- उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में रमाशंकर उर्फ भिखारी बाबा दे रहे सामाजिक सद्भाव का संदेश, तेरह साल में रमाशंकर उर्फ भिखारी बाबा ने 1845 गरीब कन्याओं की कराई शादी
सुजीत शुक्ला
सोनभद्र:गरीब बेटियों का हाथ पीला होते देख उन्हें अपार सुख मिलता है। अनाथ और अभावग्रस्त बेटियों का कन्यादान कराने में इनकी जान बसती है। ‘संतोष ही परम सुख है’ को सूत्र वाक्य मानकर जन सेवा में जुटे भिखारी बाबा सोनभद्र और आसपास के आदिवासी क्षेत्र में डेढ़ दशक में गरीबी उन्मूलन के प्रयास में जुटे हैं। तेरह साल में 1845 गरीब और अनाथ युवतियों का ब्याह कराने वाले बाबा मूलत: झारखंड के चतरा जिले के किचार के रहने वाले हैं। युवावस्था तक लोग उन्हें जंगली रमाशंकर के नाम से जानते थे। बचपन से ही गरीबों से लगाव रखने वाले रमाशंकर ने जीवन के 27वें वर्ष में गरीबी उन्मूलन की दिशा में कदम बढ़ाए। संकल्प व दृढ़ इच्छाशक्ति से अभावग्रस्त लोगों की मुश्किलें हल करते-करते कब वे भिखारी बाबा के नाम से मशहूर हो गए, पता ही नहीं चला।
वर्ष 1982 से गरीबी उन्मूलन में सक्रिय 63 वर्षीय भिक्षु भिखारी बाबा को अपने प्रयासों का सार्थक परिणाम वर्ष 2005 में मिलना शुरू हुआ, जब वे आदिवासियों व गरीबों के संपर्क में आए। बाबा को गरीबों की बेटियों की शादी व उसका खर्च जुटाने की समस्या समझ में आई। इसके बाद लोगों के सहयोग से गरीब-अनाथ युवतियों की सामूहिक शादी कराने का उन्होंने बीड़ा उठा लिया।
पहली बार में 21 युगलों की शादी
पहली बार रामगढ़ में सामूहिक आयोजन में 21 गरीब बेटे-बेटियों की शादी कराई, जिसमें वहां के तत्कालीन डीएम व एसपी ने भी भागीदारी की। आंकड़े के मुताबिक फरवरी 2017 तक भिखारी बाबा हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समुदाय की 1845 बेटियों की शादी करा चुके हैं।
महाकुंभ में 101 कन्याओं के हाथ पीले कराए
अपनी मुहिम से गरीबों को जोड़ने के लिए जिले के कोने-कोने में पहुंचे भिखारी बाबा ने वर्ष 2013 में प्रयाग महाकुंभ में आयोजन कर 101 गरीब कन्याओं की शादी कराई। इसके मुख्य अतिथि स्थानीय कमिश्नर और जिलाधिकारी थे। इसके पहले चंदौली में 113 कन्याओं के हाथ पीले कराए। इस कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर ने भी शिरकत की थी।
वर्ष 2005 से पहले समाज सेवा के अन्य कार्यो में रमे भिखारी बाबा का नजरिया रामगढ़ शिव मंदिर के पास एक घटना ने बदला। पन्नूगंज थाना क्षेत्र के लौवारी गांव निवासी एक युवक के जहर खाकर जान देने की सूचना पर बाबा मौके पर पहुंचे। वहां युवक की बहन के दुख ने उन्हें हिलाकर रख दिया। बाबा ने बाद में उसकी शादी कराई।
क्या कहते है बाबा
जंगली उर्फ भिखारी बाबा कहते हैं कि मेरा जीवन गरीबों-अनाथों के लिए है। इनके लिए जो भी थोड़ा बहुत किया यदि उससे लोग सीखते हैं तो समरसता बढ़ेगी। वैसे भी बेटियों का घर बसाने से बड़ा पुण्य और क्या होगा। जन सेवा का यह क्रम सांस रुकने तक चलता रहेगा। (दैनिक जागरण से साभार)


