जिन हाथों में कल तक थे पत्थर वो आज लिख रहे हैं स्वरोजगार की कहानी

0
133

अक्षत सरोत्री

कुपवाड़ा: जिन हाथों में कभी पत्थर हुआ करते थे और निशाने पर होती थी सरकारी सम्पतियां और सरकारी अमले। आज उन्ही युवा हाथ बदलाव की इबारत लिख रहे हैं। रोजी-रोटी की तलाश करते और स्वरोजगार की और बढ़ते घाटी के बदलाव की कहानी कह रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी है हंदवाड़ा के वोधपोरा के एक शिक्षित युवा इरफान एजाज की।

इस युवक ने सोपोर-कुपवाड़ा रोड के किनारे अपने गांव वोधपोरा में पुरानी तरह की झोपड़ियां बनाकर कश्मीरी संस्कृति को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। यहां पर पर्यटक आराम कर सकते हैं और अपने पसंदीदा भोजन का आनंद ले सकते हैं। झोपड़ियां प्राचीन कश्मीर का प्रमुख उदाहरण हैं और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती हैं।

झोपड़ियाँ प्राचीन कश्मीर का प्रमुख उदाहरण हैं और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती हैं। मीडिया से बात करते हुए मालिक ने कहा कि राजस्थान में अपनी पढ़ाई के दौरान उन्हें ऐसी झोपड़ियाँ मिलीं जो चिलचिलाती गर्मी से राहत देने का काम करती हैं। इसी के चलते उसने कश्मीर में पर्यटकों की सुविधा के लिए इन झोपड़ियों को बनाने का सोचा ताकि कश्मीर में घूमने आने वालों को किसी तरह की परेशानी न हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here