दशहरा पर्व की तिथि, पूजा विधि, रावण दहन का मुहूर्त समेत कई जानकारियां…

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Dussehra Puja Vidhi, Muhurat:  आज दशहरा है और यह पर्व हर वर्ष शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ दशमी तिथि को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इस पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध करते हुए विजय हासिल की थी। जिस कारण से इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। दशहरे पर देशभर में कई जगहों पर रावण का दहन किया जाता है। इसके अलावा विजयादशमी पर शस्त्रों की पूजा भी होती है।

शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने के बाद दशमी तिथि को दशहरे पर पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 12 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 57 मिनट से शुरू हो रही है और इसका समापन 13 अक्तूबर को सुबह 09 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में दशहरा पर्व 12 अक्तूबर को ही है।

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दीपक जलाने से जुड़ी कुछ मान्यताएं
दशहरे पर सभी दिशाओं में दीपक लगाने चाहिए। घर में 10 दीये जला सकते हैं। ध्यान रहे यह दीये सरसों के तेल के ही होने चाहिए। साथ ही हिंदू धर्म के पूजनीय पौधों जैसे तुलसी, पीपल, शमी, बरगद और केले के पेड़ पर 5 दीपक जलाएं। दशहरा पर भगवान राम की भी पूजा की जाती है। उनके लिए घर पर एक घी का दीपक भी जलाना चाहिए।

रावण दहन का शुभ मुहूर्त
विजयादशमी पर रावण दहन प्रदोष काल ( सूर्यास्त के बाद का समय) में करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में 12 अक्तूबर को रावण दहन के लिए शुभ मुहूर्त का समय शाम 5 बजकर 52 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 26 तक रहेगा।

दशहरा शुभ योग
12 अक्तूबर को दशहरा पर सर्वार्थसिद्धि, रवियोग और श्रवण नक्षत्र बन रहा है। दशहरा पर इन तीन शुभ योग बनने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। सर्वार्थसिद्धि योग सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 13 अक्तूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 13 अक्तूबर को सुबह 06 बजकर 21 तक रहेगा।

क्यों मनाया जाता है दशहरा
दशहरा का त्योहार असत्य पर सत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन 10 दिन से चलने वाले युद्ध में मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया था और भगवान राम ने रावण का अंत करके लंका पर विजय प्राप्त की थी। इस वजह से इस दिन शस्त्र पूजा, दुर्गा पूजा, राम पूजा और शमी पूजा का महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो कार्य शुरू किया जाता है उसमें जीत अवश्य मिलती है।

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