पंचायत खबर टोली
गाजीपुर: जनपद के किसानों को प्रदेश सरकार एक सौगात देने जा रही है जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रक्षेत्र निरीक्षण समिति ने ग्राम-रानीपुर पचोतर, विकास खण्ड-मरदह, फसल अनुसंधान केन्द्र, आॅकुसपुर एवं गन्ना अनुसंधान केन्द्र, कट्या की भूमि का निरीक्षण किया। जनपद में कुल 16 ब्लाॅकों में से आठ विकास खण्डों के किसानों को इस केन्द्र से जोड़ा जायेगा, साथ ही साथ कृषि की आधुनिक तकनीकों को इस केन्द्र के माध्यम से कृषकों को अवगत कराया जायेगा। नये केवीके की भूमि निरीक्षण इत्यादि का प्रस्तुतीकरण कृषि विज्ञान केन्द्र, पी0जी0 कालेज, गाजीपुर के सभागार में समस्त कर्मचारियों के सहयोग से किया गया, जिसमें केन्द्र के चेयरमैन राजेश्वर प्रसाद सिंह भी उपस्थित थे।
ये रहे उपस्थित
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से गठित कमेटी के अध्यक्ष डाॅ0 गया प्रसाद, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय मेरठ के नेतृत्त्व में डाॅ0 अतर सिंह, डाॅ0 आर0जी0 उपाध्याय, डाॅ0 एम0पी0 सिंह, डाॅ0 एस0 पवार एवं उप कृषि निदेशक डाॅ0 यू0पी0 सिंह ने भूमि का निरीक्षण किया। साथ ही साथ नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद के कुलपति प्रो0 अख्तर हसीब द्वारा गठित समिति के सदस्य डाॅ0 आर0ए0 सिंह निदेशक प्रसार, डाॅ0 आर0आर0 सिंह, डाॅ0 एम0पी0 सिंह एवं डाॅ0 रवि प्रकाश मौर्य एवं भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वैज्ञानिकों ने स्थलीय निरीक्षण किया।
वर्तमान केवीके का हाल
गाजीपुर जिले का वर्तमान केवीके की स्थापना वर्ष 2002 में पी जी कॉलेज गाजीपुर के अंर्तगत किया गया है। इसकी स्थापना में सामाजिक कार्यकर्ता राजेश्वर सिंह की प्रेरणा से पी जी कॉलेज के अंर्तगत किया गया था।
यह कृषि विज्ञान केंद्र पूरे गाजीपुर में किसानों को नयी तकनीक से जोड़ने, उत्पादन बढ़ाने और कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, शोध कार्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर द्वारा कृषि से जुड़े विविध क्षेत्रों मसलन खेती, हॉटी कल्चर, मिट्टी विज्ञान, पशु पालन, मत्सय पालन, गृह विज्ञान, पौधों की सुरक्षा का प्रशिक्षण स्थानीय किसानों,ग्रामीण युवाओं, महिला किसानों को दिया जाता है। इसके साथ ही सेरेल, तिलहन,दलहन, सब्जी एवं अन्य तरह के फसलों का जमीनी स्तर पर परीक्षण भी किया जाता रहा है।
