ब्रश, मंजन और टूथ पेस्ट नहीं…दातून से मिलेगी दांतो को मजबूती…

0
411

 

  • गांव देहात में आज भी कई लोग विशेष रूप से पुरानी पीढ़ी दातून का इस्तेमाल दांत साफ़ करने के लिए करते हुए मिल जायेंगे

नयी दिल्ली: आधुनिकता के इस दौर में भले ही आज समय बदल रहा है, लोग दांत साफ़ करने के लिए ब्रश, मंजन और टूथ पेस्ट का इस्तेमाल करने लगे हैं और विज्ञापनों के इस दौर में इनका बाजार बढ़ा है। शहर, कस्बे और गांव सब जगह ब्रश, मंजन और टूथ पेस्ट ने अपना पांव पसार लिया है। इसको लेकर तमाम तरह के भ्रमजाल बुना गया है। बावजूद इसके गांव देहात में आज भी कई लोग विशेष रूप से पुरानी पीढ़ी दतुवन का इस्तेमाल दांत साफ़ करने के लिए करते हुए मिल जायेंगे। इससे दांत मज़बूत भी रहते हैं व सेहतमंद भी।

 

क्या होता है दातून

दातून, जिसे अंग्रेजी भाषा में Teeth cleaning twig कहते हैं पेड़ की एक पतली टहनी से बना होता है। ये सदियों से गांव-देहात में दांत साफ करने के लिए प्रयोग होता आ रहा एक परम्परागत बुरुश है। दातून के लिए आप बहुत से पेड़ों की टहनियां उपयोग किये जाते रहे हैं और आज भी गांव देहात में किये जाते हैं।

इन पेड़ों का दातून होता है इस्तेमाल


नीम का दातून

नीम का दातून सबसे ज्यादा उपयोग किया जाना वाला दातून है, जिसका इस्तेमाल आज भी लोग करते हैं। दरअसल नीम की छाल में निम्बीन या मार्गोसीन नाम का यौगिक होता है साथ ही इसमें एक प्रकार का उड़नशील तेल भी पाया जाता है, जो इस दातून को सभी दातुनों से बेहतर बनाते हैं। नीम का दातून आपको मसूड़ों की सूजन, पायरिया (खून निकलना), दांतों में कीड़ा लगना, पीप आना, जलन, दांतों का टेढ़ा होना जैसे समस्याओं में आराम पहुंचाता है। नीमा का दातून करने से गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ शिशु को रोगों से दूर रखने में मदद मिलती है।

बबूल का दातून

आयुर्वेद की मानें तो बबूल का दातून कफनाशक, पित्तनाशक, व्रणरोषण, स्तम्भन, संकोचक, रक्तरोधक, कफध्न में काफी फायदेमंद माना जाता है। दरअसल बबूल के अन्दर एक प्रकार की गोंद होती है और इसमें मौजूद रस श्वेतप्रदर, शुक्र रोग, अतिसार, जैसे जटिल रोगों के साथ-साथ दांतों के असमय गिरने, हिलने, मसूड़ों से खून आने, मुंह के छालों को रोकने में प्रभावी पाया जाता है। इतना ही नहीं अगर महिलाएं बबूल के दातुन का नियमित रूप से इस्तेमाल करती हैं तो उन्हें बांझपन एवं गर्भपात का खतरा बहुत कम हो जाता है।

अर्जुन का दातून

अर्जुन के दातून में क्रिस्टलाइन तत्व, अर्जुनेटिन, लेक्टोन और टैनिक से संपन्न होता है और ये ब्लड प्यूरीफायर से लेकर हृदय रोगों में लाभप्रद माना जाता है। अगर आप नियमित रूप से इसकी ताजी टहनी से दातून करते हैं तो आपको हाई ब्लड प्रेशर, एन्जाइना, डायबिटीज, राजयक्ष्मा जैसी अनेक बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

