संतोष कुमार सिंह
अब बहुत सुविधा हो गयी है। आसाम में वैसे भी बारिश बहुत होती है। जल जमाव। फिसलन। बढ़ती उम्र। लेकिन अब कोई परेशानी नहीं। यही शौच कर लो। बगल में बने..बाथरूम में नहा लो। लगभग 65 वर्षीय बोहागी बोसा को अपनी सही—सही उम्र तो याद नहीं। लेकिन इस बात से खुश हैं कि बाकी बचे उम्र में न सिर्फ वे फिसलन से बच सकती हैं। बल्कि खुले में शौच से होने वाले परेशानियों से भी। साल भर से उनकी जिंदगी बदल गयी है। पहले रात में शौच आने पर बच्चों को जगाना पड़ता था। अब वे अपना नित्यकर्म खुद कर सकती हैं। अब उन्हें अच्छा लगने लगा है। पानी सप्लाई भी है। पानी लाने का झंझट भी नही।
बोहागी बोसा ही क्यों—- होलाफूकन का हर घर अब खुले में शौच मुक्त हो गया है। 215 घरों वाले चोला धरा गांव के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में बदलाव के साथ ही जीवनचर्या का अंग बन गया है शौचालय का प्रयोग।
लगभग 34 वर्षीय बोरनाली बोसा की बीति भी बोसाई से अलग नहीं है। हालांकि बोरनाली पहले भी घर के कच्चे बने शौचालय का प्रयोग किया करती थीं। बाहर नहीं जाती थीं। गांव के भी ज्यादातर लोग पर्दे का आर कर या पेड़ों के ओट में शौच किया करते थे। लेकिन अब ये परेशानी नहीं है। अब पक्का शौचालय बन गया है। अब गंध से मुक्ति। बीमारियों से मुक्ति। वे थोड़ा सकुचाते हुए कहती हैं कि ”शौचालय ने हमें न सिर्फ सुविधा दी है ,बल्कि यह सम्मान भी दिया है कि है कि हम जानवर जैसे नहीं हैं। अब न सुबह उठने का झंझट और न जल्द निपटने की हड़बड़ाहट।
होलो फूकन में 2267 घर हैं। पंचायत प्रमुख मुकुल कहते हैं कि ‘शुरू में जब डिप्टी कमिश्नर ने यह काम सौंपा तो लगा कि कैसे समझाउंगा गांव के लोगों को। अपनी तरफ से कोशिश की। कई लोगों ने यहां तक कहा कि बंद कमरे में कैसे शौच करेंगे। लेकिन धीरे—धीरे काम शुरू हुआ। काम में तेजी तब आई जब डिप्टी कमिश्नर वीरेंद्र मित्तल ने शनिवार को गांव के लोगों के साथ बैठक किया। इसके फायदे बताये। सबसे बड़ी बात थी, पैसे भी सरकार दे रही थी पूरे 12 हजार। हमें तो टारगेट पूरा करना था, जो हमने कर दिखाया। हमने सोचा भी नहीं था कि जिस काम को हम इतना मुश्किल समझ रहे थे, वो इतना आसान है। लेकिन मुख्य चुनौती इसके उपयोग की थी। इसके लिए हमने निगराणी समिति बनाई। जो न सिर्फ शौचालय के काम को तेजी से कराये,बल्कि लोगों के व्यवहार में भी बदलाव हो। निगराणी समिति के साथ ही, ग्राम बूढ़ा अर्थात गांव के किसी बूढ़े व्यक्ति को नियुक्त कर यह जिम्मेवारी दी गयी कि वे लोगों के व्यवहार में बदलाव लायें। इस काम में वक्त लगा। कई टीम बनी। जो लोगों के घर में जाकर उन्हें समझाता था, कि खुले में शौच के क्या नुकसान हैं? आज भी इक्का दुक्का लोग बाहर जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनपर हमारी नजर होती है। आज गांव में बीमारियां कम हो गयी हैं। शौचालय के साथ ही पीने के पानी का सप्लाई भी है। इसके लिए 50 रूपए प्रति माह देना होता है, जो लोग खुशी से देते हैं।
हौलो फूकन आसाम के शिवसागर जिले के लकुआ ब्लॉक एक पंचायत है, जिसे 2 अक्टूबर 2015 को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। इसके साथ ही चाले पाथेर,चराईदेव और निमोना गढ़ पंचायत भी पूरीतरह से खुले में शौचमुक्त घोषित हो गये हैं। पूरे ब्लॉक में 5319 शौचालय बनाये गये हैं जिसमें 8,506 घर थे। लगभग 25 फीसदी घरों में पहले से शौचालय थे। बड़ी बात यह है लकुआ अपनी उपलब्धियों के साथ आसाम में बनाये गए नये जिले सराय देव का हिस्सा हो गया है।


