पीडीएस…..अब नहीं होगी राशन बांटने में गड़बड़ी

0
33618

संजीव कुमार

जैम त्रिमूर्ति (जन-धन योजना, आधार और मोबाइल नंबर का संक्षिप्त रूप) एक ऐसा मंच है जो मूल्य सब्सिडी पर आधारित वर्तमान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों का सीधा हस्तांतरण कर, इसमें एक सक्षम बदलाव ला सकती है। हाल ही में आई कैग रिपोर्ट भी जैम आधारित तकनीक का सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए वकालत करती है। कंप्यूटरीकरण के राज्य स्तरीय अनुभवों को यहां याद करें तो पता चलता है कि यह तकनीक वास्तव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार को प्रभावित करता है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में मुख्य समस्या रिसाव की है जो आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करता है और आरक्षित सब्सिडी वाले वस्तुओं के लाभार्थियों को उनके लाभ से वंचित करता है। राष्ट्रीय स्तर पर रिसाव की गहराई को देखते हुए (गुलाटी और सैनी 2015) सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभों को सीधा लाभार्थियों के खाते में हस्तांतरित किया जा रहा है। यह नीति पीडीएस में होने वाले अवैध भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएगा।

pdsssss     तीन अलग-अलग प्रणालियों (जन-धन योजना, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर) से उत्पन्न जैम त्रिमूर्ति रूपी प्रणाली को नीतिगत बदलाव करने के लिए तैयार किया गया है। पिछले आर्थिक सर्वेक्षण (भारत सरकार 2015) से पता चलता है कि जन धन के बैंक खाते, आधार कार्ड की अद्वितीय पहचान और मोबाइल फोन का सम्मिलित उपयोग सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के पुनर्नर्मिाण में सहायक हो सकता है। उपयोगकर्ताओं के लिए यह मूल्य सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण का विकल्प हो सकती है। यह प्रणाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए कारगर सिद्ध होगी।

जैम तकनीक कितनी महत्वपूर्ण है उसका सफलतम उदाहरण छत्तीसगढ़ और गुजरात है। (जस्टिस वाधवा कमेटी 2011) इन दोनों राज्यों ने अपने यहां के जनवितरण प्रणाली को कंप्यूटरीकृत कर यह सफलता अर्जित की है। छत्तीसगढ़ को नजीर मानते हुए केरल में भी औपचारिक रूप से जनवितरण प्रणाली और लाभार्थियों के विवरण का कंप्यूटरीकृत 2001 करना शुरू हो गया था।

गौरतलब है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के इतिहास में केरल का नाम उत्कृट वितरण नेटवर्क के लिए प्रसिद्ध था। लेकिन 1997 में इस जनवितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए गए। परिणाम स्वरूप बड़े पैमाने पर गरीबी रेखा से उपर के परिवार इस जनवितरण प्रणाली से दूर हुए। इससे राशन दुकानों की व्यवहार्यता गंभीर रूप से प्रभावित हुई। राशन के कीमतों में उपजे द्वंद्व ने भ्रष्टाचार को जन्म दिया। और कीमतों का द्वंद्व चावल माफिया को इस कार्यक्रम को चलाने वाले लोगों की तरफ आकर्षित किया। यहीं से इस कार्यक्रम की आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी राज्य की नजर में प्राथमिकता का मामला बन गया। फिर सवाल खड़ा हुआ कि आखिर इसकी निगरानी कैसे की जाए? केरल मंे पारदर्शी राशन आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण प्रणाली बनाने के लिए छत्तीसगढ़ का कंप्यूटरीकृत मॉडल अपनाया गया। कार्यान्वयन केवल आंशिक किया गया है। हालांकि कार्यक्रम पीडीएस अखंडता की रक्षा करने के लिए सूचना प्रणाली का उपयोग करने के विचार को दर्शाता है।

