खुले में शौच मुक्त लकुआ पहला पड़ाव…अभी लंबा सफर तय करना है:वीरेंद्र मित्तल

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संतोष कुमार सिंह

देश में खुले में शौच की वजह से हो रहे नुकसान और इससे आम जनता को रही परेशानी के विषय में जब यूनिसेफ और डब्लूएचओ के प्रतिनिधियों ने बताया। साफ सफाई और शौचालय की कमियों से होने वाली डायरिया या अन्य बी​मारियों से होने वाली मौत के आंकड़े जब सामने रखे गये, तो आश्चर्य भी हुआ और दुख भी। सरकार स्वच्छता अभियान चला रही है। शौचालय स्वच्छता से ही जुड़ा मामला है। ऐसे में जब तकनीकि पहलूओं को यूनिसेफ द्वारा चर्चा के बाद समझ लिया, तो चुनौती थी, इसे कार्ययोजना में शामिल करने का। और ऐसी कार्ययोजना जो एसी चैंबर में बैठकर बनाई जाती है, जमीन से उसका कोई वास्ता नहीं होता,और उसका जमीन पर कोई प्रभाव नहीं होता। ये शब्द हैं लकुआ को खुले में शौच मुक्त बनाने में अपने कर्मचारियों के साथ प्रयास करने वाले शिवसागर के डिप्टी कमिश्नर वीरेंद्र मित्तल के। 2 अक्टूबर, 2015 से लकुआ पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त हो चुका है। 29 फरवरी 2015 को जिलाधिकारी होने के नाते आसाम के मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रमाण पत्र के साथ 25 हजार रूपये पुरस्कार का चेक दिया है। मित्तल कहते हैं कि इस काम में जितने लोग लगे थे, चाहे हमारे पीडब्लूडी के अधिकारी हों, कर्मचारी हो या ग्राम पंचायत से जुड़े प्रतिनिधी। सबका हक है। सब मिलकर इस पैसे से पार्टी करेंगे।

Sivasagar DC Virendra Mittal expalaining media on how the villagers became the beneficiary of toilets made by the Government, an attempt to achieve Open Defecation Free block

लकुआ ही से ही शुरूआत क्यो?

वीरेंद्र मित्तल इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि लकुआ शिवसागर का सबसे छोटा ब्लॉक है। इसमें चार पंचायत है। हॉलोफूकन, चलायपाथेर, चराईदेव और निमोनागढ़। जिसमें कुल 8,506 मकान हैं। 28 अगस्त 2014 को नाजिरा में हुई तीन दिवसिय कार्यशाला में पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा बनी। यूनीसेफ और फीड बैक फांउडेशन ने कार्यक्रम में सहयोग देने को आगे आए। इसी वर्ष दिसंबर 2014 इन चारों ब्लॉक में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। लकवा ब्लॉक में सभी पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई। इसके बाद ही काम शुरू हुआ। राजमिस्त्री का प्रशिक्षण हुआ है।

सभी स्टेक होल्डर्स को एक मंच पर लाया गया। एनजीओ,एसएचएचजी, रिसोर्स ग्रुप जेसे कि बीआरसीसी,सीआरसीसी, स्वच्छता दूत, सामुदायिक प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर बात हुई। सबसे पहले ब्लॉक में जितने सरकारी कर्मचारी थे, और जिनके घरों में शौचालय नही थे,उन्हें नोटिस दिया गया। शौचालय निर्माण का काम शुरू हुआ। न सिर्फ स्थानिय एमएलए और पंचायत प्रतिनिधियों से बात की गयी, बल्कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबलिटी अर्थात कंपनियों के सामाजिक जवाबदेही के तहत कई कंपनियां आगे आयी। जैसे कि ओएनजीसी,बीसीपीएल,आईसीसीआई आदि।

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निर्माण से ज्यादा,निगराणी जरूरी

मित्तल कहते हैं कि शौचालय व्यवहार से जुड़ा प्रश्न है। लोगों के व्यवहार में शौचालय का उपयोग शामिल हो इस​के लिए हमने खुद प्रत्येक शनिवार को ग्रामीणों के साथ बैठक की। एक तरफ निर्माण का काम चल रहा था..साथ ही निगराणी का भी। एक दिन बातचीत में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने कहा,अब लगता है इंसान बन के मरूंगी। ऐसा नहीं है कि लोगों को खुले में शौच करना अच्छा लगता हो। ईकका दुक्का लोग होंगे। लेकिन ज्यादातर लोग प्रेरित करने पर और इससे होने वाले फायदे की जानकारी देने पर लोग समझते हैं। निगराणी के लिए ग्राम बूढ़ा जेसे प्रयोग किया गया। ग्राम बूढ़ा को 2800 रूपये का आनरेरियम निर्धारित किया गया है।

सामुदायिक शौचालय निर्माण का भी काम किया गया। इसके साथ ही पर्यावरण पर ध्यान देने के लिए सॉलीड लिक्विड वास्ट मैनेजमेंट का काम शुरू किया गया है। इतना ही नहीं लकवा में चल रहे काम को सोशल मीडिया से जोड़ते हुए ह्वाट्स एप ग्रुप लकवा ब्लॉक ओडीएफ इनिशिएटिव बनाया गया है। ताकि जमीनी स्तर पर सूचनाएं पहुंचे। सूचना का आदान प्रदान हो।

आगे की राह

लकुआ को खुले में शौच मुक्ति का प्रमाण पत्र मिल चुका है। लेकिन व्यवस्था आगे भी चलती रहे,और लकुआ हमेंशा ओडीएफ बना रहे इसके लिए निगराणी समिति बनाई गई है। इसके साथ ही अब​ शिवसागर के सबसे बड़े ब्लॉक डिमोह में महिला राजमिस्त्री के प्रशिक्षण का काम शुरू हो गया है। जब तक पूरा शिवसागर खुले में शौच मुक्त नहीं हो जाता काम चलता रहेगा। लकुआ के अनुभव बड़े हैं। इसकी सफलता आगे की राह आसान बनायेगी।

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