- प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए खेत फसलों, बागवानी, डेरी, कुक्कुट पालन, मत्सय पालन और कृषि संबंधी अन्य क्रियाकलापों के साथ् कृषि क्षेत्र के लिए एक नई कार्यनीति बनाई हैं।
नई दिल्ली: देश में लगातार किसान आंदोलन का दायरा बढ़ रहा है। राज्य सरकारें अपने तरीके से किसानों के मानमनौव्वल में लगी हुई हैं। कर्ज माफी की घोषणाएं भी की जा रही हैं। इस बीच केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा है कि सरकार वर्ष 2022 तक अर्थात आजादी प्राप्त करने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर सही अर्थों में किसानों की आय दुगुनी करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रयोजन से अभिप्राय यह है कि कृषि समुदाय के संकट का स्पष्ट समाधान हो। जनगणना, 2011 के अनुसार हमारे किसानों में से 22.5 प्रतिशत किसान गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। केन्द्र सरकार प्रतिबद्ध है कि इन सभी को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया जाए। यह बात उन्होंने आज ए.पी. शिंदे सिम्पोजियम हॉल, आईसीएआर, पूसा नई दिल्ली में इंडिया टुडे एग्रो शिखर सम्मेलन (कृषि कन्क्लेव) एवं एवार्ड समारोह में कही।
पूरा होगा प्रधानमंत्री का सपना
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए खेत फसलों, बागवानी, डेरी, कुक्कुपट पालन, मत्सय पालन और कृषि संबंधी अन्य क्रियाकलापों के साथ् कृषि क्षेत्र के लिए एक नई कार्यनीति बनाई हैं। इस प्रयोजन के लिए सरकार ने बजटीय आवंटन में वृद्धि कर दी है जो वर्ष 2016-17 के लिए 45035.20 करोड़ रू. था जो वर्ष 2017-18 के दौरान मंत्रालय के द्वारा बढ़ाकर 62376 करोड़ रू. कर दिया गया है। सरकार ने गैर-बजटीय संसाधन को एकीकृत करने के लिए भी नई कार्यनीतियां बनाई हैं। इन कार्यनीतियों के तहत एआईबीपी परियोजनाओं के लिए 40 हजार करोड़ रू., सूक्ष्म सिंचाई के लिए 5000 करोड़ रू. और डेरी विकास के लिए 8000 करोड़ रू. की कार्पस निधि शामिल की गई हैं।
मनरेगा के प्रावधानों में संशोधन
इसके अतिरिक्त सरकार ने कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ाने के लिए मनरेगा जैसी विभिन्न स्कीमों से संबद्ध नियमों और दिशा-निर्देशों में भी परिवर्तन किए हैं। इसके कारण जल कार्यकलापों से संबंधित मनरेगा के तहत किए गए निवेश में कुल आवंटन में से 50 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हुई है।
इन पर हुआ काम
(i) बीज: प्रमाणित और गुणवत्ता्युक्त बीजों की कुल मात्रा बढ़ा दी गई है और वर्ष 2016-17 में इनकी उपलब्धता 380 लाख क्विंटल थी। 30,000 गांवों में बीज गांव कार्यक्रम आयोजित किए गए और दलहन के लिए 150 बीज केंद्र बनाए गए।
(ii) उत्पादन संबंधी कार्यक्रम: एनएफएसएम और एनएमओओपी के तहत और अधिक उत्पादन करने के लिए फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करनी है। इन कार्यक्रमों में मिनीकिटों का वितरण, अग्र पंक्ति व प्रदर्शनों का संचालन, समूह अभिप्रदर्शन, जल बचत युक्तियां, आईपीएम, आईएनएम और क्षमता निर्माण शामिल हैं। वर्ष 2016-17 में दलहनों पर विशेष जोर दिया गया था। वर्ष 2016-17 में खाद्यान्न का 273 मिलियन मी. टन और फलों तथा सब्जियों का 287 मिलियन मी. टन रिकार्ड उत्पादन हुआ था। दलहनों का अनुमानित उत्पांदन 22.4 मिलियन मी.टन है, जबकि तिलहनों का उत्पादन 32.50 मिलियन मी.टन है।
