मुखिया जी के भ्रष्टाचार पर निगरानी की टेढ़ी नजर, एक और मुखिया दबोचे गए

आलोक रंजन
पटना: मुखिया और भ्रष्टाचार का पुराना नाता है। समय-समय पर मुखिया जी के भ्रष्टाचार के किस्से गूंजते रहते हैं। यही किस्से जब दिल्ली तक पहुंचे तो एक नेता को कहना पड़ा भले गांव न बदला लेकिन मुखिया जी बोलेरो पर आ गए। लेकिन मुखिया जी के गांव—गिरांव में कराये गये काम से उगाही की खबरें या तो गांव वालों को पता होती थी या प्रखंड मुख्यालय में इस काम में मिलीभगत रखने वाले अधिकारियों को। कभी कभार ये खबरे जिला मुख्यालय तक भी पहुंच जाया करती होंगी। लेकिन अब मुखिया जी के भ्रष्टाचार के किस्से इन सरहदों को पार करते हुए राजधानी तक पहुंचने लगी हैं और उनके गिरफतारी के किस्से भी आम हो चुके हैं और निगरानी की टेढ़ी नजर मुखिया जी की टेढ़ी चाल पर भारी पड़ती दिख रही है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है पश्चिमी चंपारण जिले के पिपरासी पंचायत का। बगहा में मुराडीह पंचायत के मुखिया नरिसिंह बैठा घूसखोरी के आरोप में निगरानी टीम के हत्थे चढ़ गए।

सिम्बोलिक तस्वीर

हुआ यूं कि मुखिया जी ने अपने पंचायत के एक इलाके में गली और नाला बनाया । जैसा कि आमतौर पर होता है कि ऐसे कामों का ठेका दे दिया जाता है तो इस मामले में भी करीब 3 लाख से अधिक रुपए का इसका ठेका हुआ। जब काम खत्म हुआ तो मुखिया जी ने ठेके के एवज में भुगतान करने के बजाय वार्ड सदस्य से 21 हजार रुपए रिश्वत के रूप में डिमांड कर दी! हालाकि मामला16 हजार रुपए पर सेट हो गया था। लेकिन इस बीच इस घूसखोरी की शिकायत पटना स्थित निगरनी अन्वेषण ब्यूरो के मुख्यालय में मुराडीह गांव के रहने वाले नंदलाल कोहरा ने कर दी। फिर क्या था, डीएसपी सर्वेश कुमार सिंह को अपनी टीम के साथ पटना से भेज दिया गया और फिर सोमवार को 16 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ मुखिया जी को पकड़ लिया गया।


निगरानी की एसपी वीणा कुमारी का कहना है कि मुखिया के खिलाफ मिले शिकायत की जांच कराई गई थी। जांच में मामला सही साबित हुआ पिपरासी पंचायत सचिव के कार्यालय से रंगे हाथ मुखिया नरसिंह बैठो 16 हजार रुपए लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। पूछताछ के बाद मुजफ्फरपुर स्थित निगरानी कोर्ट में उसे पेश किया गया।

ऐसा भी नहीं है कि निगरानी के हत्थे चढ़े ये पहले मुखिया जी है। इसके पहले भी इसी वर्ष फरवरी माह में निगरानी टीम ने ट्रैप बिछाकर भोजपुर जिले के पंचायत के मुखिया और लोजपा नेता संजय कुमार सिंह को घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा था। उस मामले में भी शिकायत मिली थी​ कि मुखिया संजय कुमार सिंह घूंस मांग रहे हैं। शिकायत के बाद निगरानी की टीम ने ट्रैप बिछाया और मुखिया जी सात निश्चय योजना में 63 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ दबोच लिए गए। उस मामले में भी जांच का काम निगरानी डीएसपी सर्वेश कुमार सिंह को ही सौंपा गया था। शिकायत कर्ता थी इस बाबा शाहपुर प्रंखड के सरना पंचायत के वार्ड संख्या- आठ की वार्ड सदस्या फुलसुन्दरी देवी ने। उनकी शिकायत थी कि पंचायत के मुखिया संजय मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में 40 फीसदी कमीशन मांग रहे है। इसके बाद निगरानी की टीम ने उन्हें रंगे हाथो गिरफ्तार किया। इसके पहले भी दिसंबर माह में समस्तीपुर जिले में पटोरी अनुमंडल के शिउरा पंचायत के मुखिया को निगरानी ने गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी शिकायत की गई थी।

समस्तीपुर जिले के पटोरी अनुमंडल के शिउरा पंचायत के मुखिया जवाहर चौधरी की पंचायत में 1 लाख 31, हज़ार 400, सौ रुपये कि लागत से विभिन्न विकास कि कार्य पंचायत में पूरा किया गया था, लेकिन मुखिया जी का 35 फीसदी कमीशन को लेकर अड़े हुए थे। ऐसे में वार्ड सचिव वार्ड सचिव अनिल कुमार सिंह निगरानी विभाग को सूचित कर दिया और मुखिया जी को पटोरी इंडियन बैंक शाखा के पास 1.16 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ़्तार कर अपने साथ ले गई।
इस तरह से मुखिया जी तो अपने कमीशन खोरी की आदत से बाज आने से रहे लेकिन निगरानी की निगरानी में शायद मुखिया जी पर दबाव बने।

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