तिलहन की फसलों में भारी गिरावट, तेल की हो सकती है किल्लत, जानें इसकी वजह

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पूजा श्याम

 

नई दिल्ली:  देश में किसान तिलहन की खेती की जगह गेहूं की बुवाई ज्यादा करते है। जिसके कारण तिलहन की फसलों में गिरावट आ रही है। हालांकि ऐसा करने से आने वाले समय में न केवल तेल के दाम बढ़ सकते हैं बल्कि खाने के तेल की किल्लत का भी सामना करना पड़ सकता है। इस साल भले ही रबी फसलों का रकबा पिछले साल से अधिक बड़ा है। लेकिन अन्य फसलों की तुलना में तिलहन फसलों के रकबे में बड़ी गिरावट आई है।

तिलहन रकबे को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। क्योंकि हम कुल खपत का लगभग 55 फीसदी प्राप्त करते हैं। तेल के आयात की मात्रा को कम करने के लिए सरकार तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रही है। सरकार के प्रयासों के बावजूद भी तिलहन फसलों के रकबे में 4 फीसदी की गिरावट और गेहूं के रकबे में 2.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस साल फसलों का रकबा 656 लाख हेक्टेयर रहा ​है। य​ह पिछले साल कि तुलना में 2 प्रतिशत बढ़ा है। यानी लगभग 12 लाख हेक्टेयर अधिक है। पिछले वर्ष यह आकड़ा 644 लाख था।

 

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तिलहन के रकबे में गिरावट
​हालांकि कुछ रिपोर्टो से पता चलता है कि इस साल तिलहन के रकबे में पिछले साल की तुलना में लगभग 2.9 प्रतिशत से 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। 2023-24 में तिलहनी फसलों का रकबा 102 लाख हेक्टेयर था। जो इस साल कम होकर 98 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। तिलहनी फसलों में से सबसे ज्यादा गिरावट सरसों और रेपसीड में देखा है।

 

तिलहन फसलों के रकबे में गिरावट का कारण
उत्तर प्रदेश योजना आयोग के पूर्व सदस्य सुधीर पंवार के अनुसार तिल की खेती में अधिक मेहनत और लागत लगती है। जिसके कारण किसान तिल की खेती को छोड़कर अन्य फसलों की खेती कर रहे है। तिलहनी फसलों में किसानों को कम मुनाफा मिलता है।

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