कॉरपोरेट पत्रकारिता और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच महीन रेखा : आनंद प्रधान

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अमितेश सिंह

गाजीपुर: “इतिहास लेखन और पत्रकारिता” विषय पर भारतीय जनसंचार संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर आनंद प्रधान ने गाजीपुर पीजी कॉलेज के टेरी सभागार में एक व्याख्यान दिया। अपने एकल व्याख्यान में प्रो प्रधान ने कहा कि इतिहास लेखन में पत्र पत्रिकाये अहम् भूमिका निभाती है।पत्रकारिता इतिहास का पहला ड्राफ्ट है, लेकिन ये ड्राफ्ट कितना पुष्ट है, ये मायने रखता है।इराक युद्ध को लेकर कई अखबारो ने तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया।यहाँ तक की न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे पेपर जिसने वाटरगेट कांड का खुलासा किया था ,उसने भी स्वीकार किया की ईराक युद्ध के दौरान उसने संतुलित रिपोर्टिंग नहीं की थी। वॉल्टर रिप मैन ने अपनी पुस्तक पब्लिक ओपिनियन में 1922 में कहा है की ” समाचार और सत्य एक ही चीझ नहीं है“।इस बयान के प्रकाश में देखे तो ईराक युद्ध में युद्ध के पहले और बाद की रिपोर्टिंग में पर तमाम प्रश्न खड़े होते है।कॉरपोरेट पत्रकारिता और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच महीन रेखा है।पत्रकरिता में सत्य के करीब पहुँचने की शैली ठीक एक इतिहासकार को तरह ही है।हिरोशिमा ,पर गिराये गए एटम बम की रिपोर्टिंग करते समय उस दौर के ज्यादातर अख़बारों ने परमाणु विघटन के दुष्प्रभाव का जिक्र नहीं किया। ज्यादातर अखबारो ने अमरीकी तकनीकी की गौरव गाथा लिखी और तथ्यों को मानवीय दृष्टि से नहीं देखा।वैज्ञानिक पद्धति से इतिहास लेखन और पत्रकारिता की जा सकती है।ऑब्जेक्टिविटी का सरोकार विज्ञान से है,और इसको पूर्णरूप से पत्रकारिता पर लागु नहीं किया जा सकता।

इतिहास लेखन की आत्मा जाँच पड़ताल के साथ तथ्यों को प्रस्तुत करने में बसती है। सत्य के पास पहुँचना जटिल प्रक्रिया है।JNU के बारे में मुख्य धारा के अखबारो ने पत्राकारिता के सिद्धान्तों के साथ समझौता किया। JNU के सन्दर्भ में एजेंडा सेटिंग थ्योरी को लागू करते हुए रिपोर्टिंग की गयी।अगर आज के घटनाओं के बारे में भविष्य में लिखा जायेगा और आज के अखबार मूल स्रोत हो तो किस तरह का इतिहास लिखा जायेगा ।क्या किसानो की आत्मा हत्या पर निष्पक्ष इतिहास लेखन संभव है?ये कैसे तय होगा की इतिहास का पहला ड्राफ्ट पत्रकारिता कितना सत्य परख सूचना उपलब्ध करा पाता है।उक्त मौके पर प्राचार्य हरिहर सिंह ने आनंद प्रधान का धन्यवाद ज्ञापन किया और कहा की भारतीय पत्रकारिता में खबरों के चयन की प्रक्रिया निस्पक्ष नहीं है, पत्रकारिता का इकबाल बुलंद रहे इसके लिए सम्यक रिपोर्टिंग होनी चाहिए।इस अवसर पर शिक्षक नेता बद्री नाथ सिंह, जीतेन्द्र नाथ घोष,कमला शंकर यादव,कनई राम प्रजापति, गोपाल यादव,बालेश्वर विक्रम,लव जी सिंह,श्रीकांत पाण्डेय,अजय राय,संतोष सिंह,अरुण सिंह,कुँवर भानु प्रताप सिंह, अरविन्द स्वरुप मिश्र, बी सी झा, गाजीपुर सामुदायिक रेडियो से अमितेश सिंह,प्रदीप सिंह आदि मौजूद रहे।

 

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