एसीएबीसी……बनाए बिजनेस का बादशाह

0
737

manish 2_n

मनीष अग्रहरि

देश में शिक्षित बेरोजगारो की एक बड़ी फौज है, बहुत सारे उच्च शिक्षित युवा एैसे है जो अपना खुद का कारोबार खड़ा कर के दूसरो को भी रोजगार देने का जोश और जज्बा रखते है,मगर पूंजी और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अभाव में अपने हसरतो को पर नही लगा पाते है। नतीजतन बड़ी से बड़ी डिग्री होल्डर युवा भी कई बार बेरोजगार रह जाते है या कम वेतन पर दूसरो के यहा नौकर बने रहते है।

हलाकि खेती किसानी के क्षेत्र में बेहद खुशी की बात है कि कृषि एवं संबंधित क्षेत्र के शिक्षित युवाओं के लिए केन्द्र  सरकार ने एक खास योजना चलाई है, जिसका नाम है ‘एग्री क्लीनिक एण्ड एग्री बिजनेस सेंटर यानी एसीएबीसी। यह ट्रेनिंग नाम के अनुरूप ही काम धंधो की एबीसी सिखाती है,जो कृषि एवं संबंधित क्षेत्रो की शिक्षा पाए छात्रो के लिए पूरी तरह से निःशुल्क मुहैया कराई जाती है।

unnao

योजना की खास बात यह है कि सेंटर खोलने के लिए दोहरी सब्सिडी है, पहली सब्सिडी आने वाली लागत पर यानी की पूंजी सब्सिडी है तो दूसरी प्रदान किए गए पूंजी पर ब्याज सब्सिडी यानी ब्याज में छूट है। सोने पे सुहागा यह है कि सरकार इस समय स्टार्ट अप ट्रेनिंग प्रोग्राम भी मुहैया करा रही है, जो युवा ट्रेनिंग ले चुके है, वे विशेष रूप से स्टार्ट अप ट्रेनिंग प्रोग्राम लोन भी संबंधित इकाई के स्थापना के लिए ले सकते है।

क्या है एसीएबीसीः एग्रीक्लीनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर (एसीएबीसी) दो माह का निः शुल्क प्रशिक्षण होता है। यह राष्ट्रीय कृषि विस्तार संस्थान ( मैनेज), हैदराबाद और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के वित्तीय सहयोग से से चल रहा है।

इस के तहत कृषि एवं संबंधित क्षेत्रो के छात्रों को व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित कर वित्तीय सहयोग के साथ कृषि उद्यमी बनाने की योजना है। योजना का मुख्य मकसद प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं से न्याय पंचायत स्तर पर पेशेवर कृषि प्रसार सम्बन्धी कार्य एवं गुणवत्ता युक्त एग्री इनपुट ज्यादा से ज्यादा किसानो तक पहुंचाने की है। यहा पर पेशेवर कृषि प्रसार कार्य का मतलब है, किसानो को शुल्क सहित परामर्श देना ।

प्रशिक्षण प्राप्त कृषि छात्र, कृषि क्लीनिको में कृषि विशेषज्ञ के रूप में कृषि प्रौद्योगिकी, फसलो के कीटो और रोगो से सुरक्षा,बाजार का रूझान देने, विभिन्न फसलों के मूल्य बताने, कृत्रिम गर्भाधान करने और पशु स्वास्थ्य के लिए क्लीनिक सेवाएं संचालित करने सहित अन्य चीजो पर किसानो को जानकारी देगें।

सरकार का मानना है कि इससे फसलो, पशुओं की उत्पादकता व किसानो की आमदनी में इजाफा होगा। इस के जरिए उन्नत कृषि उपकरणों को किरायें पर दिया जायेगा और कृषि उत्पादो की बिक्री भी की जाएगी।

शैक्षणिक योग्यताः सभी कृषि शिक्षा प्राप्त छात्र जिसमें 10-12 से लेकर कृषि में पीएचडी तक इसके प्रशिक्षण हेतु योग्य है। मतलब यह है कि कोई युवा कृषि से संबंधित क्षेत्रो जैसे बागवानी, कृषि आभियंत्रिकी, वानिकी, डेयरी,  मछलीपालन, पशुचिकित्सा संबंधी अन्य किसी भी विषय में स्नातक है तो भी प्रशिक्षण लेने के योग्य होगा भले ही वह फ्रेशर ही क्यो न हो।    

