
Chhattisgarh: कोंडागांव जिला प्रशासन के कृषि विभाग के मार्गदर्शन में 15 से अधिक गांवों के 50 से अधिक शिक्षित और प्रगतिशील किसानों ने जैविक खेती और नेचुरल ग्रीनहाउस की जानकारी दी जा रही है। किसान यहां के ‘मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म एवं रिसर्च सेंटर’ में जाकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है। और जैविक खेती की अत्याधुनिक तकनीकों वह प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग और कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को करीब से समझ रहे है।
किसानों ने ऑस्ट्रेलियाई टीक, साल, महुआ, आम, इमली और नारियल के पेड़ों पर उगाई गई काली मिर्च की खेती का निरीक्षण किया। उन्होंने इस पद्धति को देखकर कहा की यह कि पारंपरिक खेती से कहीं अधिक उत्पादकता और लाभ जैविक व मिश्रित खेती में है। खेतों के बीच में उगाई गई हल्दी की फसल और औषधीय पौधों में शामिल स्टीविया ने किसानों को सबसे अधिक सतर्क किया है। स्टीविया के बारे में दावा है कि यह चीनी से 25 गुना अधिक मीठी होने के साथ ही शुगर फ्री है।
मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने किसानों को खेती में बढ़ती लागत, जलवायु परिवर्तन, जहरीले केमिकल और जीएम बीजों से होने वाले खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आने वाला समय जहर मुक्त जैविक खेती का होगा। और यही खेती किसानों को आर्थिक व पर्यावरणीय स्थायित्व का बुनियाद बनेगी।
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उन्होंने अपने नए आविष्कार ‘नेचुरल ग्रीनहाउस’ के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह पारंपरिक पॉलीहाउस है। जिसकी सहायता से 20 गुना सस्ता और अधिक टिकाऊ भी है। इसकी लागत मात्र 2 लाख रुपये प्रति एकड़ है। जबकि पॉलीहाउस में यह खर्च 40 लाख रुपये प्रति एकड़ तक होता है। इस आविष्कार से किसानों को न सिर्फ अधिक उत्पादन मिलेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भी उनकी फसलें सुरक्षित रहेंगी।
इस आयोजन में निदेशक अनुराग त्रिपाठी, मिशन ब्लैक गोल्ड लीडर जसमती नेताम, मिशन लीडर बलई चक्रवर्ती और मिशन लीडर शंकर नाग ने भी इस कार्यक्रम भाग लिया। किसानों ने मौके पर जैविक खेती की आर्थिक संभावनाओं की जानकारी प्राप्त करके यह निश्चय किया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर इसी वर्ष बरसात से जैविक खेती की शुरुआत करेंगे। जैविक खेती की यह पहल कोंडागांव के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

