मौसम प्रतिकूल होने ही कोहरा के प्रभाव में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इससे दरवाजे पर रखे धान को सड़ने की संभावना बलवती हो उठी है। नोटबंदी की समस्या से जूझ रहे किसान के सामने रबी की बुआई के संकट बीच धान की ब्रिकी भी समस्या बनी हुई है। ऐसे में किसानों की परेशानी को समझते हुए बिचौलिए 10-11 रुपये के रेट से खरीद कर रहे हैं। पैसे की तंगी बीच किसान इन्हें अपनी गाढ़ी कमाई बेचने काे विवश है। माह भर से किसान केंद्र निर्धारण, बोरा की उपलब्धता के साथ तत्पर खरीद के इंतजार में है। इस दिशा में ठोस प्रयास न होने पर आहत किसान सड़क पर उतर धरना-प्रदर्शन करने को विवश होगा।
विपणन अधिकारी दिनेश तिवारी बताते हैं कि इस वर्ष एक नवंबर से ही धान की खरीद प्रारंभ हो गई है। हार्वेस्टर से काटे जाने की दशा में नमी के कारण धान की खरीद संभव नहीं हो पाई रही है। सेंपल फेल हो जा रहे हैं। धान में एक प्रतिशत ही अन्य पदार्थ पाए जाने पर खरीद संभव है। पांच प्रतिशत से अधिक कलर डैमेज होने पर भी खरीद में बाधा आएगी। शासन द्वारा निर्धारित मानक पर ही खरीद किया जाएगा। किसान अपनी उपज को धूप में सुखाने के साथ साफ कराएं। दिसंबर से जनवरी तक धान की खरीद में तेजी आती है। सभी केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बोरा उपलब्ध है। इसने संपर्क कर किसान मानक अनुसार धान की बिक्री में तत्परता लाएं। चेक माध्यम से विभाग द्वारा उनका त्वरित भुगतान किया जा रहा है।
