अमितेश सिंह
आम में मोजर आने लगे हैं, कहीं—कहीं टिकोड़े भी दिखने लगे हैं। किसान मोजर देखकर लहालोट हो रहे हैं कि इस बार फसल बंपर होगी,अच्छी आमदनी होगी। उनके मन में शंका भी है कि कहीं फसल बर्बाद न हो जाये,टिकोड़े झड़ न जाये। कोई कीड़ा न लग जाये। किसानों की इस चिंता से कृषि वैज्ञानिक भी चिंतित हैं तभी तो कृषि विज्ञान केन्द्र, पीजी कालेज, गाजीपुर के चेयरमैन राजेश्वर प्रसाद सिंह के दिशा निर्देशन में केन्द्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ आरपी सिंह ने गाजीपुर जनपद के किसानों को अधिक आम उत्पादन हेतु सजग रहने को कहा है। उनका सुझाव है कि दिन-प्रतिदिन मौसम में बदलाव को देखते हुए आम की फसल में रोग एवं कीटों के लगने की सम्भावना बढ़ गयी है।
रोग की हो पहचान, तब होगा निदान
आम की फसल में लगने वाले रोगों में खर्रा या दहिया रोग ऐन्थ्रेक्नोज रोग, गुम्मा रोग व कोयलिया रोग प्रमुख हैं। दहिया रोग का प्रकोप मौसम में बदली होने पर पत्तियों, बौर व फलों पर सफेद चूर्ण जम जाता है, इससे प्रभावित भाग सूख जाता है। इस रोग के नियंत्रण के लिए विलयनशील गंधक 2 ग्राम/लीटर पानी से प्रथम छिड़काव बौर निकलने के तुरन्त बाद करना चाहिए। दूसरा छिड़काव 10-15 दिनों बाद ट्राइडीमार्फ 1 मिली0/लीटर पानी की दर से करना चाहिए तथा तीसरा छिड़काव आवश्यकतानुसार ट्राईडेमेफान 1 मिली0/लीटर पानी की दर से करना चाहिए। मौसम में बदलाव की वजह से ही एन्थ्रेक्नोज रोग के लक्षण पत्तियों एवं बौर पर गोल, भूरे धब्बे के रूप में दिखायी देते हैं, जिससे फूलों का झड़ना व मुरझाना तथा टहनियों का सूखना शुरू हो जाता है। इस रोग के नियंत्रण के लिए टॉपसीन-एम या कार्बेण्डाजीम एक ग्राम/लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। पुष्पीय गुम्मारोग के विकार से ग्रस्त बौर में फल नहीं बनते हैं। बौर फूलों के हरे घने गुच्छे के रूप में दिखायी देते हैं जो पेड़ों पर काफी लम्बे समय तक लगा रहता है, इसके नियंत्रण के लिए प्रभावित बौर को तोड़कर नष्ट कर दें तथा प्लैनोफिक्स की 1 मिली लीटर 3-4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। कोयलिया रोग से बचाव हेतु बौर में फल लगने के बाद बोरेक्स या कास्टिक सोडा 10 ग्राम/लीटर पानी की दर से प्रथम छिड़काव तथा 15 दिनों बाद दूसरा छिड़काव करना चाहिए। बौर में फल बैठने के पश्चात मटर/कंचे के आकार के फल गिरने लगते हैं, इसकी रोकथाम के लिए प्लैनोफिक्स की 1 मिली लीटर /3-4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए।
आम की फसल में मौसम में बदलाव के कारण कीटों का भी प्रकोप होता है। आम में लगने वाले प्रमुख कीट, जैसे-भुनगा, गुझिया व पुष्प्प गुच्छ (गालमिज) कीट हैं। आम के भुनगा कीट व गुझिया कीट के शीशु तथा प्रौढ़ दोनों पत्तियों एवं फूलों का रस चूसते हैं, जिससे फूल सुखकर गिर जाते हैं। ये कीट एक प्रकार का मीठा रस विसर्जित करता है, जिससे पेड़ों, पत्तियों, प्ररोहों, फूलों आदि पर लग जाता है, जिसके कारण उसके उपर काले रंग की फफूद उग आती है, तथा उत्पादन प्रभावित हेाता है। इस कीट के नियंत्रण हेतु आम में फूल खिलने से पहले इमीडाक्लोप्रिड की 3 मिली0/8 लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। दूसरा छिड़काव प्रोफेनेफास 1 मिली0/लीटर पानी की दर से करें, जब फल मटर के दाने के बराबर हो जायें। तीसरा छिड़काव आवश्यकतानुसार क्वीनालफास 2 मिली0/लीटर पानी की दर से करना चाहिए। ध्यान रहे आम के बौर में जब फूल खिल रहे हों उस समय किसान भाई कीटनाशकों का छिड़काव न करें।
इन बातों का रखे ध्यान
- सिन्थेटिक पाईरथ्राइड जैसे-साइपर मेथ्रिन, डेल्टामेथ्रिन, फेनवलरेट आदि को भुनगे की रोकथाम हेतु प्रयोग न करें, इससे परागण करने वाले कीट नष्ट हो जाते हैं।
- जब फूल खिल गये गये हों तो किसी भी दवा का छिडकाव न करें।
- कोपर आक्सीक्लोराईड को अन्य दवाओं के साथ न मिलायें।
- प्रत्येक छिड़काव में दवा बदलकर प्रयोग करें, जिससे कीटों में प्रतिरोधक क्षमता का विकास न हो।
- अच्छी गुणवत्ता वाले कीटनाशी व फफूदनाशी का प्रयोग करें।
- दवा के घोल में तरल साबुन (टी-पाल) अवश्य मिलायें।
- दवा का छिड़काव फब्बारे के रूप में करें तथा सही सान्द्रता का प्रयोग करें।