कोर्स से जुड़ी जानकारीः मैनेज द्वारा निर्धारित कोर्स में कृषि उद्यमिता और कृषि व्यापार प्रबंधन की जानकारी दी जाती है, साथ में आपके द्वारा उद्यम हेतु चयनित क्षेत्र में कौशल विकाश की सैद्वातिंक एवं व्यावहारिक जानकारी उस क्षेत्र के माहिरोे द्वारा दी जाती है।

लागत: एसीएबीसी शुरू करने में आने वाली लागतों की बात की जाए तो यह आपके द्वारा चुने हुए प्रोजेक्ट पर निर्भर है। अगर प्रोजेक्ट बड़ा होगा तो लागत भी ज्यादा होगी, प्रोजेक्ट छोटा होगा तो लागत कम होगी।

unnao unnao--621x414

सरकारी मददः कृषि उद्यमियो के लागत को कम करने और लाभ को बढ़ाने के लिए योजना के तहत केनद्र सरकार दो तरह से सहायता देती है, पहला बैंक द्वारा एक निश्चित सीमा तक लोन मुहैया कराती है, दूसरा मुहैया कराए गए लोन पर लगने वाले ब्याज में खासा छूट देती है।

मौजूदा समय में ब्यक्तिगत प्रोजेक्ट के लागत की उच्चतम सीमा सीलिंग 20 लाख रूपये है, जब कि 5 लोगो के ग्रुप प्रोजेक्ट के लिए लागत की उच्चतम सीमा 1 करोड़ रूपए है।लोन में मिलने वाले छूट की बात की जाए तो सामान्य वर्ग के लोगो को 36 फीसदी तक और पहाड़ी या कठिन भौगोलिक क्षेत्रो, एस0 सी0,एस0टी0 वर्ग के लोगो को 42 फीसदी तक की छूट मिलती है।

असीमित संभावनाएः एसीएबीसी ट्रेनिंग ले चुके लोगो के पास असीमित ब्यापार बढ़ाने, असीमित कृषि प्रसार का कार्य करके किसानो की सेवा करने, पैसा और शोहरत कमाने की अपार संभावनाए है। इसकी वजह सरकार द्वारा सधी हुई ट्रेनिंग का मुहैया कराया जाना और हर मोड़ पर भरपूर वित्तीय सहायता पहुचाना है। एैसे में यह कहना ज्यादा नही होगा कि अगर उद्यमी के अन्दर अपना काम शुरू करने का जुझारू जज्बा और जोश कायम हो तो उसे असीमित आमदनी, ब्यापार और शोहरत के बुलंदियो पर पहुचने से कोई रोक नही सकता है, यही नही एसीएबीसी का उद्यमी दूसरे लोगो को भारी मात्रा में आसानी से रोजगार भी दे सकता है।

माहिरो का मशविरा: इस संबंध में वाराणसी (उ0 प्र0)स्थित श्री मां गुरू ग्रामोद्योग सेवा संस्थान जो कि एसीएबीसी के ट्रेनिंग का एक शीर्ष एवं पुराना संस्थान है के नोडल आफिसर डां शैलेन्द्र प्रताप सिंह कहते है “आज जब खेती की लागत तेजी से बढ़ रही है तब कृषि क्षेत्र के डाक्टरो की दरकार भी बढ़ रही है, क्यो कि इन्सानो और जानवरो के डाक्टरो के साथ ही साथ खेती किसानी के डाक्टरो की भी बहुत जरूरत हैं।

एसीएबीसी मालिको को सरकारी सुविधाए मुहैया होती है जिससे एसीएबीसी चलाने वाले कृषि प्रसार के सारे काम सरकार के समान्तर कर सकते है, उन्हे हर मोर्चे पर सहयोग दिया जाएगा। यह योजना कृषि उद्यमी को असीमित पैसा कमाने और ब्यापार बढ़ाने के लिए एक अनोखे अस्त्र जैसा है।”

डा शैलेन्द्र  प्रताप सिंह, नोडल आफिसर

एसएमजीजीएसएस एसीएबीसी ट्रेनिंग सेंटर, वाराणसी

इसी तरह नाबार्ड लखनऊँ के एजीएम और जनसंपर्क अधिकारी नवीन राय कहते है कि नाबार्ड द्वारा देश में अपने तरह की यह अनोखी योजना चलाई गई है, कृषि छात्र ज्यादा से ज्यादा इसका लाभ ले, इससे देश की कृषि क्षेत्र में तेज विकास होगा।  

