माडल गांव में मत्स्य व मशरूम उत्पादन के साथ स्वरोजगार पर है जोर

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पंचायत खबर टोली

  •  युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान
  • जीरोटील तकनीक और बीजशोधन का प्रयास

मऊ : गांव गोद लेने का चलन बढ़ता जा रहा है। लेकिन ज्यादातर लोग गोद लिये हुए गांवो को भूला देते हैं या फिर कभी कभार ही उधर रूख करते हैं। लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के वै​ज्ञानिक अपने गोद लिए हुए गांवों में कृषि विकास के काम में शिद्दत से लगे हुए हैं। यही कारण है कि इस खरीफ सीजन में कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी ने पांच ब्लाकों में गोद लिए गांवों को माडल रूप में विकसित करने की योजना का क्रियान्वयन तेजी से हो रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों के प्रयास से इन गांवो में धान में बीज उत्पादन के साथ उन्नत खेती के सभी आयामों को अपनाने के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन का भी विकास का प्रयास किया जा रहा है।  इतना ही नहीं इन गांवों में वैज्ञानिक इस प्रयास में भी लगे हैं कि युवाओं के लिए कृषि एवं उनके अनुषंगी कार्यों के जरिए रोजगार सृजन हो। इस उनका प्रयास है कि  मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन सहित छोटे-छोटे कार्यों से लोगों को विशेष तौर पर युवाओं को रोजगार​ मिले।

सतत संपर्क के जरिए विकास

इस खरीफ सीजन में केवीके द्वारा इन गांवों में 10 हेक्टेयर अरहर का प्रदर्शन किया गया है। इस दौरान फिल्ड डे व गोष्ठी के माध्यम से किसानों को नवीनतम तकनीकों की जानकारी भी प्रदान की गई है।

क्या कहते हैं अधिकारी

रोजगार सृजित करने के लिए केंद्र से स्वरोजगार प्रशिक्षण का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। केंद्र प्रभारी डा.डीपी सिंह बताते हैं कि  जिले के फतहपुर मंडाव ब्लाक के परसुपुर दिघेड़ा, बडरांव ब्लाक के रामपुर सोहड़, रतनपुरा ब्लाक के बसारिखपुर तथा परदहा ब्लाक के सरवां में किसानों को नरेंद्र अरहर का प्रदर्शन कराने के साथ ही धान की सीधी बोआई, मिश्रित मत्स्य पालन, एकीकृत मत्स्य पालन, पशुओं में होने वाले मौसमी रोग व उसके उपचार के विषय में किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

जीरोटील तकनीक पर जोर

इस खरीफ सीजन में इन गांवों में जीरोटील मशीन सहित सामान्य रोपाई विधि द्वारा बीज उत्पादन पर बल दिया जा रहा है। गांव में तकनीकों के प्रयोग में जैविक खेती पर जोर दिया जाएगा। अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से मिट्टी में हो रहे बदलाव के साथ खाद्यान्न पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए जैविक उर्वरक उत्पादन की इकाइयों का भी निर्माण का प्रयास किया जा हा है।

 स्थानीय रोजगार का होगा विकास

केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.डीपी सिंह बताते हैं कि इन गांवों में मशरूम उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन तथा मधुमख्खी पालन को केंद्र में रखकर विस्तृत प्रशिक्षण की कार्ययोजना बनाई गई है। इसके अंतर्गत इसमें इच्छुक व्यक्ति को प्रशिक्षित करने के साथ इनपुट की उपलब्धता में भी सहायता प्रदान की जाएगी। खरीफ सीजन से ही इसे क्रियान्वयन में लाने की दिशा में केंद्र प्रयासरत है।

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