प्रशांत भारद्वाज
पटना यूनिवर्सिटी से ग्रामीण विकास प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब मैं अपने गाँव में डेयरी प्रोजेक्ट की शरुआत करना चाहता हूँ ,जिसके लिये आज मैं बिहार के सबसे बड़े डेयरी फार्म महुआ डेयरी के चेयरमैन से मिला जो ,अपने मेहनत के बल पर मात्र दो साल में आज बिहार का सबसे बड़ा डेयरी फार्म खड़ा कर दिए हैं।
जिनका नाम जवाहर लाल जी है,इन्होंने 2014 में महुआ कॉपरेटिव सोसाइटी ,राज्य स्तर पर पंजीयन कराया ,तकरीबन 10 जिलों में महुआ कॉपरेटिव बैंक अभी काम कर रही हैं, इसके थ्रू इन्होंने कॉपरेटिव मेंबर जोड़े ,और 10 करोड़ के लागत से डेयरी प्रोजेक्ट का शुरूआत मुजफ्फरपुर के पोखरा ग्राम में 17 एकड़ जमीन लीज पर लेकर आंरभ किया ,पूंजीगत स्रोत के रूप में ये अपने मेंबर को शेयर के तौर पर अंशपत्र बेचे ,जिनसे इन्हें डेयरी प्रोजेक्ट शुरू करने में आर्थिक सहयोग मिल गया और मेंबर को प्रॉफिट पर उनके पूंजी निवेश के आधार पर लाभांश देने का शपथ पत्र दिया।
अभी वर्तमान में जवाहर लाल जी के महुआ डेयरी फॉर्म में 300 से ऊपर दूध देने वाली उन्नत नश्ल की H F गायें है, जो प्रतिदिन औसत 20 से 25 लीटर दूध देती है ,और उनके फार्म से औसतन 4000 लीटर दूध प्रति दिन मुजफ्फरपुर के आस -पास के जिलों में बिक्री होती हैं,
आश्चर्य की बात ये है की उनके फार्म में गाय पालन के साथ -साथ गायों के वेस्टेज यानि गोबर और गोमूत्र से वर्मी कम्पोस्ट खाद भी तैयार कर बाजार में महुआ वर्मी कम्पोस्ट खाद के नाम से 50 kg के पैकेट बना कर बाजार में बेचा जा रहा है,जिससे उन्हें आम का आम और गुठली का दाम भी निकल जा रहा हैं।
सब कुछ शेयर कर पाना मुश्किल है ,लेकिन जो उनसे आज हमारी बात हुई उनसे जानकारी प्राप्त यही हुआ की उनका विज़न राष्टीय डेयरी अनुसंधान केंद्र करनाल हरियाणा की तरह रिसर्च सेंटर बनाना है , जो उस दिशा में सारे मापदंड को पार करने के लगभग करीब है ,उनके कथनानुसार महुआ डेयरी जैसा पुरे हिन्दुस्तान में इतना बड़ा कमर्शियल डेयरी फार्म वर्तमान में नहीं है, राज्य सरकार और नाबार्ड की तरफ से भी अब इन्हें राज्यस्तरीय कॉपरेटिव की मान्यता मिल गयी हैं।
इनका डेयरी फार्म में अभी मुर्गी पालन , बत्तख पालन , और मछली पालन भी साथ -साथ हो रही है। और इस सब की देखभाल के लिए डेयरी में 1 स्थायी पशु चिकित्सक , दवा स्टोर रूम , 1 सुपरवाइज़र, और तकरीबन 40 मजदूर कार्यरत हैं ,बिजली उत्पादन पूरी तरह से बायोगैस सयंत्र से होता है ,जो पुरे फार्म को बिजली उपलब्ध कराता है।
(प्रशांत भारद्वाज ने पटना विश्वविद्यालय से ग्रामीण विकास एवं प्रबंध में स्नातकोत्तर किया है। यह पोस्ट उनके एफबी प्रोफाईल से साभार है।)
