संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: कोई भी क्षेत्र हो बढ़ती हुई जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुसंधान की जरूरत होती है। जिस देश में अधिकांश आबादी खेती किसानी पर निर्भर हो,और जिसके उपर सवा सौ बिलियन लोगों के आंकाक्षाओं की जिम्मेवारी हो, वहां तो अनुसंधान की दरकार होती ही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का आजक 88 वें स्थापना दिवस एवं वार्षिक पुरस्कार समारोह संपन्न हुआ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित स्थापना दिवस कार्यकम को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यो का लेखा—जोखा विस्तार से प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित स्थापना दिवस कार्यकम को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यो का लेखा—जोखा विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं के अनुरूप और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मंत्रालय विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री ने देश के किसानों के लिए एक ब्लूप्रिंट सामने रखा है। जिसके अनुसार राष्ट्र का पेट भरे और किसान की जेब भरे। भारत, तभी विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ सकेगा जब भारत की आत्मा माने जाने वाले गांवों में रहने वाले हमारे किसान भाई खुशहाल होंगे। आज गांव में हर हाथ को काम देने की जरूरत हैं ताकि गांवों से होने वाले पलायन को रोका जा सके। और यह तभी संभव है जब किसान की आमदनी बढ़़ें, उसका मन किसानी में लगे, और वह राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान कर सकें। इससे न केवल दैनिक जीवन में मारामारी कम होगी बल्कि गांवों से शहरों की ओर पलायन करके आने वाले युवा अपने परिवार, अपने बूढ़े मां-बाप के साथ सुख व संतोष से रह सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद निरंतर प्रयासरत है।
राधामोहन सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा विगत दो वर्षों में कृषि, शिक्षा, अनुसंधान एवंप्रसार के लिए विशेषकर पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों के विकास हेतु कई योजनाएं शुरु की हैं। प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना, आपदा राहत के मानकों में परिवर्तन, परम्परागत कृषि विकास योजना, मधुमक्खी विकास हेतु नयी पहल, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, पशुधन मिशन, पशुचिकित्सा शिक्षा, नीली क्रांति, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान,कृषि विस्तार (केवीके), गन्ना किसानों के लिए प्रभावी नीतिगत फैसले, कृषि ऋण प्रवाह में तेजी, विश्व व्यापार संगठन में किसानों के हितों की सुरक्षा, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, नीम लेपित यूरिया, नई उर्वरक नीति, मनरेगा में कम से कम 60 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में व्यय, किसान टीवी चैनल की शुरूआत, राष्ट्रीय कृषि बाजार इन सारे विषयों पर कृषि मंत्रालय काम कर रहा है। भारतीय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास करके भारत में हरित क्रांति लाने और उतरोत्तर कृषि विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है।
आप सब लोगों को ज्ञात है कि सरकार ने दूसरी हरित क्रांति की पहल की है। भारत में दूसरी क्रांति का प्रादुर्भाव भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से होगा। सरकार ने पूर्वी राज्यों के लिए (पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाना) बीजीआरईआई कार्यक्रम विशेष सहायता दी है। यह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की उप योजना है जिसमें पूर्वी भारत के सात राज्यों असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडि़शा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चावल व दलहन आधारित फसलचक्र प्रणाली की उत्पादकता को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। इसके साथ ही टिकाऊ कृषि एवं किसान कल्याण के लिए हमारी सरकार ने अनेक योजनाएं एवं पहल प्रारंभ की हैं।
उन्होंने कहा कि मेरा गांव – मेरा गौरव एक नई योजना प्रारंभ की गई है जिसमें गांव तक वैज्ञानिक खेती की प्रभावी एवं गहरी पहुंच के लिए देश में कृषि विश्वविद्यालयों एवं आईसीएआर के सभी संस्थानों के कृषि विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक कृषि विशेषज्ञ स्वयं को किसी एक विशिष्ट गांव से जोड़ेगा और वहां नई तकनीकों के माध्यम से कृषि विकास को बढ़ावा देने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करेगा तथा कृषि संबंधी समस्या का समाधान करने में इन संस्थानों की भूमिका के बारे में जागरूकता पैदा करेगा । आधुनिक कृषि रीतियों के बारे में वैज्ञानिक जागरूकता का सृजन करने के लिए इस योजना के तहत लगभग 20 हजार कृषि वैज्ञानिकों को प्रत्येक द्वारा एक गांव अपनाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।
इस समारोह की विशेषता ये थी कि प्रथम बार 700 के करीब किसान भाईयों को भी आमंत्रित किया गया और शोधकर्त्ताओं एवं अधिकारियों के साथ कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पुरस्कार 19 वर्गों में 119 प्रतिभागियों को दिये गये, जिनमें ना केवल कृषि अनुसंधानकर्त्ता एवं संस्थान बल्कि कृषि पत्रकार, कृषक एवं प्रसार कर्मी भी शामिल रहे।
मंत्रिपरिषद में नवनियुक्त कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री एस.एस. अहलुवालिया, पुरुषोत्तम रुपाला एवं सुदर्शन भगत भी इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रुप में शामिल हुए।