(iii) मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एस.एच.सी.) : वर्ष 2015-16 के पूर्व विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा छोटे स्तवर पर अलग-अलग संस्करणों में मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाये जाते थे तथा इसके लिए अलग से कोई राशि आवंटित नहीं की जाती थी। इस विषय की गम्भीरता को देखते हुए पहली बार मृदा स्वास्थय कार्ड योजना प्रारंभ की गई जिसमें एक समान मृदा नमूना एकत्रीकरण एवं परीक्षण पद्धति को अपनाया गया है। इस योजना के माध्यम से 12 मृदा स्वास्थ्य पैरामीटरों का विश्लेषण किया जाता है जिससे किसान को अपनी जमीन में उर्वरकों एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के जरुरत की सही जानकारी हो सके। इस योजना के माध्यम से न सिर्फ किसानों के लागत मूल्य में कमी आ रही है वरन सही पोषक तत्वों की पहचान एवं उपयोगिता भी बढ़ी है। वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 के दौरान रसायनिक उर्वरकों की खपत में 8 से 10 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की समग्र वृद्धि हुई है।
(iv) जैविक कृषि को बढ़ावा देना: पूर्वोत्तर क्षेत्र और हिमालयी राज्यों सहित विशेष रूप से वर्षा सिंचित और पहाड़ी क्षेत्रों में संधारणीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा 2 वृहद स्कीमें बनाई गई हैं। परपरांगत कृषि विकास योजना और पूर्वोत्ततर क्षेत्र के लिए जैविक श्रृंखला विकास योजना दो महत्वपूर्ण पहले हैं।
(v) पीएमकेएसवाई: मंत्रालय वर्षा सिंचित क्षेत्रों में कृषि के बार में सबसे ज्यादा सतर्क एवं चिंतित है। इस समस्या के निदानार्थ सरकार ने एक वृहद पीएमकेएसवाई योजना शु्रू की है। इस योजना के तहत वर्ष 2019-20 तक 99 दीर्घलंबित और अपूर्ण प्रमुख एवं मध्यम कृषि परियोजनाओं को पूरा करके 7.6 मिलियन हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई के तहत लाया जाएगा। इसके अ
लावा मनरेगा की निधियों का उपयोग संरक्षात्मक सिंचाई करने के लिए भी किया जाएगा। पिछले 2 वर्षों के दौरान 9 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र मनरेगा के तहत लाभांवित हुआ है। मंत्रालय के लिए जल उपयोग दक्षता भी एक महत्वपूर्ण रूप से ध्यान दिये जाने वाला क्षेत्र है। वर्तमान में सूक्ष्म सिंचाई के तहत 9 मिलियन हैक्टेयर से भी कम क्षेत्र है एवं अब सरकार सूक्ष्म सिंचाई के तहत प्रतिवर्ष 2 मिलियन हैक्टेयर क्षेत्र को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्ष 2016-17 में सूक्ष्म सिंचाई के तहत 8.5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को लाया गया था। पीएमकेएसवाई के भाग के रूप में वाटरशेड और भूमिगत जल रिचार्ज के माध्यम से जल संसाधनों की सततता पर भी जोर दिया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने 2017-19 के लिए रोडमैप बनाया है जिसपर कार्य प्रारंभ हो गया है। मंत्रालय कृषि आदान यथा बीज, जल, उर्वरक एवं मृदा स्वास्थ्य के संबंध में विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन कर रहा है। उत्पादन में वृद्धि करने के लिए चावल के परती क्षेत्र, बार-बार सूखा पड़ने वाले 100 जिलों, पॉम आयॅल तथा दलहन की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। बागवानी एवं मधुमक्खी पालन से किसानों की आय में वृद्धि करने का अत्यधिक स्कोप हैं अत: इस क्षेत्र में मंत्रालय विशेष रूप से कार्य कर रहा है। इसके अतिरिक्त जैविक खेती के विकास एवं कृषि वानिकी के विकास के लिए कार्य को भी तेज करना है।