कथा सफल कारोबार की:

संकर्षण शाही (आई डी नं यूपी 7377)

  संकर्षण शाही

संकर्षण पूर्वी उ0 प्र0 में देवरिया जिले के गरेर गाव के रहने वाले है। साल 1995 में कृषि स्नातक होने और दिल्ली से एमबीए करने के बाद दिल्ली, देवरिया और गोरखपुर में तीन अलग अलग नौकरिया की, तीनो से असंतुष्ट होने पर साल 2009 में वाराणसी स्थित श्री मा गुरू ग्रामोद्योग सेवा संस्थान से एसीएबीसी का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद संकर्षण ने अपना एसीएबीसी सेंटर खोला। वर्तमान में वह तकरीबन 15 से ज्यादा ग्राम पंचायतो के छह हजार से अधिक किसानो को अपनी सेवाए दे रहे है।

उन की सेवाओं से क्षेत्र में कृषि विविधीकरण तीस से पैतीस फीसदी बढ़ गया है, जब कि क्षेत्र का उत्पादन 40 फीसदी तक बढ़ चुका है। इस समय उनके ब्यवसाय का सालाना टर्नओवर 60 लाख के लगभग पहुंच चुका है। संकर्षण के कामो से प्रभावित होकर उन्हे राज्य सरकार ने आत्मा योजना का रिसोर्स पर्सन बनाया है। वर्तमान में संकर्षण एसीएबीसी से पूरी तरह खुश है, और क्षेत्र के लोग उन्हे सम्मान से खेती के ‘डाक्टर‘ े पुकारते है।

अमरजीत यादव (आई डी नं यूपी 7318)ः

        अमरजीत यादव    

अमरजीत यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाव पतेपुर जिला गाजीपुर के रहने वाले है। साल 1989 में गाजीपुर पीजी कालेज से कृषि स्नानक करने के बाद, साल 1991 से 1996 तक छत्तीसगढ़ स्थित भिलाई इंजीनियरिंग कार्पोरेशन लिमिटेड में फार्म मैनेजर की नौकरी की ।साल 1996 में पिता जी की असामयिक मृत्यु के बाद वापस घर लौटना हुआ। अपने एक मित्र के कहने पर साल 2009 में वाराणसी स्थित श्री मा गुरू ग्रामोद्योग सेवा संस्थान से एसीएबीसी का प्रशिक्षण लिया।

प्रशिक्षण लेने के बाद स्थानीय करीमुद्दीनपुर गाँव की यूनियन बैंक आफ इंडिया से योजना के तहत पाच लाख रूपए का शुरूआती लोन लेकर हरित क्रान्ति एसीएबीसी नाम से सेंटर खोला। इस समय अमरजीत के बिजनेस का सालाना टर्नओवर तकरीबन 70-80 लाख पहुंच चुका है, और 25 से अधिक ग्राम पंचायतों के तकरीबन सात हजार किसानो के बीच कृषि प्रसार सेवाएं दे रहे है। अपने बड़े कारोबार के कारण वह इस समय कुल 6 ब्यक्तियो को स्थाई नौकरी पर रक्खे हुए है, जब कि पीक सीजन पर इससे अधिक लोगो को रोजगार देना होता है। मौजूदा समय अमरजीत की शुद्व मासिक आमदनी तकरीबन तीस से पचास हजार रूपए आसानी से हो जाती है। एसीएबीसी से मिले हौंसले को देखते हुए अमरजीत ने अब डेयरी क्षेत्र में भी बेहतर काम करने की ठान ली है।

कहां से ले प्रशिक्षणः प्रशिक्षण हेतु देश के सभी राज्यो में अलग अलग नोडल केन्द्र  बनाए गए हैं, जहा से प्रशिक्षण लिया जा सकता है। प्रशिक्षण संबंधित जानकारियो के लिए आप मैनेज हैदराबाद के बेबसाइट manage.com पर या एग्रीक्लीनिक की बेबसाइट agriclinics.net पर जानकारियां इकट्ठा कर सकते है। राष्ट्रीय स्तर के टोल फ्री नंबर 18004251556 पर भी बात कर सकते है। (फार्म एंड फूड से साभार)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here