बिहार में समेकित कृषि के लिए राष्ट्रीय शोध केंद्र खोलने की कवायद शुरू हो रही है । जिसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र(आईसीएआर) पटना द्वारा इस आशय का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। केंद्रीय योजना आयोग ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है। इस शोध केंद्र के बनने से खाद्य व पोषण सुरक्षा योजना के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग मिलेगा।शोध केंद्र को पूवी भारत में शुरू द्वितीय हरित क्रांति से जोड़कर देखा जा सकता है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में जनसंख्या का जो दबाव देश में बढ़ेगा उसके लिए अनाज तथा खाने पीने की अन्य वस्तुओं का अतिरिक्त उत्पादन बिहार तथा पूवी भारत के राज्यों से करना है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी समेकित कृषि के इस राष्ट्रीय शोध केंद्र को बिहार में खोले जाने के इच्छुक हैं। जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि बिहार को यह शोध केंन्द्र मिल जाएगा। आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक समेकित खेती बिहार की छोटी जोत के खेतों के लिए काफी उपयोगी है।
क्या है समेकित खेती
एक ही खेत (प्लाट) में बागवानी, मछली पालन, अनाज उत्पादन, मुगी पालन, डेयरी का काम एक साथ होता है।छोटे से खेत में ही बागवानी, मछली पालन, अनाज उत्पादन, मुगी पालन, डेयरी का काम कर किसान अधिक से अधिक आमदनी कर सकते हैं। अकेले बिहार में ही 10 लाख हेक्टेयर जलप्लावित क्षेत्र है जहां पर मछली, मुगी पालन की अपार संभावनाएं हैं। पूवी भारत में जलप्लावित क्षेत्र 40 लाख हेक्टेयर है। इस शोध केंद्र के लिए करीब 35 एकड़ भूमिकी जरूरत पड़ेगी। जिसमें से 25 एकड़ शोध काय के लिए और दस एकड़ कायालय और आवासीय परिसर के लिए होगी। आईसीएआर पटना के निदेशक डा. बीपी भट्ट ने बताया कि मोदीपुरम मेरठ में समेकित कृषि के लिए देश का एकमात्र शोध केंद्र है। जिसके माध्यम से देश में करीब 80 स्थानों पर प्रोजेक्ट चल रहा है।”
