संतोष कुमार सिंह
लेह, लद्दाख: अभी हरियाणा विधानसभा में जैन मुनी तरूण सागर द्वारा विधानसभा को संबोधित किए जाने को लेकर चहुंओर चर्चा है। आपने भी बाबाओं या धर्मगुरू के संगत के विषय में सुना होगा। सुना होगा धार्मिक विमर्श के विषय में। सुना होगा उनके महत्ता के विषय में,उनके ऐश्वर्य के विषय में, उनके अनुयाईयों के विषय में। उनके टकराव के विषय में उनकी महत्वाकांक्षा के विषय में। लेकिन यह सच आधा अधूरा सच है। आईये आपको एक और पहलू से रूबरू कराते हैं। आज बाबा और विभिन्न धर्मो के धर्माचार्य आपसे धर्म की नहीं शौचालय की चर्चा कर रहे है। इसके न होने से होने वाली बीमारियों, स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के जीवन प्रत्याशा को लेकर चिंतित है। हर उस दर पर जा रहे हैं, हर उस जगह पर जा रहे हैं,हर सभा में, समारोह में, पहाड़ी पर, नदी में, कुंभ में ताल में,तलैया में..वर्फीले स्थानों पर ताकि भारत को खुले में शौच मुक्त किया जा सके और आपके और आपके बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाया जा सके।
कुछ ऐसा ही नजारा था लेह, लद्दाख के उस वर्फीली जगह पर जहां ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंश जीवा-भारत एवं यूनिसेफ इंडिया ने संयुक्त रूप से लद्दाख में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया।
जीवा – यूनिसेफ लद्दाख शिखर सम्मेलन
जीवा-यूनिसेफ द्वारा आयोजित दो दिवसिय शिखर सम्मेलन में विशेष रूप से लद्दाख क्षेत्र में वाश ( पानी, सफाई की व्यवस्था एवं स्वास्थ्य रक्षा) से जुडे अति महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। जिसमें इस क्षेत्र में विषमता, अनुपलब्धता एवं अल्पसंख्यक समुदायों के जीवन से जुड़े परेशानियों पर खुल कर चर्चा हुई। चर्चा के केंद्र में था शौचालय।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस बात पर खुशी जताई कि अब धर्म गुरू शौचालय जैसे बुनियादी जरूरतों पर जनता को जागरूक कर रहे हैं। तोमर ने कहा कि वे भारत सरकार की ओर से स्वामी चिदानंद सरस्वती के प्रति आभारी हैं जिन्होंने अन्य धर्मगुरूओं के साथ मिलकर धर्म-प्रमुखों के बीच स्वच्छता का मुद्दा उठाया। ऐसा प्रतीत होता है कि मंच पर 20-25 धर्म-प्रमुख हैं किन्तु यदि आप इनकी वाणी के प्रभाव और इनमें जनता के विश्वास को देखें तो ये इस देश के करोड़ों लोगो का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि हम ये मानते है कि हमारे धर्म-प्रमुख हमें सही रास्ता दिखाते हैं। इसलिये जब वे किसी मिशन को हाथ में लेते है तो उसकी सफलता अवश्यंभावी है। लेह के विषय में तोमर ने बताया कि उन्हें इस जगह से बहुत उम्मीद है क्योंकि इस जगह को खुले में शौच मुक्त बनाने में मात्र 2400 घरों का फासला बचा है जिन्हें शौचालय बनाने के लिये प्रोत्साहित किया जाना है। इस प्रकार यह 18 वां जिला होगा जिसे खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जायेगा और यह सचमुच में एक अच्छा अवसर है।
इस मौके पर डा हर्षवर्धन ने कहा, ’अपशिष्ट प्रबंघन, शौचालय तकनीक, जल शुद्धीकरण के साधन व प्लास्टिक के पुनः उपयोग जैसी नई खोजों व शोध के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने भी स्वच्छ भारत मिशन का लगातार साथ दिया है। इस मिशन में विज्ञान और प्रोद्योगिकी आपके साथ है और हमने दिखाया है कि कचरे को कंचन में परिवर्तित किया जा सकता है।’
जीवा-भारत के संस्थापक एवं परमार्थ निकेतन ऋषिकेश स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अन्य धर्मगुरूओ के साथ उपस्थित सभी लोगों को सर्वधर्म स्वच्छता संकल्प दिलवाया। उन्होंने कहा कि ’ एकता की इस भावना के साथ हमें संकल्प लेना होगा कि आज के बाद कभी भी बच्चों को पानी, स्वच्छता और स्वस्थ्य रक्षा की कमी से जान नहीं गँवानी पड़ेगी। अब महिलाओं को निवृत होने के लिये अंधेरे की बाट नहीं जोहनी पडेगी। अब हमारे राष्ट्र में शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्था के अभाव में खुले में शौच करने वाले व्यक्तियों की सबसे अधिक संख्या नहीं होगी। आज हम एक होकर सेवा करने के लिये एकत्रित हुये हैं, जिससे सभी के लिये स्वच्छ जल, स्वास्थ्य रक्षा व सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें।’
यूनिसेफ की तरफ से वाश विशेषज्ञ मनीष वासुजा ने स्वच्छ भारत मिशन एवं सैनिटेशन की चुनौतियों के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा, ’सामुदायिक सहयोग के कारण स्वच्छ भारत मिशन को काफी सफलता मिली है। 564 मिलियन लोग खुले में शौच जाते हैं। जीवा एक महत्वपूर्ण मंच है जहां शौचालय के प्रयोग का सन्देश दिया जा रहा है।’
केन्द्रीय बौद्ध अध्ययन संस्थान, लेह में सर्व धर्म स्वच्छता एवं सद्भावना संकल्प इस अवसर पर भारत के पांच मुख्य धर्मों के आध्यात्मिक प्रमुख उपस्थित थे। इनमें अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह जी, अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान जैनुल अबेदिन साहब, लखनऊ के शिया नेता मौलाना डा सैयद कल्बे सादिक,, ग्लोबल इमाम काउंसिल के शिया नेता मौलाना लुकमान तारापुरी, महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, अशोक मिशन दिल्ली के अध्यक्ष बौद्व लामा लोबजंग, वरिष्ठ आर एस एस नेता इंद्रेश कुमार, संचार माध्यम से, औद्योगिक निगमों के प्रतिनिधियों एवं स्थानीय सहभागियों समेत 7500 से अधिक लोग सम्मिलित हुये।

