प्याज की कीमतों पर हो नियंत्रण, राज्य लगायें स्टॉक लिमिट : पासवान

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पंचायत खबर टोली

  • प्याज का उत्पादन घटने की आशंका में दाम में लगातार तेजी, जागी केंद्र सरकार

नई दिल्ली: टमाटर और प्याज समय—समय पर लाल होते रहते हैं और आपको प्याज के आंसू रोना पड़ता है। इनके लाली की आंच जनता पर न पड़े और प्याज के आंसू न रोना परे इसके लिए सरकार ने कदम उठाया है। यानी प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार थोड़ा सख्त दिख रही है। कोशिश हो रही है इसके नियंत्रण की। इसलिए इसकी जमाखोरी को रोकने और इसकी कीमत में आगे और तेजी को रोकने के लिए राज्य सरकारों से प्याज के व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा तय करने को कहा है। जिससे इसकी जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर रोक लग सके और अनावश्यक रूप से इसकी कीमत में बढ़ोतरी को रोका जा सके।

खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने इस बाबत एक ट्वीट किया है। जिसमें कहा गया है कि मंत्रालय की तरफ से एक पत्र राज्य सरकारों को भेजा गया है जो आवश्यक जिंस कानून के तहत प्याज व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्यों को प्याज के व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लगाने का अधिकार है।

बढ़ती कीमत पर लगेगी लगाम

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुदरा कीमत साल भर पहले के 22 रुपये किलो से बढ़कर अब 38 रुपये किलो हो गया है। पुराने स्टॉक के कम होने तथा इस वर्ष खरीफ बुवाई का रकबा 20 से 30 प्रतिशत कम रहने की वजह से उत्पादन कम रहने की चिंताओं के कारण पिछले कुछ सप्ताह से प्याज की कीमतों में तेजी आई है।

जानकारों की माने तो  सरकार प्याज पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) लागू करके इसके निर्यात पर पाबंदी लगाने पर भी विचार कर रही है ताकि घरेलू बाजार में इसकी सुलभता बढ़ाई जा सके।

वाणिज्य मंत्रालय को भी लिखा पत्र 

रामविलास पासवान ने वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर प्याज पर 450 डॉलर प्रति टन एमईपी लगाने का आग्रह किया है। उन्होंने कारोबारियों को प्याज के निर्यात पर दिये जा रहे इंसेंटिव वापस लेने को भी कहा है। निर्यात पर अंकुश लगने से घरेलू बाजार में सप्लाई सुधरेगी और मूल्य में कमी आएगी।

एमईपी लगाने की तैयारी

सचिवों की समिति ने भी एमईपी लगाने की वकालत की है। जल्दी ही इस बारे में निर्णय हो सकता है। सरकार ने 2015 में प्याज पर एमईपी हटा दिया था। एमईपी लागू होने के बाद निर्यात इससे कम मूल्य पर निर्यात नहीं कर सकेंगे। पिछले वित्त वर्ष में भारत से 34.94 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया।

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