महुआ का दातून

महुआ के दातून में माउरिनग्लाइाोसाइडल सैपोनिन नाम का तत्व पाया जाता है, जो वातपित्तशामक, नाड़ीबल्य, कफनिस्सारक, जैसे प्रभाव छोड़ता है। इतना ही नहीं इस दातून को करने से आप दांतों का हिलना, दांतों से रक्त आना, मुंह की कड़वाहट, मुंह और गला सूखने जैसे परेशानियों से बच सकते हैं। महुआ का दातून नियमपूर्वक करने से स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, मूत्रप्रदाह जैसी बीमारियां भी शान्त हो जाती है।


बरगद की दातून

बरगद के दातून में दस प्रतिशत तक टैनिक पाया जाता है, जो वेदनाहर, वणरोपण, शोथहर, आंखों को ज्योति देने वाला माना जाता है। इस दातून से निकलने वाला रस आपके मुंह को सभी प्रकार से सुरक्षित रखता है। इस दातून को नियमित रूप से करने पर आपको दांतों से जुड़ी कोई समस्या नहीं होती और साथ ही आप सांसों की दुर्गंध दूर होती है।

अमरूद का दातून

अमरूद के अलावा उसके पेड़ के पत्ते और लकड़ियां भी बेहद फायदेमंद होती हैं। आप चाहें तो दातुन के तौर पर अमरूद के पेड़ की लकड़ी इस्तेमाल कर सकती हैं। यही नहीं उसके पत्तों को पीस कर पेस्ट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। दातुन करने से दांतों की अच्छी एक्सरसाइज हो जाती है, जिससे वह मजबूत बने रहते हैं। इसके अलावा लकड़ियों का रस शरीर को कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है और मसूड़ों को भी स्वस्थ रखता है।

 

आम का दातून

व्रत में अक्सर महिलाएं आम के पेड़ की लकड़ियां दांतों की सफाई करती हैं। आम को शुद्ध माना गया है, लेकिन इसके अलावा यह औषधीय गुणों से भी भरपूर है। मसुड़ों से खून निकलने की समस्या है तो आम के पेड़ की लकड़ियों से दातुन करना फायदेमंद हो सकता है। लकड़ियों से निकलने वाला जूस में एंटी इंफ्लामेटरी, वजन बढ़ने की समस्या, हेल्दी स्किन आदि जैसी चीजों के लिए बेहतर माना जाता है।

जामुन का दातून

जामुन के पत्ते और फल दोनों ही डायबिटीज के मरीजों को खाने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसकी लकड़ियों का इस्तेमाल दातुन के तौर पर किया जा सकता है। दातुन करते वक्त इसके रस को पिएं और फिर ब्रश करें। शुगर को कंट्रोल करने के लिए जामुन के पेड़ की लकड़ियों से दातुन करना फायदेमंद रहेगा। नीम के पेड़ की लकड़ी और जामुन के पेड़ की लकड़ी दोनों एक समान ही फायदा पहुंचाती हैं।

नींबू का दातून

दातुन के लिए नींबू के पेड़ की लकड़ियां अधिक मोटी नहीं होती हैं, लेकिन इससे दांतों की सफाई अच्छी होती है। कील मुंहासे से राहत पाने के लिए नींबू के पेड़ की लकड़ियों से दातुन करना फायदेमंद हो सकता है। दातुन करते वक्त इसमें रस निकलता है, जिसे पीने से पेट साफ रहता है और कील मुंहांसे की समस्या भी खत्म होती है। नींबू ही नहीं बल्कि उसके पेड़ भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।

बेर का दातून

बेर नियमित फल देने वाला पेड़ है, और इसे कई अलग-अलग चीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही नहीं इसके पेड़ की लकड़ियों को आप दातुन करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ग्रामीण इलाके में यह पेड़ आसानी से मिल जाता है। खास बात है कि दातुन करने का कोई नियमित समय नहीं होता। सेहतमंद दांतों के लिए आप दातुन सर्दी हो या गर्मी किसी भी मौसम में आसानी से किया जा सकता है।

