संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली:मानसून आ गया है। झूम—झूम के बदरा बरसने की संभावना है। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान है। किसान अपने खेत की ओर निहार रहा है। मेड़ बांधने की तैयारी है। फसल लहलहायेगी। इतना ही महानगरों में भी लोगों ने छतरियां निकाल ली हैं। जल जमाव के आशंका से नाले की सफाई का काम तेजी पर है।
जी हां,मानसून ने केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर के चार राज्यों नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार दस्तक दे दी है। दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली में भी दो दिन बारिश की संभावना है। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। बड़ी बात यह है कि इस बार यह समय से दो दिन पहले दस्तक दी है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के डायरेक्टर जनरल केजे रमेश की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस बार मॉनसून ने केरल के अलावा उत्तर पूर्व में भी समय से पहले दस्तक दी है। समय पर मॉनसून आने के चलते किसान काफी खुश हैं। सोमवार को भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बयान जारी कर कहा था कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून मंगलवार को केरल में दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी सच साबित हुई है। आईएमडी के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में मोरा के आगे बढ़ने की वजह से दूरदराज के पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश हुई है। केरल में बीते दो दिनों से भारी बारिश हो रही है और अब मानसून के पहुंचने से इसके आगे भी जारी रहने के आसार हैं। आईएमडी ने बताया कि मंगलवार को ही मानसून बांग्लादेश और म्यांमार भी पहुंचा। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में यह बीते 14 मई को ही अपने निर्धारित समय से तीन दिन पहले पहुंच गया था।
समय पूर्व मानसून,मोरा की मेहरबानी
बंगाल की खाड़ी पर बने चक्रवाती तूफान मोरा कोलकाता के दक्षिण-दक्षिण पूर्व 660 किलोमीटर पर स्थित था और मंगलवार को वह बांग्लादेश का चटगांव पार कर जाएगा। चक्रवाती तूफान मोरा के कारण केरल और पूवरेत्तर राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून तय तिथि से दो दिन पहले ही आ गया है। इस साल मानसून सामान्य रहने के आसार हैं। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने मंगलवार को बताया कि आज बांग्लादेश के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान मोरा ने तबाही मचाई है। इसके चलते भारत में मानसून समय से पहले आ गया है। भारत के साथ मानसून ने पड़ोसी देशों बांग्लादेश और म्यामांर में भी दस्तक दी है। श्रीलंका में विगत 20 मई को ही मानसून आ चुका है। वहां बेहद तेज बारिश के कारण अब तक 200 लोगों के मारे जाने की खबर है।
खेती को होगा लाभ
इससे देश की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को बढ़त मिलेगी। भारत में मानसून समय से पहले आ गया है। गौरतलब है कि देश के 50 फीसद से अधिक किसान कृषि के लिए मानसूनी बरसात पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे में मानसून के जल्द आने से उन्हें खासी राहत मिलेगी। विशेष रूप से सूखा ग्रस्त राज्यों के किसानों के लिए मानसून का आना बेहद सुखद है। 1बताया जाता है कि देश की दो खरब की अर्थव्यवस्था में 15 फीसद हिस्सा कृषि से जुड़ा है, जो कि मानसून बरसात पर आश्रित है। देश के आधे से अधिक लोग (करीब 1.3 अरब लोग) कृषि आधारित रोजगार से ही जुड़े हैं।
