जैविक खेती! हरी खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत, घटेगी रासायनिक उर्वरकों की जरूरत

0
94
पूजा

 

banana Farming: आज के समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाया है, जिससे फसलों की उत्पादकता में भी गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए किसानों को जैविक तरीकों की ओर रुख करना जरूरी है। इसमें हरी खाद का इस्तेमाल एक कारगर उपाय साबित हो सकता है। खासकर, केले की खेती से पहले हरी खाद वाली फसलों की बुवाई करने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है। इससे न केवल उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि खेती की लागत भी कम होती है।

 

 

जान लीजिए हरी खाद
हरी खाद ऐसी फसलों को कहा जाता है, जो मिट्टी में जैविक तत्वों और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए उगाई जाती है। ये फसलें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम, जस्ता, तांबा, मैंगनीज, लोहा और मोलिब्डेनम जैसे जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति करती है। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है, और जल धारण क्षमता भी बढ़ती है। इसके अलावा ढैंचा, सनई, मूंग, और लोबिया जैसी फसलें हरी खाद के लिए उपयुक्त है, और इनका प्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया से न केवल केला की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि रासायनिक उर्वरकों की लागत भी घटेगी, जिससे खेती अधिक लाभदायक होगी।

 

 

करें हरी खाद का इस्तेमाल
केला एक ऐसी फसल है, जिसका स्वाद, पोषक तत्व और चिकित्सक गुणों के कारण यह लगभग पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है। यह सभी वर्गों के लोगों का पसंदीदा फल है। यह कार्बोहाइड्रेट और विटामिन, विशेष कर विटामिन बी का उच्च स्त्रोत है। इसके ​अलावा केला दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक है। इसलिए केले की फसल
को पोषक तत्वों की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इसलिए, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। रबी फसलों की कटाई के बाद और केले की रोपाई के बीच का समय (लगभग 90-100 दिन) हरी खाद वाली फसलों को उगाने के लिए उपयुक्त होता है। इस अवधि में मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाया जा सकता है। जिससे केले की खेती अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनती है।

 

ये भी पढ़े…

 

राजस्थान सरकार दे रही ग्रीन हाउस पर सब्सिडी, किसानों की बदलेगी किस्मत

 

हरी खाद के लाभ
1. जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है जिससे फसल की मिट्टी उत्पादकता में सुधार होता है।
2. हरी खाद नाइट्रोजन स्थिरीकरण में मदद करती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत घटती है।
3. मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, और इसे अधिक उपजाऊ बनती है।
4. सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ने से मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है।
5. ढैंचा जैसी फसलें मिट्टी को पत्तियों और तनों से ढककर मृदा कटाव रोकती हैं।
6. हरी खाद का उपयोग जैविक खेती को बढ़ावा देता है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here