चंद्रयान-3 चंन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर चुका है। अभी तक साउथ पोल पर किसी देश ने अपना खोजी यंत्र नही उतारा था। भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन चुका है। आज 23 अगस्त दिन बुद्धवार है। आज ही के दिन यान को चंद्रमा पर उतारना तय किया गया था। आज साम 6 बजकर 4 मिनट पर भारत ने इतिहास रच दिया है। विक्रम लैंडर चंद्रमा पर सफलता पूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग किया और रोवर प्रज्ञान ने अपना काम शुरू कर दिया है।
बता दें कि चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने के लिए पहले भी अन्य कई देश प्रयास कर चुके हैं। 2019 में इजराएल ने प्रयास किया था लेकिन असफल रहा था। उसके बाद भारत का चंद्रयान-2 भी असफल रहा था। इसके बाद जापान ने मिसन हकुको-आर लांच किया था। जापान के चंद्रयान में यूएई का रोवर था, यह अभियान भी असफल रहा था। अभी कुछ दिन पहले रूस का लूना क्रैस किया है, जिसके बारे मे सभी जानते ही हैं।
लगातार असफलताओं से यह बात तो साबित होती है की चंद्रयान का चंद्रमा पर लैंड करना बिल्कुल आसान नही था और आखिरी तक अनिश्चितता बनी थी। ईसी लिए ईसरो ने कहा था कि जरुरत पड़ने पर हम चंद्रयान-3 की लैंडिंग को 27 तारीख तक अस्थगित कर सकते है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि चंद्रमा पर कभी भी धूल की आंधी चलने लगती है। कभी-कभी यह बहुत भयावह हो जाती है, ऐसे में यान को लैंड कराना सुरक्षित नही होता।
स्थितियों की बारीकी से समीक्षा के बाद ईसरो ने अभियान को हरी झंडी दिखाया और तय समय पर ही यान को लैंड कराया गया। पूरी दुनिया की नज़र भारत पर टिकी थी। नासा सहित दुनिया की सभी बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियॉ भारत के इस पहल पर नज़र गड़ाए हुए थी। आखिरकार भारत ने अपने चंद्रयान की सफलता पुर्वक लैंडिंग कराकर इतिहास रच ही दिया है।
ईसरो के ऑफिशियल यूट्युब चैनल पर चंद्रयान की लैंडिग को लाइव किया गया। लगभग 65 लाख लोगों ने चंद्रयान की लैंडिंग को लाइव देखा। जिससे यह पता चलता है कि लोगों की रुचि विज्ञान में बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स की समिट अटेंड करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए हुए हैं, उन्होंने वर्चुअली जुड़कर ईसरो के इस महॉअभियान को देखा और इस बड़ी सफलता के लिए वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी।
