मां का दूध ही नवजातों का संपूर्ण आहार

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संतोष कुमार सिंह

नानी-दादी करे पुकार… मां का दूध संपूर्ण आहार।

लेकिन अब न ये बताने वाली दादी रही और न ही नानी..यहां तक की पड़ोस की चाची ने भी इस पर चर्चा करना छोड़ दिया है। तभी तो सरकार को ये बताने की जरूरत पड़ रही है कि मातायें अपने बच्चे को स्तनपान करायें। बच्चों के लिए मां का दूध जरूरी है। लेकिन यहीं ठहरकर यह समझा जाना चाहिए कि क्या माताओं को यह बताए जाने की जरूरत है कि उनके बच्चे के लिए मां का दूध कितना जरूरी है। आप सोच रहे होंगे ये कैसा सवाल है। इसमें बताने योग्य क्या है? लेकिन जब आप आंकड़े देखेंगे तो चौंक जाएंगे। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच होने वाले 80 फीसदी डिलिवरी के मामलों में मात्र 45 फीसदी बच्चों को जन्म के पहले घंटे में विशिष्ट स्तनपान कराया जाता हैं। केवल 65 फीसदी बच्चे ही जन्म के 6 माह तक मां के दूध पर पूरी तरह से निर्भर रहते हैं। एनएफएचएस की ताजा रपट के अनुसार, मां के दूध से संबंधित फायदों के बावजूद कई भारतीय महिलाएं शिशु के चार माह के होते-होते खुद-ब-खुद स्तनपान कराना छोड़ देती हैं।

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खुद केंद्रीय परिवार एवं समाज कल्याण मंत्री जेपी नड्डा कहते हैं,कि गांव और शहरों में स्तन पान को लेकर जागरूकता फैलानी पड़ रही है। पढ़ी-लिखी मां हो या अनपढ़ उन्हें पता ही नहीं है कि नवजात को मां का दूध पिलाने से कितने फायदे होते हैं। यह सिर्फ बयान मात्र नहीं है माता और शिशु के बीच वर्षो से चले आ रहे अंर्तनिहित संबंध का आईना है जो दरक रहा है और सरकार को उसमें हस्तक्षेप करने को मजबूर होना पर रहा है। माँ का दूध बच्चे के लिए अनमोल उपहार है। नवजात शिशु और बच्चे को पर्याप्त सुरक्षा, स्नेह तथा पोषण की आवश्यकता होती है। स्तनपान उन सभी को पूरा करता है। मां का दूध बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए पोषण का सबसे अच्छा स्रोत होता है तथा मां के दूध का कोई अन्य विकल्प नहीं है। इन्ही बातों पर आपका ध्यान दिलाने के लिए, माताओं द्वारा स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय परिवार एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने (मदर्स एब्ज़ोल्यूट अफेक्शन अर्थात माँ प्रोजेक्ट का लांच किया है। यूनिसेफ की सेलिब्रिटी अंबास्डर माधुरी दीक्षित इस कार्यक्रम की ब्रांड अंबास्डर है।

क्यों है जरूरी मां का दूध

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक माँ का पीला व गाढ़ा कोलोस्ट्रम वाला दूध नवजात शिशु के लिए एकदम सटीक आहार है। स्तनपान जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर शुरू किया जाना चाहिए। बच्चे को लगातार स्तनपान के साथ छह महीने की अवस्था तक स्तनपान कराने की सिफ़ारिश की जाती है। यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षित करता है। माँ के दूध में बच्चे के लिए आवश्यक प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और एंजाइम पर्याप्त मात्रा में होते है।

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स्तन-पान शिशुओं को तात्कालिक लाभ देने के अतिरिक्त उन्हें जीवन भर शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की क्षमता भी देता है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि विश्व स्वास्थय संगठन शिशु जन्म के प्रथम 6 महीनों तक केवल स्तन-पान को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करता है।

शिशु को छह महीने की अवस्था के बाद और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार दिया जाना चाहिए। यदि बच्चा ज़्यादा दूध पीता हैं तो स्तन में ज़्यादा दूध बनेगा। यदि बच्चा दूध पीना बंद कर देता है या बच्चा दूध नहीं पीता है, तो स्तन में दूध नहीं बनेगा। स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक बंधन को बढ़ाता है।

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