शाश्वत सिंह
पटना: नीतीश कुमार ने 2015 में जब लालू यादव के साथ मिल कर बिहार में सरकार बनाई थी तो उस समय उन्होंने बहुचर्चित योजना बनाई थी जिसको सरकार ने हर घर नल योजना का नाम दिया गया था। बिहार में ऐसे सैंकड़ो गांव थे जहां हर घर जल का प्रबंध नहीं था लेकिन इस योजना ने पानी की समस्या को कुछ हद्द तक ठीक किया। बता दें हर घर नल योजना की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। विकास प्रबंधन संस्थान (DMI) द्वारा सर्वेक्षण किए गए ग्रामीण घरों में से 94% से अधिक में अब नल के पानी के कनेक्शन हैं। इनमें से 93.80% को प्रति व्यक्ति प्रति दिन कम से कम 70 लीटर (एलपीसीडी) पानी मिलता है, जो पेयजल आपूर्ति के लिए राष्ट्रीय मानकों को पूरा करता है। सेवा की नियमितता में भी सुधार हुआ है। इस अध्यन में पानी की गुणवत्ता को उच्च दर्जा दिया गया, 99.53% परिवारों ने बताया कि आपूर्ति साफ और पारदर्शी थी। लाभार्थियों की संतुष्टि भी उतनी ही मजबूत थी, 95.40% लोग मात्रा से संतुष्ट थे, 95.02% नियमितता से और 96.71% पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट थे। लगभग 95% लोगों ने अपने क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के बारे में भी संतुष्टि व्यक्त की है।
इस सर्वेक्षण में 92% से अधिक योजनाएं प्रतिदिन न्यूनतम छह घंटे पानी की आपूर्ति प्रदान करती हैं, और 80% ओवरहेड टैंकों को वर्ष में कम से कम दो बार साफ किया जाता है। जनवरी 2024 में किए गए इसी तरह के आकलन की तुलना में, 2025 के आंकड़े प्रमुख मापदंडों में सुधार का संकेत देते हैं। पिछले साल, केवल 79% परिवारों ने नल के पानी तक पहुंच की सूचना दी थी, और केवल 45.88% को प्रति दिन छह घंटे या उससे अधिक समय तक पानी मिला था। इसके विपरीत, इस वर्ष के आंकड़े क्रमशः 94% और 92.73% तक बढ़ गए हैं।इस सर्वेक्षण के आने के बाद बिहार में जिस तरह से हर घर जल पहुंच रहा है उस से नीतीश कुमार के सात निश्चय के सपने को पंख मिली है। इस वर्ष बिहार विधानसभा के चुनाव है और हर घर जल योजना के सफल प्रयास से नीतीश कुमार जनता के सामने अपनी उपलब्धि बता सकते हैं।
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