किसान नेताओं का गैरराजनीतिक आंदोलन..बड़े धोखे हैं इस राह में

मंगरूआ


नयी दिल्ली: किसानों का आंदोलन है। किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। तीन कृषि कानूनों की वापसी से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। किसान आंदोलन का राजनीति से कोई लेना देना है। ये बातें लगातार कही जा रही हैं लेकिन ये उतना ही सच है जितना की किसानों का यह दावा कि इस कानून से किसानों की जमीन छीन जाएगी। खेती किसानी चौपट हो जाएगा और किसानों के जमीन पर कॉरपोरेट का कब्जा हो जाएगा।
किसान आंदोलन में जम कर राजनीति हो रही है। एक तरफ राजनीतिक दल के नुमाईंदे धरना स्थल पर जाकर किसानों के समर्थन की बात दुहरा रहे हैं। उनके पक्ष में संसद से सड़क तक राजनीतिक दलों द्वारा आवाज उठाई जा रही है। कहीं राजनीतिक पार्टियों के नेता किसान आंदोलन के समर्थन में महापंचायत का आयोजन। तो कहीं 26 जनवरी को जिस तरह किसान आंदोलन के नाम पर दिल्ली की सड़कों पर ट्रैक्टर दौड़ हुई और गणतंत्र का पर्व का महत्व समझे बिना लाल किला पर धार्मिक झंडा फहराया और तिरंगे का अपमान हुआ, पुलिस कर्मियों के साथ हिंसक ज्यादती हुई, उससे चौकन्नी दिल्ली पुलिस उन सभी बोर्डरों पर जहां किसान आंदोलन चल रहा है न सिर्फ चौकसी बढ़ाई है बल्कि सुरक्षा के इतने पुख्ता इंतजाम किये हैं ​कि किसान आंदोलन से जुड़े नेताओं के साथ राजनीतिक नेता भी अब सवाल खड़ा करने लगे हैं कि आखिर जब किसानों का लोकतांत्रिक आंदोलन चल रहा है तो फिर सुरक्षा के मल्टी लेयर बैरिकेंडिंग की आवश्यकता क्या है जहां न सिर्फ सड़कों पर सिमेंटेड बैरिकेडिंग की जरूरत पड़ रही है बल्कि कील से लेकर कंटीले तारों का भी इस्तेमाल किया गया है।
पूरे खबर पर दिन भर की हलचल को समग्रता में देखते हैं और सबसे पहले जायजा लेते हैं गाजीपुर में आंदोलन पर बैठे राकेश टिकैत के प्रदर्शन स्थल की। भारतीय किसान आंदोलन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने जब से आॅन कैमरा आंसू बहाई है उस वक्त से गाजीपुर बोर्डर का नजारा बदला हुआ है। बड़ी संख्या में किसान जुट रहे हैं और उसी के साथ राकेश टिकट के बोलबच्चन में भी आत्मविश्वास झलकने लगा है। वो लगातार राजनीतिक दलों के नेताओं से मिल रहे हैं। इस क्रम में आज उनके मेहमान थे शिवसेना के संजय राउत। राकेश टिकैत नेताओं से मिलने के बाद ये तो कहते हैं कि विपक्ष किसान आंदोलन का राजनीतिकरण न न करे, लेकिन उन्हें नेताओं के समर्थन और मीडिया के फोटोसेशन से कोई परहेज नहीं है।


शिवेसना के संजय राउत से मिले टिकैत
शिवसेना नेता संजय राउत ने मंगलवार को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर में किसानों के विरोध स्थल पर पहुंचे। गाजीपुर बोर्डर पर पहुंचने के बाद राउत ने मंच के पास टिकैत तथा अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि 26 जनवरी के बाद जिस तरह से यहां तोड़फोड़ हुई और टिकैत तथा आंदोलन के दमन की कोशिश की गई, हमने महसूस किया कि किसानों के साथ खड़े रहना और पूरे महाराष्ट्र, शिवसेना तथा उद्धव ठाकरे साहब की ओर से समर्थन करना हमारी जिम्मेदारी है। हालांकि राकेश टिकैत ने इस सियासी मुलाकात के विषय में कहा कि
अगर विपक्ष हमारा समर्थन करने के लिए आ रहा है तो कोई समस्या नहीं है लेकिन इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। अगर नेता आते हैं तो हम कुछ नहीं कर सकते।
किले में तब्दील हुआ गाजीपुर बोर्डर
राकेश टिकैत की मौजूदगी वाले गाजीपुर बॉर्डर को किले में तब्दील कर दिया गया है। बॉर्डर को चारों तरफ से बंद कर दिया गया है। भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी है और सड़कों में लोहे की किलें लगा दी गयी हैं। हालाकी पुलिस की किलेबंदी पर किसान नेता राकेश टिकैत उन्हें तो दिल्ली के अंदर जाना नहीं है, तो सरकार जनता की राह में कांटे लगा रही है. उन्होंने सड़क अवरुद्ध करने के आरोप पर कहा, ट्रैफिक आंदोलन को किसानों द्वारा अवरुद्ध नहीं किया गया है, यह पुलिस बैरिकेडिंग के कारण है।
मोदी बताएं नंबर बातचीत को तैयार
इतना ही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन नंबर की मांग करते हुए कहा कि वो फोन करने के लिए तैयार बैठे हैं। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में कहा था कि सरकार किसानों से केवल एक फोन कॉल की दूरी में है। सरकार किसानों से बातचीत को हमेशा तैयार है। किसानों से कृषि मंत्री की ओर से किया गया वादा आज भी कायम है। इसके बाद विभिन्न सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया था और सरकार से बातचीत करने की बात कही थी।
अक्टूबर तक चलेगा आंदोलन