वहीं तिरुवनंतपुरम में 2013 से चलाए जा रही एक पायलट परियोजना के तहत आधार आधारित पहचान से सीधे प्वाइंट ऑफ सेल के मशीनों के माध्यम से राशन बिक्री करने के लिए इस्तेमाल किया गया। वहीं फर्जी राशन कार्ड की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए फिंगर प्रिंट पहचान का उपयोग कर सही लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की गई। दूसरा, इससे न सिर्फ चावल माफिया नेटवर्क पर लगाम लगी बल्कि राशन डीलरों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बाहर वस्तुओं की बिक्री से भी रोका गया।

राज्यों में इन सफलतम प्रयोगों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने बीते अगस्त 2015 में ‘आधार’ पर एक अहम फैसले में कहा कि इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘आधार कार्ड का इस्तेमाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मिट्टी के तेल और रसोई गैस के वितरण की प्रणाली के अलावा किसी अन्य मकसद के लिए नहीं किया जाएगा।’ सभी सरकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड एैच्छिक होगा। वहीं शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा हासिल की गई सूचना अदालत की अनुमति से अपराधिक मामलों की जांच के अलावा किसी अन्य मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं की जाएगी।

यही वजह है कि केन्द्र सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी राशन कार्डधारक कंप्यूटरीकृत हो। क्योंकि इस तकनीक के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत करना आवश्यक है। दूसरे शब्दों में कहें तो जन वितरण प्रणाली के लिए संपूर्ण भारत में एक डाटा बैंक बनाया जा रहा है जिसकी जानकारी चरणबद्ध तरीके दी जा रही है। यह कंप्यूटरीकृत प्रणाली सभी प्रदेशोंं में लागू किया जाएगा। यह व्यवस्था सुचारू रूप से कार्य कर सके इसके लिए विशेषज्ञों से राय ली जा रही है और आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं।

इस नई व्यवस्था में सार्वजनिक जनवितरण प्रणाली की उचित मूल्य की दुकान से उपभोक्ताओं को अब पीओएस (पाइंट ऑफ सेल) मशीन पर अंगूठा लगाकर खाद्यान्न और अन्य सामग्री दी जाएगी। इस व्यवस्था से सार्वजनिक वितरण प्रणाली की अनियमितताओं पर पूरी तरह से रोक लग सकेगी। इस व्यवस्था में जो मशीन उपलब्ध करवाई गई है उस मशीन को आधार कार्ड से लिंक किया गया है, आधार कार्ड में परिवार के मुखिया का जो अंगूठा दर्ज है, उसी अंगूठे के मशीन में लगाये जाने पर ही खाद्यान्न व केरोसीन संबंधित परिवार को मिल सकेगा। इस मशीन में आवाज रिकार्डिंग की सुविधा भी है जिससे यह पुष्टि भी होगी कि उपभोक्ता ने कौन-सी सामग्री कितनी मात्रा में दुकानदार से मांगी थी और कौन-सी सामग्री कितनी मात्रा में उसे दी गई यह ऑनलाईन रिकार्ड रहेगा। वहीं देश में पहली बार मध्य प्रदेश सरकार ने यह व्यवस्था शुरू की है कि उचित मूल्य की दुकानों से मिलने वाले राशन का पक्का बिल भी उपभोक्ताओं को मिले। आगामी 26 जनवरी से उपभोक्ताओं को यह सेवा मिलने लगेगी।

दूसरी तरफ इस जैम तकनीक ने जनवितरण प्रणाली के भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने में सफल साबित हुआ है। इसका प्रमाण हाल ही में हरियाणा में देखने को मिला। जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली ई-पीडीएस के लिए तैयार किए जा रहे डाटाबेस में 13 लाख, 86, 461 आधार नंबर नकली मिले हैं। यह संख्या अब तक सत्यापित आधार नंबरों की संख्या का करीब16 फीसदी है। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री कर्णदेव कंबोज के मुताबिक सभी फर्जी कार्डों को निरस्त किया जाएगा। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक पीडीएस का फायदा पहुंचाना है, लेकिन जिन्होंने फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनवाकर इस योजना का अनुचित लाभ लिया है, उनके नाम काट दिए जाएंगे। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हर महीने सस्ते अनाज ले रहे लोगों को अब इसका फायदा नहीं मिल सकेगा।

