कभी देश के खिलाफ खड़ा था… शौचालय के लिए साथ खड़ा हूं:गोपाल दत्ता

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संतोष कुमार सिंह

एक ऐसा समय था, जब देश के खिलाफ लड़ते थे। लेकिन अब लग रहा है कि देश के लिए कुछ रहा हूं। ये शब्द हैं उल्फा से जुड़े रहे गोपाल दत्ता के। गोपाल दत्ता आजकल अरविंद राजखोवा ग्रुप के साथ हैं। यह समूह प्रो टॉक है, जो कि सरकार से बातचीत के जरिए समस्या को सुलझाना चाहती है। लकुआ के चराईदेव पंचायत के रहने वाले गोपाल दत्ता ने अनुकरणीय मिसाल पेश किया है। जब लकुआ को खुले में शौच मुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, डिप्टी कमिश्नर वीरेंद्र मित्तल पंचायत प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श कर रहे थे कि कैसे आगे काम बढ़े।

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चराईदेव पंचायत की ​महिला मुखिया सुमित्रा कुमार जोर—शोर से इस काम में जुटी हुईं थी। ग्रामसभा बुलाया गया। सभी लोगों के समक्ष घरों में शौचालय बनवाने और उसके उपयोग को बढ़ावा देने की बात हुई। पैसा सरकार से आना था,लेकिन फायदा तो गांव को था। उन्होंने लोगों को समझाया कि यदि शौचालय का प्रयोग करेंगे तो बीमारी भाग जाएगी। इसी बैठक में उल्फा से जुड़े रहे गोपाल दत्ता भी अन्य ग्रामवासियों के साथ उनकी बातें ध्यान से सुन रहे थे। अंदर ही अंदर उनका मन इस सामाजिक कार्य से जुड़ने को तैयार था। जब सुमित्रा कुमार ने उनके सामने इस काम से जुड़ने का प्रस्ताव रखा तो वे सहर्ष तैयार हो गए। आज भी गांव में कैंप है। वे जुड़े हुए हैं लेकिन शौचालय अभियान से जुड़े हुए है। सुमित्रा कुमार कहती हैं कि इन्होंने एक सप्ताह में 50 शौचालय बनवा दिया। डीसी वीरेंद्र मित्तल सुमित्रा कुमार की बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि एक बार शौचालय के लिए पैसा निर्गत करने में देरी हो गयी। गोपाल दत्ता ने अपनी मोटर बाईक बेच दी,लेकिन शौचालय का काम चलता रहा। उन्होंने अपने सारे पैसे लगा दिया।

राजखोवा ग्रुप से जुड़े गोपाल दत्ता कहते हैं, ”यह हमारे लिए बड़ी खुशी की बात है कि हम देश के काम कर रहे हैं, शौचालय निर्माण के ​काम से जुड़े हुए हैं। एक वो भी वक्त था कि हम देश के विरूद्ध लड़ रहे थे।,अब देश के साथ खड़े हैं।”लकुवा खुले में शौच मुक्त ही नहीं हुआ है, शौचालय निर्माण के काम में जमीनी स्तर पर लोग एक दूसरे से जुड़े हैं जिससे ग्राम समाज मजबूत होता है।

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कंपनियों ने बढ़चढकर की हिस्सेदारी

लकुआ को ओडीएफ ब्लॉक बनाने में क्षेत्र में काम कर रहे बड़ी कंपनियों का भी अहम योगदान रहा है। ओएनजीसी, बीसीपीएल,आईसीसीआई जैसे संस्थाओं के ​दान से स्कूलों, सामुदायिक स्थानों पर शौचालय बनवाये गये हैं। सरायदेव पंचायत के लखमीपाम गांव में सृजनी नृत्य मंदिर में सामुदायिक शौचालय बनवाये गये हैं। इसे बनाने में 1लाख,20 हजार रूपया लगा। इसे मनसा और बीसीपीएल के संयुक्त प्रयास से बनाया गया है। इस तरह के 6 सामुदायिक शौचालय बनाये जाने हैं। 4 पूरे हो  गये हैं। डिप्टी कमिश्नर कहते हैं कि, पूरे शिवसागर में इस मॉडल को दुहराया जाएगा।

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