पंचायत चुनाव लड़ना है तो शौचालय बनवाना होगा जरूरी

0
1181

बिहार में पंचायत चुनाव में वैसे लोग उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे जिनके घरों में शौचालय नहीं हों। यह विवादास्पद फैसला राज्य सरकार ने विधानसभा चुनावों के दौरान किया। इसे न केवल ‘व्यस्क मताधिकार की भावनाओं के खिलाफ माना जाएगा, बल्कि ग्रामीण-खेतीहर समुदायों के लिए अव्यवहारिक और हानिकर भी साबित होगा। इसका सबसे अधिक असर गरीब-कमजोर और दलित -आदिवासी समुदायों के लोगों पर होगा। उनके राजनीतिक अधिकारों का हनन होगा। शौचालय बनने की रफतार को देखें तो वंचित लोगों की तादाद कुल आबादी की तीन चौथाई से भी अधिक होगी। पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र के साथ शपथपूर्वक घोषणा करनी होगी कि उनके घर में शौचालय है। शपथपत्र में अगर गलत जानकारी दी गई तो उसके आधार पर बाद में उनकी उम्मीदवारी रद्द भी की जा सकती है। हालांकि चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा संचालित स्वच्छता योजना के तहत शौचालय का निर्माण करा सकते हैं। अथवा वे निजी स्तर पर भी शौचालय का निर्माण करा सकते हैं और फिर सरकारी अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी योजना के अंतर्गत शौचालय के लिए पहले स्थान चिन्हित किया जाएगा और फिर वहां निर्माण होगा। शौचालय निर्माण घर का सम्मान। यह सूत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का है। उनके सात निश्चय में घर घर शौचालय का निश्चय भी शामिल है। शौचालय निर्माण चरणवार करने की योजना है। पहले चरण में प्रखंड स्तर पर पांच गांव का चयन किया जाएगा। चयनित गांवों में सौ प्रतिशत शौचालय निर्माण की जिम्मेवारी अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी गई है। दूसरे चरण में हर प्रखंड में 50 गांवों का चयन किया जाएगा। शौचालय निर्माण के कार्य क मानिटरिंग जिलाधिकारी स्वयं करेंगे ताकि कोई लापरवाही नहीं हो। इसतरह से 2016 के अंत तक 1000 गांवों में सौ प्रतिशत शौचालय

निर्माpan bihar_nण की जिम्मेवारी अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास बना लेने का लक्ष्य रखा गया है। मार्च 2016 तक 100 गांवों को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त किया जाना है। हालांकि तमाम कोशीशों के बावजूद अभी तक राज्य के सात जिलों की नौ पंचायतें ही खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हो पाई हैं। खगडिया जिले के गोगरी प्रखंड की ग्राम पंचायत रामपुर सबसे पहले खुले में शौच से मुक्त पंचायत बनी थी। 10 अगस्त 2015 को इसकी घोषणा की गई थी। खगडिया के जिलाधिकारी ने इस योजना में दिलचस्पी दिखाई जिससे गोगरी प्रखंड की दो अन्य पंचायतें, गोगरी और बोरना भी 16 अक्टूबर को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त हो गई। 27 अगस्त को गोपालगंज जिले के हथुआ प्रखंड की पंचायत-जिगना जगन्नाथ, दो अक्टूबर को मुजफफरपुर जिले के सकरा प्रखंड की ग्राम पंचायत पैगंबरपुर, 28 सितंबर को बेगुसराय की बरौनी प्रखंड की अमरपुर पंचायत को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया। इसी कड़ी में दो अक्टूबर को वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड की मझौली पंचायत, समस्तीपुर जिले के पतौरी प्रखंड की पंचायत हरपुर सैदाबाद और 16 अक्टूबर को पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया प्रखंड की पंचायतराज लखौरा को खुले में शौच से पूरीतरह मुक्त बनाने में सफलता मिली।

toiletttttttttttttttttउल्लेखनीय है कि बिहार में 8398 पंचायतें हैं । इममें से केवल नौशौच केवल इन्ही नौ पंचायतों के सभी लोग पंचायत चुनावों में उम्मीदवार बन सकते हैं। खूले में शौच से मुक्ति के इस अभियान में राज्य सरकार के लोकस्वस्थ्य अभियंत्रण विभाग के साथ यूनिसेफ भी लगी हुई है। यूनिसेफ के जल एवं स्वच्छता अभियान के प्रभारी प्रवीण मोरे का कहना है कि खुले में शौच के खिलाफ जागरुकता अभियान का आधार शर्म और घृणा है। इस अभियान के संचालन के लिए यूनिसेफ ने अब तक राज्य में 650 लोगों को ​प्रशिक्षिण दिया है जो गांवों में जाकर लोगों को खुले में शौच के प्रति शर्म और घृणा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। शौचालय निर्माण के तत्काल बाद सरकार द्वारा 12 हजार रुपए की सहायता दी जाती है। लेकिन वास्तविकता यही है कि राज्य के स्कूलों में शौचालय निर्माण का काम भी पूरा नहीं हुआ है। मोटे तौर पर राज्य के 40 प्रतिशत स्कूल शौचालय विहिन हैं। घर घर शौचालय निर्माण की इस योजना में पटना जिला पर निष्चित ही अधिक जोर होगा। इस जिले में शौचालय निर्माण के लिए राशि की कमी नहीं है। सही योजना और प्रबंधन की कमी की वजह से जिला में घर घर शौचालय नहीं बन सके हैं। हालांकि अब सरकारी अनुदान के वितरण के नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब तक शौचालय निर्माण के लिए सरकारी अनुदान का भुगतान जिला मुख्यालय से किया जाता था। अब इसकी जिम्मेवारी प्रखड विकास पदाधिकारी को दी गई है। शौचालय निर्माण के बाद उपयोगिता के आधार पर बीडीओ द्वारा अतिरिक्त राशि का भुगतान किया जाएगा। हालांकि शौचालय निर्माण का लक्ष्य तभी पूरा हो पाएगा जब सौ प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों के घर में शौचालय हो। इसके लिए आंगनवाडी सेविका, सहायिका, आशा, इंदिरा आवास सहायिका एवं अन्य नीचले स्तर के कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के घर शौचालय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पटना के जिलाधिकारी ने इस कार्य के लिए पिछले सप्ताह ढाई करोड रुपए आवंटित कर दिए हैं।

आंकडों की भाषा में वर्ष 2015-16 में राज्य में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर 27 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य था, जबकि केवल एक लाख ही बन पाए।वर्ष 2019 तक राज्य में 1 करोड 64 लाख शौचालय बनने हैं। लेकिन करीब छह लाख परिवारों के पास शौचालय बनवाने के लिए जमीन नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here