संतोष कुमार सिंह
ट्रैक्टर युग में योगेंद्र यादव और उनके साथी जल हल यात्रा कर रहे हैं। टटोल रहे हैं कि किसानों की स्थिति कैसी है। इस यात्रा में उनके साथ है जल पुरूष राजेन्द्र सिंह, एकता परिषद के संस्थापक पी वी राजगोपाल खेती किसानी कैसा चल रहा है। चहुओर सूखा के हालात है लेकिन वे जल संभरण के परंपरागत साधनों और उसे कैसे बचाया जाए इस पर किसानों ग्रामीणों के साथ संवाद रत है। हांलाकि सरकारी स्तर पर भी जल की कमी दूर करने के लिए जल ट्रेन का सहारा लिया गया है। तो आईये पिछले कई दिनों से चल रहे इस जल—हल यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावो को टटोलते हैं.. समझते हैं कि जमीन पर क्या हालात हैं।
संवेदनाओ को संकल्प में संजोये आज सुबह की पहली किरण के साथ स्वराज अभियान की जल हल पदयात्रा लातूर जिले के सोनवती गाँव से प्रारंभ हुई। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की आशा की चिंगारी को खुद में समेटे राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्य को समझते हुए स्वराज अभियान मराठवाडा व बुंदेलखंड का 10 दिवसीय पदयात्रा कर रहा है। आज सोनवती गाँव, बभलगाँव और कटपुर से गुज़रते हुए सूखे की मार को देखा तो कही प्रशासन की उदासीनता को देखा। सूखा को अकाल में न परिवर्तित होने के अपने दृढ संकल्प के साथ स्वराज अभियान लगातार गाँव के आम जन की समस्याओ पर लोगो से मिल रहा हैं।
स्वराज अभियान स्थानीय संसाधनों का प्रयोग करते हुए सूखे से निदान व् निष्पादन के तरीको पर विस्तृत चर्चा कर रहा है। सूखे के लिए सुझाव तथा उससे सम्बंधित होने वाले कार्यो के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तथा उसे अपनी स्थानीय इकाईयों के माध्यम से ज़मीन पर उतारने का भरसक प्रयास किया जा रहा है। आज इसी कड़ी में स्वराज अभियान की स्थानीय टीम के द्वारा गाँव में पानी की समस्या के निष्पादन के लिए पास की एक नहर पर बनाई गई छोटी बाँध को जनता को समर्पित किया गया।
20 किलोमीटर से अधिक की आज की इस पद यात्रा के दौरान योगेन्द्र यादव व जल पुरुष राजेंद्र सिंह(जल बिरादरी) गाँव के लोगो से मिले, सूखे के कारण उनकी समस्याओ को देखा व समझा, तथा उसके उपायों पर स्थानीय लोगो से विस्तृत चर्चा की व सुझाव दिए। जल बिरादरी के राजेंद्र सिंह ने कहा कि दुर्भाग्य की बात यह है कि पानी बचाने के उनके कार्यो के लिए सरकारों ने उनपर सैकड़ो मुक़दमे कर दिए हैं। देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी व पानी के महत्व को समझते हुए हमे इस तरह के जन कल्याण के कार्यो में लगातार समर्पित रहना चाहिए।
स्वराज अभियान के संस्थापक सदस्य योगेन्द्र यादव ने कहा कि “यह सूखा नीति का फल है ना कि नियति का”। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की ख़राब नीतियों के परिणाम स्वरुप आज सैकड़ों करोड़ खर्च करने के पश्चात् भी लातूर जिले के जल संकट को नहीं टाला जा सका।स्वराज अभियान की जल हल पद यात्रा 25 मई तक मराठवाडा के विभिन्न सूखा ग्रसित क्षेत्रो में जारी रहेगी और इसके बाद यात्रा अपने दूसरे चरण में बुंदेलखंड के सूखा प्रभावित गावों का दौरा करेगा।
————–यात्रा मराठवाड़ा पार करते हुए अब बुंदेलखंड में प्रवेश करने वाली है।
आज सुबह 9 बजे जल हल यात्रा मराठवाडा में पदयात्रा पूरा कर के योगेन्द्र यादव, अविक साहा व डॉ. सुनीलम के नेतृत्व में गाँधी भवन पहुंची जहाँ पर बैठक आयोजित किया गया। बैठक को संबोधित करते हुए योगेन्द्र यादव ने कहा कि प्रदेश के 30 जिलों के प्रतिनिधियों ने सम्मलेन में जो तथ्यात्मक जानकारी रखी है उससे ये स्पष्ट हो जाता है कि राज्य सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दिए गए एफिडेविट का जिक्र करते हुए कहा कि उस एफिडेविट के बारे में भी जो तथ्य जिले के साथियों ने बताये हैं उससे स्पष्ट होता है कि तब भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सरकार ने गलत जानकारी पेश करने का काम किया था। सम्मलेन को मेधा पाटकर ने संबोधित करते हुए कहा कि पूरा मसला जल के नियोजन से जुड़ा है। पूरे मध्य प्रदेश का पानी किसानों को देने के बजाए उद्द्योगों की ओर मोड़ने का काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे जन संगठनों के साथ में मिलकर के एक ऐसी जल नीति तैयार करें जिसके अन्दर जल संसाधनों के ऊपर ग्रामसभा का अधिकार हो और अनावाड़ी को तय करने का अधिकार भी ग्रामसभा को दिया जाना चाहिए
इस सम्मलेन को संबोधित करते हुए जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय संयोजक डॉक्टर सुनीलम् ने कहा की माननीय उच्चतम न्यायालय के जो चार प्रमुख आदेश है उनमे से एक सभी सूखा प्रभावित व्यक्तियो को 5 kg अनाज दिया जाना है परंतु पुरे मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा परिवार मुख्यमंत्री नहीं बता सकते जिसे यह अनाज दिया जा रहा हो, पुराने BPL परिवारो को ही यह अनाज दिया जा रहा है। उन्होंने ने सरकार को चुनोती देते हुए कहा की पुरे मध्य प्रदेश में कौन से स्कूल में मिड डे मील लगातार सभी बच्चों को दूध या अंडे के साथ में दिया जा रहा है। उन्होंने कहा सरकार ने जरूर परिपत्र निकाला है लेकिन 5 या 10% से अधिक बच्चे कही पर भी इस मिड डे मील की योजना से लाभान्वित नही हो रहे है। इसी के साथ उन्होंने ने कहा की जो किसान खाद और बीज लेना चाह रहे है उन्हें नया कर्ज नहीं मिल रहा है, और ना ही सरकार ने घोषणा के अनुरूप फसल का मुआवजा वितरित किया है। सरकार ने मनरेगा को ले कर जो घोषणा की थी कि 4 जरवरी से केंद्र सरकार में परिपत्र के आधार पर 150 दिन का काम मनरेगा के अंतर्गत दिया जायेगा, लेकिन अगर जनवरी से अब तक सवा सौ दिन है तो सरकार को पुरे मध्य प्रदेश में एक व्यक्ति का नाम बताना चाहिए जिसे अब तक सवा सौ दिन का काम मिला हो।
— अभी यात्रा जारी है योगेंद्र यादव और उनके साथियों की और पीड़ित किसानों की भी..यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर गुफतगू के लिए मैं भी….। आपके साथ पंचायत खबर के जरिए।



