
चंडीगढ़: पंजाब में जलाई जाने वाली पराली के कारण राजधानी दिल्ली में प्रदूषण जल्दी दस्तक दे सकता है। दरअसल पंजाब के किसानों ने अभी से ही पराली जलाना शुरू कर दिया है। पहले किसान 1 अक्टूबर के बाद पराली जलाया करते थे। लेकिन एक दो सालों से किसानों ने ठंड के मौसम की शुरूआत में ही पंजाब,हरियाणा और उत्तर प्रदेश के खेतों में किसानों द्वारा आग लगा दी जाती है। जिसके कारण दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। जिसके चलते लोगों को स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ता है। इन राज्यों के किसान फसल काटने के बाद सैकड़ों वर्ग किलोमीटर धान के खेतों में अवशेष नष्ट करने के लिए आग लगा देते हैं। जिससे खासकर दिल्ली में प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। ठंड के सीजन में राजधानी की हवा में प्रदूषण की मात्रा गंभीर श्रेणी में पहुंच जाती है। बड़ी बात यह है कि इनमें भी पराली जलाने के ज्यादातर मामले बासमती धान उगाने वाले किसानों के खेतों के होते है।

अधिकारियों की माने तो पराली में लगाई जाने वाली आग को शून्य स्तर पर लाने की कोशिश की जा रही है। पंजाब में हर खरीफ सीजन में लगभग 70 लाख एकड़ रकबे में धान की खेती की जाती है। इस खेती से 22 मिलियन टन धान की पराली निकलती है। इस बार धान की कटाई शुरू होने से 15 दिन पहले ही पराली जलाने के मामले सामने आने लागे हैं। अमृतसर जिले में 15 सितंबर से पीपीसीबी के रिकॉर्ड में 26 धान की पराली जलाने की घटनाओं के साथ चार्ट में सबसे ऊपर है। इसके बाद तरण और फिरोजपुर और नवांशहर में एक-एक मामला दर्ज किया गया है।
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हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बहुत साफ हैं कि धान की पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाए। सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को इसके अनुसार कार्यवाही करने के लिए कहा गया है।
दिल्ली सरकार ने साधी चुप्पी
आमतौर पर पंजाब से आने वाले पराली के धुअें को लेकर दिल्ली सरकार पहले से ही तैयारियां शुरू कर देती रही है साथ ही अपने परंपरागत शैली में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पंजाब पर आरोप लगाते रहे हैं कि दिल्ली के प्रदूषण के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार जिम्मेवार है। लेकिन जब से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है केजरीवाल को पराली जलाने और धुएं के कारण फैलने वाले प्रदूषण को लेकर तल्ख स्वर थोड़े नर्म हो गये हैं। ऐसे में देखा जाना होगा कि पंजाब और दिल्ली की आप सरकारें आपसी समन्वय से दिल्ली वालों को पराली के धुयें के घुटन से राहत दिलाती है या दिल्ली वालों का प्रदूषण के कारण जीना दूभर होता है।
