सैकड़ो बच्चियों की जिंदगी को ज्ञान से रोशन कर रहे है नेत्रहीन दत्तू

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भावना त्रिपाठी

कर्नाटक के दत्तू अग्रवाल पिछले 17 सालों से सैकड़ों दृष्टिहीन लड़कियों को शिक्षित करने का काम कर रहे है। हैरानी वाली बोत तो यह है कि दत्तू खुद तीन साल की उम्र से दृष्टिहीन हैं। इसके बावजूद वे सैकड़ो लड़कियो को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहे है ।

मां से मिली प्ररेणा

दत्तू को इसकी प्ररेणा उनकी मां से मिली।दत्तू बताते है कि नेत्रहीन होने के बावजूद उनकी मां ने उन्हें पढाया और प्रोफ्सर भी बनाया।वे सोचते है कि हर दृष्टिहीन बच्चा उनके जैसा खुशकिस्मत नहीं हो सकता । इसलिए बचपन से उन्होंने ठान लिया था कि वह भी आगे चलकर अपने जैसे दूसरे जरूरतमंद लोगों की मदद जरूर करेंगे।

पत्नी के साथ से सपना किया साकार

दत्तू के इस सपने को हकीकत में बदलने में उनकी पत्नी ने भी उनका साथ दिया है ।उनके रिटायरमेंट के कुछ साल पहले ही उन्होंने अपनी पत्नी की मदद से चार जरूरतमंद दृष्टिहीन बच्चियों को अपने घर में ही रखकर उनकी शिक्षा और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। धीरे-धीरे, आस-पास के कई जरूरतमंद लोगों ने अपनी दृष्टिहीन बच्चियों को उनके पास पढ़ने भेजना शुरू किया

खुद दत्तू ने ही की पहल

वे खुद ऐसी बच्चियों को खोज कर अपने साथ ले आते थे जो स्कूल नहीं जा रही थीं। उनका मानना था कि आज भी लोगों में लड़कियों की शिक्षा के प्रति ज़्यादा बदलाव नहीं आया है। ऐसे में लड़की अगर देख न पाती हो तो उसे पढ़ाने में कोई रूचि नहीं लेगा। जिसके कारण ऐसी बच्चियों का भविष्य अंधकार में जा सकता है । इसलिए उन्होंने विशेष रूप से लड़कियों के लिए एक स्कूल खोलने का विचार किया ।

दत्तू के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि

उनका यह स्कूल ना केवल लड़कियों को शिक्षा दे रहा है बल्कि 75 दृष्टिहीन बच्चियों का घर भी है ।दत्तू इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।वे आगे चलकर और भी बच्चियों को आत्मनिर्भर बनाने का काम करते रहेंगे।

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