pdssssssssssssss3

हरियाणा के विभागीय आंकड़े के मुताबिक अब तक 29,40,875 राशन कार्ड का सत्यापन किया गया। इनमें से 86,46,676 ऐसे सदस्य मिले, जिनके आधार कार्ड का सत्यापन किया जा सका। इनमें से 13,86,461 आधार कार्ड नकली निकले, जिनकी संख्या फरीदाबाद से सर्वाधिक 2,75,324 है। इस तरह सूबे में पहले से तैयार लाखों फर्जी राशन कार्ड की पुष्टि हुई है। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएस प्रसाद का कहना है कि ”आधार नंबरों में लाखों की संख्या में डुप्लिकेसी हुई है। विभागीय अधिकारियों को 31 जनवरी, 2016 से पहले सभी पहलुओं की जांच के बाद राशन कार्ड संबंधी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें फर्जी पाए जाने वाले सभी राशन कार्ड निरस्त कर दिए जाएंगे।”

यह अलग बात है कि राजस्थान में डाटा एन्ट्री का काम पूरा होने से पहले ही पीओएस मशीन से वितरण व्यवस्था लागू करने का भी खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। वहीं कई जगहों पर पीओएस(पाइंट ऑफ सेल) मशीन को कई राशन डीलर ठीक से नहीं चला पा रहे हैं। ऐसे में राशन वितरण को ऑन लाइन करने की व्यवस्था ठीक से लागू नहीं हो पा रही है। खैर यह नई व्यवस्था का शुरुआती चरण है। हालांकि खाद्य आपूर्ति विभाग ने नए राशन कार्ड और डाटा बैंक का काम पूरा होने तक पुराने राशन कार्ड से राशन सामग्री वितरण करने के मौखिक आदेश दे रखे हैं।

सारांश यह है कि ‘जैम’ एक ऐसी व्यवस्था है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली में रिसाव की समस्या पर लगाम लगाने में बेहद सक्षम है। राज्यों में इसकी सफलता एक नजीर है। नई व्यवस्था के तहत फिंगर प्रिंट आधारित पीओएस के माध्यम से राज्यों में जनवितरण प्रणाली के दुकानों को जोड़ने से वास्तविक लाभार्थियों को ही लाभ मिलेगा।

ऐसे मिलेगा सरकारी राशन

जैम की इस व्यवस्था के तहत राशन कार्ड धारक के बैंक खाते की जानकारी आईटी विभाग आधार कार्ड से जोड़ेगा। आधार कार्ड से जुड़ते ही परिवार के सदस्यों का डाटा प्वॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन में रिकॉर्ड हो जाएगा। यह वह मशीन है जिसमें लाभार्थियों का राशन कार्ड नंबर अंकित करने पर उसका नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या सबकुछ सामने आ जाती है। इससे पहले व्यवस्था थी कि रजिस्टर में नाम अंकित कर लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरण किया जाता था। लेकिन कोर पीडीएस सिस्टम में पीओएस मशीन से यह व्यवस्था संपादित की जाती है। और यह मशीन इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन काम करती है। नई व्यवस्था में राशन सामग्री केवल नए राशन कार्ड से ही मिलेगी। नए राशन कार्ड पर अलग-अलग कोड अंकित किए जाएंगे। जिनका बायोमेट्रिक सत्यापन इस मशीन से होगा। जनवितरण प्रणाली की दुकान पर अब उपभोक्ता के पास राशन कार्ड नहीं होने पर भी बायोमैट्रिक सिस्टम मशीन पर अंगूठे की निशानी देने पर खाद्य सामग्री मिलेगी। इसके साथ ही राशन दुकानदार अब राशन सामग्री की खरीद पर लोगों को पक्का बिल भी देगा। इस बिल में राशन सामग्री, उसकी मात्रा और दर अंकित होगी।

 

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here