- डालें जिंक, घास नियंत्रण में बरतें तत्परता
मऊ : रिमझिम फुहारे बरस रही हैं। किसानों के चेहरे पर मुस्कान है,वह धान के फसल देख कर खुश है। लेकिन लगे हाथों किसानों को सावधान रहने की जरूरत भी है। खासकर वो किसान जो खेत में यूरिया डालने की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह सही मौका है कि खेत में यूरिया छिड़काव करें। खरीफ की मुख्य फसल धान में यूरिया के पहले छिड़काव के लिए यह सर्वोत्तम समय है। खेतों में प्रचुर मात्रा में नमी होने की दशा मेें यूरिया फसल की जड़ों तक तत्काल पहुंचकर प्रभावी होगा।
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरिया के साथ जिंक का छिड़काव करने फसल में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा। इसके साथ ही बरसाती मौसम में घास नियंत्रण पर भी वह बल देते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डाॅ. डीपी सिंह की राय है कि खरीफ की मुख्य फसल धान में यूरिया के पहले छिड़काव के लिए इस तरह का बरसाती मौसम सबसे अनुकूल है। यूरिया के दानों का विगलन त्वरित होते हुए पौधे की जड़ से लेकर पत्ती तक प्रभावी होगा। इसी समय पहले छिड़काव में ही जिंक का प्रयोग करने से आगामी दिनों में कम वर्षा की स्थिति में भी फसल में रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास होगा।
किसानों को आगाह करते हुए डाॅ. सिंह ने कहा कि आसमान में छाई घटा की स्थिति में यूरिया का छिड़काव कभी भी किया जा सकता है, लेकिन धूप होने की दशा में इसका छिड़काव शाम को करना चाहिए। संडा विधि से रोपे जाने वाले खेत में पोषक तत्व एवं उर्वरक प्रबंधन के प्रति जागरूक रहने जरूरत होती है। सामान्य के मुकाबले संडा विधि के धान खेतों से दोगुनी उर्वरा क्षमता का दोहन करते हैं। ऐसे में माइक्रो न्यूट्रेंट का भी संतुलित मात्रा का प्रयोग अवश्य करें।
डाॅ. सिंह ने बताया कि रिमझिम फुहारों से धान के साथ घास में आशातीत वृद्धि होगी। मजदूरों द्वारा घास नियंत्रण सावधानी से कराया जाना चाहिए, जबकि दवा छिड़काव हमेशा धूप में किया जाना चाहिए। दवा छिड़काव के बाद कम से कम चार घंटा तेज धूप का होना नितांत आवश्यक है। रोपाई के समय घास का नियंत्रण न होने की दशा में 21 से 25 दिन बाद दूसरी बार किया जाता है। इस दौरान खेत से पानी निकाल देना चाहिए। खेत में पानी होने से दवा उस क्षेत्र में प्रभावी नहीं होगी। दूसरी बार नोमिनी गोल्ड, एंडूरा या पारस नामक दवा का प्रयोग 100एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से करना चाहिए। दवा छिड़कने के चार घंटे तक धूप खिली मिलने पर दवा और भी प्रभावी हो जाती है। कल्ले निकालने से पहले घास का प्रबंधन हर हाल में कर देना चाहिए।

