पहले बहुत घिन्न आती थी..लेकिन अब अच्छा लगने लगा है:अंजली चित्रकार

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संतोष कुमार सिंह

होबो..होबो..कब होबो..माने कभी न होबो। शिवसागर जिले के डीसी वीरेंद्र मित्तल ने जब लकुआ ब्लॉक के सभी पंचायत प्रमुखों, और वार्ड सदस्यों, पीडब्लूडी के इंजिनियरों, कर्मचारियों की बैठक जिला मुख्यालय में बुलाई तो एक ही मकसद था..लकुआ को खुले में शौच मुक्त करना। डिप्टी कमिश्नर की बैठक..मकसद घर-घर शौचालय। एकसुर से आवाज आई होबो..होबो..लेकिन कब होबो..कैसे होबो..कितने दिन में होबो..यह तस्वीर साफ नहीं। ​वीरेंद्र मित्तल अपने कुछ वर्षों की नौकरी में ही समझ गये हैं ये लोग किसी काम को ना नहीं कहते। जब होबो की आवाज आती है तो मंशा है कभी न होबो या फिर अभी न होबो। लेकिन उन्होनें जैसे ठान लिया हो अभी होबो..जरूर होबो।

hollow phukan hollow

अब जब कोइ जिले का सबसे बड़ा अधिकारी यह ठान ले कि जमीन पर बदलाव लाना है तो रास्ते खुद-बखुद बनते चले जाते हैं। लकुआ के हॉलो फूकन पंचायत के प्रधान मुकुल कहते हैं कि डिपटी कमिश्नर भगवान का उपहार हैं। उन्होंने रूची ली। ऐसा नहीं है कि पहले काम नहीं होता था। काम तो पहले भी हुए हैं ​लेकिन सरकारी काम की तरह। मतलब धीरे-धीरे चल रहा है। कभी पैसे की कमी, तो कभी संसाधन की तो कभी इच्छाशक्ति की। लेकिन यहां अच्छा लग रहा है कि अधिकारी ने लक्ष्य दिया। एक व्यवस्था बनाई और हम सब काम में लग गए। निगरानी की व्यवस्था उपर से भी, और गांव के स्तर पर भी।

एसएचजी मेंबर और वार्ड नंबर 5 की सदस्या लगभग 65 वर्षीय अंजली चित्रकार कहती हैं कि ”जब शुरू में निगरानी का काम सौंपा गया, तो बड़ी घिन्न आई। घर-घर घूमना पड़ता। लैट्रिन का दरवाजा खोल के देखती थी। लेकिन अब अच्छा लगने लगा है। धीरे-धीरे लगाव हो गया। नये उम्र लोग तो समझते थे,लेकिन बुजुर्गों को बाहर जाने की आदत थी। उन्हें समझाया, शौच पर मक्खी बैठती है और वही मक्खी उड़ते हुए आपके खाने पर इस तरह लोगों को समझाया। अब लोग समझने लगे हैं।”

चालापाथेर पंचायत के खेलमाड़ी गांव में मोहम्मद अब्दुल अली से मुलाकात होती है। चार भाई हैं। सब के घरों में शौचालय। अली भाईयों के पास खेती बाड़ी भी है। वे ट्यूब वेल से टंकी भरते हैं और शौचालय का प्रयोग करते हैं। लकुआ में घूमते हुए जो एक महत्वपूर्ण बात सामने आई वह यह है कि सबके पास कुछ न कुछ जमीन है। एक तरफ जहां अन्य राज्यों में भूमिहीनों की संख्या ज्यादा होने के कारण शौचालय के लिए जमीन की समस्या होती है। इस पंचायत में सभी के शौचालय अपनी जमीन पर बने हुए हैं।

निमोनागढ़ पंचायत की प्रमुख डालिम गोथ कहती हैं कि शौचालय निर्माण करना तो ठीक है लेकिन इसके उपयोग को कैसे बढ़ाया जाये इसको लेकर चिंतायें थी। लोगों के वर्षो से स्थापित धारणाएं और प्रचलित परंपरा को एक झटके से तोड़ा नहीं जा सकता था। धीरे—धीरे लोगों को बात समझ आ गयी। ए​क दो लोग अभी भी बाहर जाने की कोशिश करते हैं। डालिम कहती हैं कि उन्हें पहली बार लगा कि कोई बड़ा काम किया है। शौचालय अभियान में शामिल होने और काम का सफलता पूर्वक पूरा करने से न सिर्फ आत्म विश्वास बढ़ा है,बल्कि लोगों से अच्छे संबंध भी बन गए हैं। इस संबंध की बदौलत अन्य काम करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही चुनाव जीतने में आसानी भी।

Toilet constructed in Charaideo by the Government

वैसे तो आसाम के ज्यादातर जिलों में चाय बागान है। यहां भी लकुआ में चालापाथेर और चराईदेव में चाय बगान हैं। चाय बागानों में काफी मजदूर वर्षो से काम करते हैं। लेकिन इस इलाके में भी पंचायत ने चाय बागान के प्रमुखों से बातचीत कर शौचालय निर्माण किया है। पंचायत प्रमुख कहती है कि ‘बगानिया आदमी को समझाने में समस्या थी। मैनेजमेंट को समझाया तो बात बनी।’ शौचालय बनवाने से परिवर्तन आएगा। बीमारी कम हो गया है। अब लोग सहयोग देते हैं। निगरानी कमिटी बनाया है। हमारा टर्म 5 साल है। हम रहे न रहे। बस ये चलता रहे ताकि आजीवन ओडीएफ बना रहे।

लोगों के द्वारा हर स्तर पर प्रयास के बावजूद बदलाव के वाहक बने डिप्टी कमिश्नर वीरेंद्र मित्तल थोड़े सजग हैं,कहते हैं, पुरानी आदतें आसानी से नहीं जातीं। चाय बागानों में इसकी आशंका ज्यादा है। क्योंकि यहां वर्षों से लोग खुले में शौच करते आये हैं। इनके व्यवहार में शौचालय का उपयोग इसके फायदे का ध्यान दिलाते रहने के लिए प्रत्येक गांव में निगराणी कमिटी बनाई गयी है। जो लगातार इन्हें शौचालय के विषय में सजग करते रहते हैं।

क्या कहते हैं आंकड़ें

लकवा ब्लॉक में 5,319 शौचालय बनाये गये हैं। इन शौचालयों के निर्माण राज्य सरकार और कंपनियों के कॉरपोरेट सामाजिक जवाबदेही के तहत निर्मित किये गये है। इनमें महत्वपूर्ण कंपनियां हैं ओएनजीसी, और बीसीपीएल अर्थात ब्रहमपुत्रा क्रैकर्स और पोलिमरस लिमिटेड के सहयोग से निर्मित किये गये हैं। इस पूरे परियोजना को संचालित करने में यूनीसेफ का सहयोग है। केवल शिवसागर के लकुआ प्रखंड में ही नहीं बल्कि आसाम के चार जिलों में सरकार को समुदाय के सहयोग से  खुले में शौच मुक्त बनाने में मदद कर रहा है।

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