सुधाकर सिंह के इस्तीफे के पीछे बयान बाजी नहीं, भ्रष्टाचार है असल वजह

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मनोज कुमार

कैमूर: बिहार में बनी नई महागठबंधन की सरकार में कृषि मंत्री बनने के बाद इस्तीफा देने को मजबूर होने वाले सुधाकर सिंह अपने बयानों की वजह से लगातार सुर्खियों में है। अभी तक यही माना जा रहा है कि कृषि मंत्री पद से सुधाकर सिंह के इस्तीफे के पीछे की वजह उनका तल्ख बयान और सरकार में रहकर सरकार का विरोध करना है। कृषि मंत्री के द्वारा लिखा हुआ जो पत्र  है उससे साफ जाहिर होता है कि इस्तीफे के पीछे बयानबाजी नहीं बल्कि पिछले 15 सालों में कृषि विभाग में हुई हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार बड़ी वजह है।

आपको बता दें कि कृषि मंत्री बनने के बाद सुधाकर सिंह 45 दिनों में 20 से अधिक पत्र कृषि विभाग के सचिव को लिखा है। अगर हम बात करें तो तत्कालीन कृषि मंत्री ने 21 सितंबर 2022 को सचिव को लिखे पत्र में मांगा था कि कृषि विभाग के विभिन्न संभागों और निदेशालयों में एक ही स्थान पर 3 वर्ष से अधिक अवधि तक पदस्थापित अधिकारियों की सूची प्रस्तुत करें। साथ ही सब्जी मसाला की खेती के अंतर्गत 2019-20 2020-21 में भोजपुर जिले में क्रियान्वित योजना से संबंधित विस्तृत विवरण का भी मांग किया था। यही नहीं देव नारायण महतो और नितेश कुमार राय उप निदेशक उद्यान से संबंधित पिछले 5 पदस्थापना का विवरण तथा उनसे संबंधित आरोपों की विवरणिका भी मांग किया था।

पूर्व कृषि मंत्री ने कृषि यंत्रीकरण योजना अनुदान से संबंधित सभी यंत्रों का कंपनी वार मूल्य एवं पिछले 2 वर्षों में विभिन्न कंपनियों प्रतिष्ठानों को भुगतान की गई कंपनी व यंत्र अनुदान की राशि का पूर्ण विवरण का मांग किया था। सुधाकर सिंह 14 सितंबर 21 सितंबर 22 सितंबर और 24 सितंबर 2022 को कृषि विभाग के सचिव को कई पत्र लिख चुके थे। उर्वरक की कालाबाजारी को रोकने के लिए उन्होंने नया कदम भी उठाया था। जिसमें राज्य के अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से उर्वरक की तस्करी की संभावना पर विशेष रुप से ध्यान देने की जरूरत बताई थी। इसके लिए निर्देश दिया था कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 10 किलोमीटर के भीतर खुदरा उर्वरक बिक्री केंद्र की अनुमति नहीं होगी साथ ही 50 किलोमीटर के भीतर उर्वरक के ठोक बिक्री केंद्र नहीं होगा। किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्राइवेट उर्वरक कंपनियों के आवंटन 15% इफको के द्वारा आपूर्ति 25% यूरिया डीएपी पोटाश सभी कंपनियों के द्वारा अन्य सामग्री जैसे सल्फर जिंक जॉइम का ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा था।

सुखाड़ को देखते हुए अकास्मिक फसल योजना के तहत वितरित किए गए बीज का विवरण कितनी मात्रा में प्रमाणित और अन्य बीज का हुआ है इसका भी लेखा-जोखा उन्होंने सचिव से मांगा था। रेक प्वाइंट से लेखर खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के गोदाम तक इंड टू इंड उर्वरक पहुंचाने का निर्देश दिया था। यही नहीं साल 2006 में समाप्त हुए बिहार राज्य कृषि उत्पादन बाजार समिति को पुनर्जीवित करने के लिए पूर्व मंत्री ने 14 सितंबर 2022 को ही पत्र लिखा था। पूर्व कृषि मंत्री ने बताया कि मंत्री पद का पदभार ग्रहण करने के बाद मैंने कृषि विभाग के सभी संभागीय विभागों की समीक्षा बैठक किया। साथ ही कृषि रोडमैप के नाम पर पिछले दो पंचवर्षीय योजनाओं के भीतर खर्च में तीन लाख करोड़ की योजना काफी बारीकी से अध्ययन किया। तब की एनडीए की सरकार में कृषि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का मामला भी सुर्खियों में था जिसको लेकर मैंने कदम उठाया था। जांच की मांग किया था। ताकि सारा मामला बेनकाब हो जाए। लेकिन किसानों से जुड़ी मेरी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज बन कर रह गई लिहाजा मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा कि किसानों के सवाल पर लगातार में सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करता रहूंगा। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे देश में बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है जिस राज्य में महज 10 साल के भीतर किसानों की आमदनी दोगुनी करने उपज बढ़ाने के लिए तीन लाख करोड़ खर्च हुआ लेकिन इन 10 सालों में बिहार का अनाज उत्पादन एक लाख मीट्रिक टन घट गया। इसके पीछे की असल वजह भ्रष्टाचार है यही कारण है कि सरकार जांच से भाग रही है।

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