अंकित पाण्डेय
नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हर माह लगभग 90 से ज्यादा बच्चे मिल रहे हैं। ये बच्चे अपने घरों से भाग कर दिल्ली सहित देश के अन्य महानगरों में पहुंच रहे हैं। इस साल अब तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 756 बच्चों को बरामद किया गया है। इन 756 बच्चों में से 227 लड़कियां हैं। घर से भागकर दिल्ली पहुंचने वाले बच्चों की स्टेशनों पर चोरी न हो इसलिए बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर तीन संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें सलाम बालक ट्रस्ट, प्रयास रेलवे चाइल्ड लाइन, और साथी शामिल हैं। इन संस्थाओं के मुताबिक हर माह 90 से अधिक बच्चे देश के विभिन्न राज्यों से परिवार से नाराज होकर दिल्ली, मुंबई जैसे देश के अन्य महानगरों में पहुंच जाते हैं। इन बच्चों को बहका कर कोई न ले जाए, इसके लिए लगातार निगरानी रखी जाती है। प्लेटफार्म के सभी वेंडरों को भी बच्चों पर ध्यान रखने के लिए कहा गया है, यदि कोई बच्चा अकेला है, रोता या परेशान दिखता है तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन डेस्क को सूचना देते हैं।
नाराज होकर बिहार के पटना से दिल्ली पहुंची किशोरी को किया बरामद
अभी पिछले सप्ताह ही लगभग 15 साल की बिहार की राजधानी पटना से अपने परिवार से नाराज होकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई। प्रयास रेलवे चाइल्ड लाइन की टीम ने किशोरी को बरामद कर जीआरपी को शौंप दिया। पुलिस ने किशोरी के परिवार को उसके मिलने की सूचना दी।
बच्चों के भ्रमित होने का सबसे बड़ा कारण है इंटरनेट मीडिया
प्रयास रेलवे चाइल्ड लाइन की टीम लीडर अनीता अरोडा और राजवीर चौहान ने बताया कि ज्यादातर बच्चे काम की तलाश में या घर में डांट पड़ने पर गुस्से में भागकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में पहुंच जाते हैं। अब यह भी नई बात नहीं है कि बच्चे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम पर किसी से दोस्ती कर मिलने के लिए भी दिल्ली आ जाते हैं।
सोशल मीडिया के इस दौर में अपने बच्चों पर रखें पैनी नज़र
आधुनिकता के इस दौर में हर घर में मोबाइल की मौजूदगी से हर घर इंटरनेट मीडिया के जरिए एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। सकारात्मकता के साथ-साथ इंटरनेट की दुनियां में तमाम चुनौतिया भी हैं। बच्चें बहुत तेजी से चीजों को सीखते हैं और उसका अनुसरण भी करने लगते हैं। नौनिहालों कों भी मोबाइल की लत लग रही है, यह गंभीर चिंता का विषय है। बच्चे स्वभाव से चिड़चिड़े होते जा रहे हैं, मां-बाप की मामुली डाट सहन नहीं कर पाते हैं। नाराज बच्चे घर से भाग जाते हैं। बच्चों के घर से भागने के पीछे कई वजह हो सकती लेकिन आजकल ज्यादातर बच्चे सोशल मीडिया की वजह से भ्रमित हो रहे हैं। अभिभावकों कों अपने बच्चों की सारी गतिविधियों पर पैनी नज़र रखनी चाहिए। अपने बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार रखना चाहिए। बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं, इसलिए अपने बच्चे से हर उस विषय में बात करनी चाहिए जिस बारे में आमतौर पर बात नहीं होती। अगर आपका बच्चा आपसे अपनी परेशानियों को साझा कर सकेगा तो वह कभी घर से नही भागेगा।