राकेश टिकैत प्रधानमंत्री से बातचीत तो करना चाहते हैं लेकिन साथ ही यह भी कहते हैं ​बातचीत भी होगी और आंदोलन भी होगा। इतना ही नहीं टिकैत ने आंंदोलन की तिथी भी बताई और कहा कि हमने सरकार को बता दिया कि ये आंदोलन अक्टूबर तक चलेगा। अक्टूबर के बाद आगे की तारीख देंगे। बातचीत भी चलती रहेगी। उन्होंने दिल्ली हिंसा पर कहा, नौजवानों को बहकाया गया, उनको लाल किले का रास्ता बताया गया कि पंजाब की कौम बदनाम हो। किसान कौम को बदनाम करने की कोशिश की गई।


सुरक्षा इंतजामात से भड़के किसान
संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं ने बयान जारी कर यह आरोप भी लगाया कि सड़कों पर कीलें ठोकने, कटीले तार लगाने, आंतरिक सड़क मार्गों को बंद करने समेत बैरिकेड्स का बढ़ाया जाना, इंटरनेट सेवाओं को बंद करना और पुलिस एवं प्रशासन की ओर से नियोजित हमलों का हिस्सा हैं। मोर्चा ने दावा किया कि किसानों के प्रदर्शन स्थलों पर बार-बार इंटरनेट सेवाएं बंद करना और किसान आंदोलन से जुड़े कई ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, ”ऐसा लगता है कि सरकार किसानों के प्रदर्शन को विभिन्न राज्यों से समर्थन बढ़ने से बहुत डरी हुई है।” किसान मोर्चा अपनी बैठक में फैसला किया कि किसान आंदोलन के खिलाफ पुलिस एवं प्रशासन की ओर से उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाना चाहिए। वहीं सरकार से बातचीत के सवाल पर ​भी किसान संगठन बंटे हुए हैं और शर्त रख रहे हैं ज​ब तक 26 जनवरी की घटना के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए ​पुलिस द्वारा गिरफ्तार किसानों को नहीं छोड़ा जाएगा बातचीत नहीं होगी। इस बीच राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान महासभा का आयोजन करते हुए अपने पार्टी की जड़े मजबूत करने में लगे हुए हैं।
राहुल गांधी ने उठाये सवाल
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी किसानों के आंदोलन स्थलों के निकट पुलिस द्वारा सीमेंट एवं कंटीले तार के अवरोधक बनाए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उसे दीवार की बजाय पुल बनवाना चाहिए। उन्होंने किसानों के आंदोलन स्थलों के निकट अवरोधक बनाए जाने से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘भारत सरकार, पुल बनाइए, दीवार नहीं।’’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘शासन की मोदी की शैली — उन्हें खामोश कर दीजिए। उनका संपर्क काट दीजिए। उनका दमन कर दीजिए।’’ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इसी विषय को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया, ‘‘प्रधानमंत्री जी, अपने किसानों से ही युद्ध?’’


परतों में की गई है बैरिकेडिंग

सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षा की पहली परत में सीमेंट का बैरिकेड लगाया गया है जहां पर अर्ध सैनिक बल के जवान और अधिकारी तैनात हैं। वहीं दूसरी परत में कंटीले तार की बाड़ जिनके पास सड़क को बीचों- बीच खोद दिया गया है, सीमेंट की मदद से सड़कों पर छोटी-बड़ी में कीलें गाड़ी हैं। ये किसी भी प्रकार के वाहन को रोकने के लिए लगाई गयीं हैं।

तीसरी और चौथी परत में लोह के बैरिकेड लगाये गए हैं जबकि पांचवीं परत में ट्रकों की बड़ी ट्रॉलियाँ और कंटेनर लगाए गए हैं। आख़री परत में फिर कंटीले तारों की बाड़ लगाई गयी है।
क्या कहती है दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के आयुक्त एस एन श्रीवास्तव और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को गाजीपुर बॉर्डर का दौरा किया और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। श्रीवास्तव ने गाजीपुर, सिंघू और टीकरी बॉर्डर पर नये सुरक्षा उपायों का बचाव करते हुए 26 जनवरी को हुई हिंसा का जिक्र किया, जब पुलिसकर्मियों पर हमले के लिए ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया था और अवरोधकों को तोड़ दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘उस वक्त कोई सवाल क्यों नहीं किया गया था? हमने अब क्या कर दिया? हमने बस अवरोधक मजबूत किये हैं…। ’’

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