पंचायत खबर डेस्क
गाजीपुर जिले में एक ऐसा परिवार है जिसके पूरे सदस्य एचआईवी से संक्रमित हो चुके है। जी हाँ, हम बात कर रहे है दुल्लहपुर थाना इलाके के जलालाबाद स्थित मियनाबड़ा गांव का। इस गांव के रहने वाले नरेन्द्र चौहान के अलावा उनकी पत्नी और एक मासूम बच्चे में एचआईवी संक्रमित पाया गया। जिसकी जानकारी होते ही नरेन्द्र के माता-पिता और परिजनों ने परिवार से नाता तोड़ कर अलग कर दिया। हद तो तब हो गई जब इस बात की जानकारी जब गांव वालों को हुई तो वो लोग भी उनके परिवार से मुंड मोड़ लिया। और उसके आना जाना भी छोड़ दिया। इतना ही नहीं परिवार और गांव की उपेक्षा झेलने के बावजूद जब पीड़ित परिवार अपने बच्चे का दाखिला कराने निजी स्कूल गया तो दाखिला लेने से इनकार कर दिया गया। जब इस बात की जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजभूषण दूबे को लगी तो फौरन पीड़ित परिवार के यहां पहुंचे और उनका हाल चाल लिया। और स्कूल में बच्चे की दाखिला के लिए धमक पड़े। मौके पर खण्ड शिक्षाधिकारी भी मौजूदगी में काफी हॉट टॉक के बाद विद्यालय में बच्चे का दाखिला कराया गया। हालांकि पीड़ित परिवार जिलाधिकारी समेत जनप्रतिनिधियों से भी कई बार गुहार लगा चुका था। जिसके बावजूद भी कोई भी सुविधा मुहैया नहीं कराया गया।
यूँ बनी बात
एचआईवी पीडित 8 वर्षीय छात्र ने गले में तख्ती लगाकर माता-पिता एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ जुलूस निकाला। पीठ पर झोला व गले में तख्तीलटकाये छात्र चन्द्रप्रकाश का उत्साह देखने लायक था। उसे कुछ दिन पहले आरबीसी स्कूल जलालाबाद से यह कहकर बाहर कर दिया गया था कि तुम्हें व तुम्हारे माता-पिता को एडस की बीमारी है। तुम्हारे वजह से विदयालय के और बच्चे भी संक्रमित हो जायेंगे। जलालाबाद के मियना बडा से जब छात्र अपने माता-पिता व सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ स्कूल पर पहुंचा तो उस समय वहां जखनियां के खण्ड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश तिवारी भी मौके पर पहुंचे थे। विदयालय के प्रबन्धक ने बच्चे को बाहर निकालने के लिये अध्यापकों को जिम्मेदार ठहराते हुये खेद प्रकट किया और चन्द्रप्रकाश का नाम दूसरी कक्षा में दाखिल कर लिया।
परिवार ने मुह मोड़ा
संक्रमित विकलांग पति-पत्नी नर्रेन्द्र चौहान व सुनीता को उनके माता-पिता ने ही न केवल अलग कर दिया बल्कि उनके हाथ का कुछ भी खाने-पीने से मना कर दिया। घर में अनाज का एक दाना नहीं था। 2007 में पैदा हुये बेटे चन्द्र प्रकाश सहित उसके माता-पिता का इलाज 2011 से ही काशी हिन्दू विश्वविदयालय में चलने के बाद भी गरीब परिवार को गरीबी रेखा से उपर का राशन कार्ड जारी कर हृदयहीन लोक सेवकों ने वार्षिक आय 25 हजार रूपये दिखाया। पीडित परिवार को अन्त्योदय कार्ड, आवास, शौचालय एवं पेन्शन योजनाओं के लाभ की भी मांग की। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीडित परिवार के साथ बैठकर भोजन किया और लोगों से बताया कि एच0आई0वी0 संक्रमण की बीमारी नहीं है तथा ऐसे मरीजों को समाज की मुख्य धारा से जोडा जाना चाहिये। समाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि शासन तत्काल इस परिवार के लिये आवास, हैण्डपम्प, पेन्शन जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान कराये अन्यथा हम चुप नहीं बैठेंगे।
खण्ड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश तिवारी ने निजी संस्था के प्रधानाचार्य व प्रबन्धक को आरोपित करते हुये कहा क्यों निकाला गया एस0आई0वी0 पीडित छात्र को जिसका जबाब विदयालय के पास नहीं था तभी समग्र विकास इंडिया के महामंत्री शन्ने भाई ने खण्ड शिक्षा अधिकारी से सवाल किया कि पीडित छात्र की उम्र 8 वर्ष है जिसे सर्व शिक्षा अभियान व डोर टू डोर सर्वे में चिन्हित नहीं किया गया। आखिर शिक्षा विभाग करता कया है इसका कोई जबाब उनके पास नहीं था। फिलहाल खण्ड शिक्षाधिकारी ओम प्रकाश तिवारी ने पीड़ित के जख्मों पर मरहम लगाते मासूम बच्चे को तत्काल दाखिला विद्यालय में कराया और पीड़ित महिला को रसोइयां के पद पर नियुक्ति दिलाने का भी आश्वासन दिया। जिसके लिए पीड़िता से आवेदन पत्र भी तत्काल लिया।
क्या है पूरा मामला-
गाजीपुर जनपद अन्तर्गत जखनियां तहसील के ग्राम जलालाबाद निवासी 32 वर्षीया सुनीता 2006 में ही गर्भावस्था में संक्रमित इन्जेक्शन लगने के कारण एच0आई0वी0 संक्रमित हो गयी जिसकी जद में गर्भ में पलने वाला बच्चा भी आ गया। कुछ दिनो बाद सुनीता का पति नरेन्द्र भी संक्रमित हो गया। संक्रमण का पता 2010 में चला। जांच के बाद 2011 से नियमित इलाज पति-पत्नी एवं बच्चे का काशी हिन्दू विश्व विदयालय से चल रहा है। संक्रमण की जानकारी होने के बादनरेन्द्र के माता-पिता ने ही पति पत्नी एवं बच्चे को अलग कर दिया कि तुम्हारे साथ रहने पर हम लोग भी संक्रमित हो जायेंगे।
जिलाधिकारी सहित जनप्रतिनिधियों से लगा चुके हैं गुहार-
पीडित पति पत्नी बच्चे के साथ कई बार तहसील से लेकर जिलाधिकारी एवं क्षेत्रीय सांसद/रेल राज्यमंत्री के अलावा क्षेत्रीय विधायक सुब्बा राम तक अपना दुखडा रोते रोते थक गये हैं। पीडित परिवार का मामला उठाने वाले ब्रज भूषण दूबे का कहना है कि हम उन्हें न्याय दिलाने हेतु केन्द्र, प्रदेश के अलावा मानव अधिकार तक मामला ले जायेंगे तथा जनता में भी अलख जगायेंगे।