सबसे बड़ी बात है कि दातुन न सिर्फ आपकी सेहत और बौद्धिक क्षमता के लिए बेहतर है बल्कि दातुन धर्म और अध्यात्म की दृष्टि से भी उत्तम बताया गया है। यही कारण है कि व्रत, त्योहार के दिन बहुत से लोग ब्रश की बजाय दातुन से दांत साफ करते हैं।

क्या है धार्मिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से दातुन का महत्व इसलिए बताया गया है कि क्योंकि दातुन जूठा नहीं होता जबकि टुथब्रश आप हर दिन नया नहीं प्रयोग करते। एक ही टूथब्रश को धोकर आप कई बार इस्तेमाल करते हैं। इससे ब्रश शुद्घ और पवित्र नहीं रह जाता है। इसलिए व्रत और त्योहार के दिन ब्रश करना शास्त्रों की दृष्टि से उचित नहीं है। जबकि आयुर्वेद के अनुसार दातुन करने का फायदा चौंकाने वाला है।

आर्युवेदिक रूप से भी लाभप्रद

आयुर्वेद में बताया गया है कि दातुन सिर्फ आपके दांतों को ही चमकाता नहीं है बल्कि यह आपकी बौद्धिक क्षमता और स्मरण शक्ति को भी बढ़ता है। जो लोग अपनी याद्दाश्त बढ़ाना चाहते हैं उन्हें अपामार्ग के दातुन से दांतों का साफ करना चाहिए। इससे बुध ग्रह का दोष भी दूर होता है।

मसूड़ों और दांतों की मजबूती के लिए बबूल के दातुन से दांत साफ करना बड़ा ही फायदेमंद होता है। बबूल शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करता है। इसलिए ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि शनि दोष से मुक्ति के लिए सुबह शाम बबूल के दातुन से दांत साफ करें।

 

आयुर्वेद में बताया गया है कि ‘निम्बश्च तिक्तके श्रेष्ठः’। नीम का दातुन दांतों को ही स्वस्थ नहीं रखता बल्कि इससे पाचन क्रिया और चेहरे पर भी निखार आता है। यही कारण है कि आज भी गांवों में बहुत से लोगों नियमित नीम की दातुन इस्तेमाल करते हैं।

आयुर्वेद में बताया गया है कि बेर के दातुन से नियमित दांत साफ करें तो आवज साफ और मधुर हो जाती है ‘बदर्या मधुरः स्वरः’। इसलिए जो लोग वाणी से संबंधित क्षेत्रों में करियर बनाने की सोच रहे हैं या इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। यानी अपनी आवाज का कैरियर के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते हैं उन्हें बेर के दातुन का नियमित इस्तेमाल करना चाहिए।

मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है कि ‘प्रक्षाल्य भक्षयेत् पूर्वं प्रक्षाल्यैव तु तत्त्यजेत’ यानी दातुन करने से पहले और दातून करने के बाद इसे पानी से धो लेना चाहिए। कारण यह है कि बिना धोए दातुन करने से दातुन पर बैठे हानिकारक कीटों से नुकसान हो सकता है। जबकि दातुन करने के बाद इसलिए धोकर फेंकना चाहिए क्योंकि सुबह मुख विषैला होता है इससे इस्तेमाल किए दातून के संपर्क में आने से दूसरे जीवों को नुकसान हो सकता है।

किसको कौन सा दातून इस्तेमाल करना है वो उपलब्धता और पसंद के हिसाब से तय करता है लेकिन जब आप दातुन से अपने दांतों को साफ करें तो इसे ब्रश की तरह इस्तेमाल ना करें, ऐसा करने से आपके मसूड़ों में चोट भी लग सकती है। इसलिए जब भी दातुन का इस्तेमाल करें, इसके ऊपर वाले हिस्से को अच्छी तरह चबाने के बाद ऊपर नीचे कर के दांतों को साफ करें। दातुन करते वक्त लकड़ियों से निकलने वाले रस को पी जाएं, यह नैचुरल होता है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here