डुमरांव में समाप्त होगी पेयजल किल्लत..पानी टंंकी का हो रहा निर्माण

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पंचायत खबर टोली

  • सांसद आदर्श गांव डुमरांव में 5 लाख लीटर की टंकी निर्माण का काम अंतिम दौर में
  • महाकवि की धरोहरों को संजोये जाने के इंतजार में ग्रामीण

 मऊ : वीररसावतार श्याम नरायन पांडेय के गांव डुमरांव से अच्छी खबर है। वैसे तो इस गांव को आदर्श गांव के रूप में गोद लिये जाने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव का कायाकल्प होगा। लेकिन धीरे—धीरे नाउम्मीद होते गांव वालों के लिए पानी की टंकी उम्मीद की किरण लेकर आयी है।  गांव को आदर्श गांव के रूप में गोद लेने के बाद पहली बार कुछ सार्थक होता नजर आ रहा है। नए ग्राम प्रशासन की तत्परता और सांसद की स्वीकृति से 2.5 लाख लीटर की पेयजल टंकी निर्माणाधीन है। अगले सीजन तक सप्लाई देने की प्रतिबद्धता के साथ कार्य जोरों से जारी है। इस टंकी के कार्यरत होते ही लगभग आधी आबादी की पेयजल समस्या का स्थाई निदान हो जाएगा।

महाकवी की धरोहरों के संरक्षण काम बाकी

इस बीच  महाकवि की धरोहरों को संरक्षित होना अभी शेष है। आदर्श गांव का रूप देने को तत्पर प्रधान ने टंकी निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के साथ आगामी कार्ययोजना में पंडित जी की स्मृतियों का संजोने की संकल्पना के साथ पुस्तकालय केंद्र स्थापित करने पर बल दिया है।

क्या कहती हैं ग्राम प्रधान

ग्राम प्रधान पुनीता सिंह कहती हैं कि सांसद हरिनरायन राजभर के सहयोग से सांसद आदर्श ग्राम पेयजल योजना के तहत पूर्वी टोला में इन दिनों 2.5 लाख लीटर क्षमता की पेयजल टंकी निर्माणाधीन है। लगभग दो करोड़ रुपये वाली इस परियोजना को पूर्ण कर मुहल्लों में पेयजल सप्लाई करने में वर्ष भर का समय अभी लग सकता है। जल निगम द्वारा निर्मित इस टंकी का निर्माण होते ही तीन मुहल्लों में पेयजल की समस्या स्थाई रूप से समाप्त हो जाएगी। निर्माण कार्य की प्रगति संतोषजनक है। इस बीच पंडित जी की स्मृति में विश्राम स्थल व पुस्तकालय-वाचनालय स्थापित करने परियोजना तैयार हो गई है। अगले वित्तीय वर्ष से पहले इसे पूर्ण कर लिया जाएगा। शासन से सहयोग प्राप्त होने की दशा में पंडित जी स्मृतियों को सहेजने का कार्य भी किया जाएगा।

क्या कहते हैं ग्रामीण

स्थानीय निवासी दीपक सिंह, बृजेश सिंह, फतेह बहादुर सिंह, डब्बू पांडेय, भानू प्रताप पांडेय, मनोज सिंह आदि बताते हैं कि आदर्श गांव घोषित होने के बाद गांव में विकास की आस जगी लेकिन अब ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। हिंदी साहित्य को अमर कृति देने वाले रचनाकार की स्मृतियों को भी न सहेज पाना दुखद है।

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