नीरज प्रताप सिंह
हैदराबाद में काम ख़त्म हो जाने के बाद वापस दिल्ली आने का प्लान था ,पर अचानक ही मन में एक ख्याल आया कि क्यों न मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का दर्शन कर लिया जाय,फिर क्या था बन गया प्लान ,ऑन लाइन बस का टिकट लिया और पहुँच गये MGBS बस स्टेण्ड ,बस रात्रि के 11 .15 को थी ,बस नियत समय से ही खुली ,का नजारा देखते देखते कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला ,करीब तीन बजे के आसपास नींद खुली तो देखा बस रुकी हुई है ,वहां बहुत सारी बस और निजी वाहन खड़ी थी ,बस से नीचेआने पे पता चला कि यहाँ से आमराबाद टाइगर रिजर्व शुरू होता है और रात्रि में यहाँ से आगे कोई गाड़ी को जाने नहीं दिया जाता है बस अब सुबह ही यहाँ से जाएगी ,वापस बस में आये और अपनी सीट पे सो गए ,सुबह बस खुली तो जंगल का एरिया शुरू हो चूका था ,काफी लम्बा एरिया था जंगल का साथ वाले यात्री से पूछा तो पता चला कि यही नल्ला मल्ला का जंगल है ,जिसका कुछ हिस्सा अब तेलंगाना में तो कुछ आँध्रप्रदेश में आता है ,इस टाइगर रिजर्व में टाइगर तो नहीं दिखे हाँ कुछ हिरन जरूर दिख गए ,आगे जाने पे एक बहुत बड़ा बाँध नजर आया ,उसी यात्री ने बताया कि ये श्रीशैलम बांध है जो कृष्णा नदी पे बनाया गया है काफी गहरा बांध है ,और बड़ा ही मनोरम दृश्य था वहां का पर अफसोश बस के चलते रहने के कारन वहां का कोई फोटो ठीक से नहीं ले पाया ,एक बात से दुःख हुआ कि इतना गहरा बांध में पानी नहीं के बराबर था ,पता नहीं पावर प्रोजेक्ट कैसे काम कर रहा होगा ?बस यहाँ यहाँ से आगे बढ़ी और कुछ ही घंटे में हम नागार्जुन ज्योतिर्लिंग के शहर श्रीशैलम में थे ,,,,,,
बस से उतरते ही सोचा कि कोई धर्मशाला या गेस्टहाउस में कमरे ले कर फ्रेश हुआ जाय फिर मंदिर में दर्शन और वापस हैदराबाद। सामने एक धर्मशाला दिखा ,मैंने एक कमरे की मांग की तो उनका प्रश्न था कि आपका गोत्र क्या है क्या आप ब्राह्मण है ,मैंने कहा नहीं,तब तो आपको कमरा नहीं मिल सकता ,क्योंकि यहाँ सिर्फ ब्राह्मणों को ही रहने की इजाजत है ।मैंने कहा कि मैं रुकने नहीं आया हूँ,,,, सिर्फ फ्रेश होने को ही दे दीजिये क्योंकि दर्शन कर मुझे वापस हैदराबाद लौटना है ,लेकिन मुझे इजाजत नहीं मिली। फिर मैं दुसरे गेस्टहाउस में गया उनका कहना था क्योंकि आप अकेले है इसलिये आपको कमरा नहीं मिलेगा ,फिर इस तरह कई धर्मशाला और गेस्टहाउस के चक्कर लगाये जबाब वही था ,,,,,,तब मैंने एक दुकानदार से पूछा ,उसने कहा आपको कमरा मंदिर के आसपास नहीं मिलेगा आप अगर फ्रेश होना चाहते है तो मंदिर परिसर में ही नहाने की व्यवस्था है आप वहाँ जाइये। वहां लाइन लगी हुई थी पुरुषों और महिलाओं की ,,,,,खैरकुछ देर बाद अपना नंबर आया तो 10 रुपये देकर नहाया ,फिर लॉकर का पता किया तो 10 रुपये बैग का फिर दूसरे काउंटर पे 10 रुपये मोबाइल के और अंत में 10 रुपये जूते रख के दर्शन को मंदिर में प्रवेश किया । शुरू में तो खाली खाली सा मंदिर दिखा पर आगे जाने पर लंबी लाइन नजर आयी। लाइन धीरे धीरे सरकते करीब तीन घंटे बाद अपना नंबर आया ,,,,,,,
मंदिर के अंदर की व्यवस्था ठीक थी दर्शन और कुछ देर रुकने के उपरांत वहां से बाहर निकला । बाहर आ कर पता चला कि अगर आप जल्दी पूजा करना चाहते हैं तो आप कुछ पैसे देकर जल्दी पूजा कर सकते हैं,,,,, अलग अलग रेट का बोर्ड लगा था 50 रुपये 100 रुपये से 500 रुपये तक का चार्ज है पैसे दीजिये और उस लाइन में लग जाइये अगर जल्दीबाजी है तो । बाहर आ के एक रेस्टोरेंट में खाना खाया और आ गये बस स्टेण्ड पे फिर बस लिया और शाम तक हैदराबाद । बस में ही एक सहयात्री ने बताया कि यहाँ आना हो तो बेहतर है कि आने जाने और रहने की बुकिंग ऑन लाइन ही करा लें तो असुविधा नहीं होगी ।
रास्ते में अमराबाद टाईगर रिजर्व में होकर जब बस गुजर रही थी तो सोचा कि बाघ के दर्शन शायद हो जाय,,,,, लेकिन मैं इतना भाग्यशाली नहीं था हाँ कुछ हिरण और लंगूर जरूर दिखे ।

