मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी हुई कम, पुरूष कामगारों को मिली तवज्जो

पंचायत खबर टोली
नयी दिल्ली: कोरोना महामारी के दौरान अक्सर ये खबरें आ रही थीं कि जो प्रवासी मजदूर शहर से गांव की ओर लौटें हैं उन्हें सरकार के मनरेगा योजना के तहत रोजगार दिया जा रहा है ताकि वे गांव में रह सकें, जीविको पार्जन कर सकें और परिवार चला सकें। इस दौरान मनरेगा योजना के अंतर्गत कामकाज बढ़ने और रोजगार दिये जाने की खबरें भी आईं। लेकिन इस बीच मनरेगा के पोर्टल पर जो जानकारी साझा की गई है वह निश्चित रूप से चौकाने वाले हैं।

इस दौरान जो आंकड़े सामने आये हैं उससे पता चलता है कि कोविद के प्रकोप के कारण, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के तहत सृजित कार्य के कुल व्यक्ति-दिवस में महिलाओं की हिस्सेदारी इस वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों के दौरान, आठ साल के निचले स्तर यानी 52.46 प्रतिशत पर आ गई है। पोर्टल पर 24 अगस्त तक जो आंकड़े दिए गए हैं उसके विश्लेषण से पता चलता है कि महिलाओं की हिस्सेदारी 2013-14 (52.82 प्रतिशत) के बाद से सबसे कम है। 2016 में 56.16 प्रतिशत रहा। वहीं पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष महिलाओं के लिए रोजगार दिवस के सृजन में 2.24 प्रतिशत अंकों की गिरावट आयी है। उल्लेखनीय है कि लगभग 13.34 करोड़ सक्रिय मनरेगा श्रमिक हैं कार्यकर्ता हैं जिनमें से 6.58 करोड़ यानी 49 प्रतिशत महिलाएं हैं।

प्रधान दिलीप त्रिपाठी, ग्राम पंचायत हसुडी औसान पुर, सिदार्थ नगर, उत्तर प्रदेश..मनरेगा का काम करते मजदूर

हालाकि पोर्टल पर महिला मजदूरों की संख्या में आई गिरावट का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है बावजूद इसके विभाग से जुड़े सूत्र ये बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के लौटने के कारण जिसमें पुरूषों की संख्या अच्छी खासी है। श्रमिक के रूप में पुरूषों की उपलब्धता के कारण महिला श्रमिकों की स्थिति कमजोर हुई है।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि मौजूदा वर्ष के दौरान 280.72 करोड़ रोजगार दिवस सृजित करने का लक्ष्य था, उसके बदले 183 करोड़ से अधिक रोजगार दिवस का सृजन पहले ही किया जा चुका है। यह साफ तौर ग्रामीण भारत की चुनौतियों की ओर इंगित करता है।
कुल मिलाकर, 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस वित्तीय वर्ष के दौरान मनरेगा महिलाओं श्रमिकों की कुल हिस्सेदारी में गिरावट देखी है, जबकि 14 राज्यों में मामूली वृद्धि भी देखी गई है।

जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी में गिरावट का राष्ट्रीय औसत 2.24 प्रतिशत रहा। वहीं , आंध्र प्रदेश में सबसे तेज गिरावट यानी 3.58 रहा। पिछले साल 60.05 से 56.47 तक दर्ज किया गया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल (3.32), तेलंगाना (2.62) और हिमाचल प्रदेश (2.44) रहा।
छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मेघालय, तमिलनाडु, उत्तराखंड, सिक्किम, बिहार, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, अंडमान और निकोबार द्वीप अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं जिनमें गिरावट देखी गई है।

प्रधान दिलीप त्रिपाठी, ग्राम पंचायत हसुडी औसान पुर, सिदार्थ नगर, उत्तर प्रदेश..मनरेगा में काम करते मजदूर।

महिला मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी में बढ़ोतरी
जिन राज्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी में वृद्धि देखी गई है उनमें मिजोरम, मध्य प्रदेश, मणिपुर, गुजरात, केरल, ओडिशा, महाराष्ट्र, नागालैंड, असम, कर्नाटक, पुदुचेरी, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा हैं। वहीं केरल में चालू वर्ष के दौरान महिलाओं की संख्या में सबसे अधिक (91.38 प्रतिशत) हिस्सेदारी है, इसके बाद पुडुचेरी (87), तमिलनाडु (84.82), गोवा (75.75), राजस्थान (65.35) और हिमाचल प्रदेश (60.31) का स्थान है।
जबकि जम्मू व कश्मीर में महिलाओं की सबसे कम भागीदारी यानी 30.72 प्रतिशत है, उसके बाद यूपी (33), नागालैंड (36), अरुणाचल प्रदेश (40), झारखंड (40.77) और मध्य प्रदेश (41) हैं।
इनपुट: इंडियन एक्सप्रेस

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